महाराष्ट्र में शिवसेना उर्मिला मातोंडकर को बनाने जा रही एमएलसी, राज्यपाल को भेजा नाम
महाराष्ट्र में शिवसेना उर्मिला मातोंडकर को बनाने जा रही एमएलसी, राज्यपाल को भेजा नाम
मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर को महाराष्ट्र सरकार जल्द ही विधान परिषद का सदस्य बनाने वाली है। महाराष्ट्र महागठबंधन (MVA) सरकार ने शुक्रवार को महाराष्ट्र राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के कोटे से महाराष्ट्र विधान परिषद में नामांकन के लिए 12 नामों की सूची भेजी। इस सूची में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस के चार-चार नाम शामिल हैं। इन्हें राज्यपाल के कोटे से विधान परिषद भेजा जाएगा। इस लिस्ट में उर्मिला मातोंडकर का नाम भी शामिल है।

भाज्यपाल को तीनो पार्टियों ने भेजे ये नाम
बता दें महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी सरकार में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस का गठबंधन है। गठबंधन सरकार में शामिल इन तीनों पार्टियों ने अपने 4-4 नेताओं का नाम राज्यपाल को भेजा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ( एनसीपी) ने एकनाथ खडसे, राजू शेट्टी, यशपाल भिंगे और आनंद शिंदे का नाम भेजा है और कांग्रेस ने रजनी पाटील, सचिन सावंत, मुझफ्फर हुसैन और अनिरुद्ध वनकर का नाम भेजा है। वहीं सत्ता पर काबिज शिवसेना ने उर्मिला मातोंडकर, चंद्रकांत रघुवंशी, विजय करंजकर और नितीन बानगुडे पाटील का नाम राज्यपाल को भेजा है।

2019 लोकसभा चुनाव में उर्मिला लड़ चुकी है इस पार्टी से चुनाव
गौरतलब है कि एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस में शामिल हुई थीं। कांग्रेस पार्टी ने उन्हें मुंबई नॉर्थ से टिकट दिया था लेकिन वो चुनाव हार गई थी। उर्मिला ने मराठी फिल्म 'जाकोल 1988' से सात साल की उम्र में बतौर बालकलाकार करियर की शुरुआत की थी उसके बाद उन्होंने शेखर कपूर की फिल्म 'मासूम' में बाल अभिनेत्री के रूप में नजर आईं थी। इससे बाद अनेक बॉलीवुड फिल्मों में अपनी अदाकारी से नाम कमाया।

एनसीपी ने एकनाथ खडसे का भेजा है नाम
बता दें राज्यपाल को भेजी गई इस लिस्ट में एनसीपी ने एकनाथ खडसे का नाम भी शामिल है जिन्होंने हाल ही में भाजपा का साथ छोड़कर शरद पवार की एनसीपी का हाथ थामा था।इससे पहले, तीनों दलों ने अलग-अलग मुहरबंद लिफाफों में नाम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को सौंप दिए थे क्योंकि उन्होंने नामों का खुलासा नहीं करने का फैसला किया था। एक वरिष्ठ मंत्री ने फ्री प्रेस जर्नल को बताया, "तीनों पक्ष गवर्नर बीएस कोश्यारी को प्रेस और मीडिया के सामने खुलासा करने का कोई मौका नहीं देना चाहते।" नामांकन जून में होने वाले थे लेकिन COVID-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था।












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