Mizoram Election 2023: 5 राज्यों में क्यों सबसे अलग है मिजोरम विधानसभा का चुनाव प्रचार?

Mizoram Assembly Election 2023: अभी जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार अभियान चल रहा है, उसमें पूर्वोत्तर का मिजोरम भी शामिल है। लेकिन, बाकी चारों राज्यों- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना से यहां का चुनावी माहौल पूरी तरह से अलग है।

मिजोरम अन्य चारों राज्यों में सबसे छोटा प्रदेश है। यहां बड़ी रैलियों, जनसभाओं या बैनरों वाला प्रचार बहुत ही सीमित संख्या में आयोजित किया जाता है। कुछ बड़े नेताओं की चुनावी सभाओं को छोड़ दें तो राज्य में चुनाव अभियान एक तरह से डिबेट-आधारित ही नजर आता है, जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव अभियान में देखने को मिलता है।

mizoram election campaign is different

मिजोरम में कॉमन प्लेटफॉर्म पर चुनाव प्रचार
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां आमतौर पर मीजो पीपुल्स फोरम (MPF) जैसे संगठन ही सभी उम्मीदवारों के लिए सामूहिक सभाएं आयोजित करता है। एमपीएफ चर्च से जुड़ा एक संगठन है। कुछ चुनाव क्षेत्रों में लोकल पीपुल फोरम (LPF) भी ऐसी ही चुनाव सभाएं आयोजित करता है।

इन सभाओं में संबंधित चुनाव क्षेत्र के उम्मीदवारों को प्रचार के लिए एक कॉमन प्लेटफॉर्म दिया जाता है, जिसमें उनके समर्थक भी जुटते हैं और आम मतदाता भी। सभी उम्मीदवारों को अपनी बातें रखने के लिए 15 से 20 मिनट का समय दिया जाता है। यह अन्य राज्यों के प्रचार के तरीके से पूरी तरह अलग है।

देश के अन्य हिस्सों के लिए भी मिजोरम बन सकता है नजीर
मिजोरम में इस तरह के प्रचार अभियान का सिलसिला बहुत पुराना नहीं है और मुश्किल से पिछले तीन चुनावों से चल रहा है। राज्य के युवाओं को इसपर गर्व है। उनका कहना है कि देश के दूसरे हिस्सों में भी चुनावों के लिए यही तरीका अपनाया जा सकता है।

'प्रचार का सुरक्षित और शानदार तरीका'
मसलन, 30 साल के लालफकजुआला रेंथली ने आइजोल नॉर्थ I विधानसभा में एक ऐसे ही चुनाव सभा में भाग लेने के बाद कहा, 'यह प्रचार का सुरक्षित और शानदार तरीका है। मीजो पीपुल्स फोरम ने यह सुनिश्चित किया है कि चुनाव प्रचार सभ्य तरीके से पूरा हो सके। सभी उम्मीदवार बोलेंगे....यह एक बार नहीं है....पिछले तीन चुनावों से ऐसा हो रहा है.....'

उनका कहना है कि लोग मानते हैं, जो उम्मीदवार उनकी मूल जरूरतों को पूरा कर सकते हैं, उन्हें चुना जाना चाहिए। उनके मुताबिक एमपीएफ यह तय करता है कि इस चुनावी सभा के दौरान किसी तरह का विवाद न हो।

इसी तरह से प्री-स्कूल टीचर माली भी कहती हैं कि मिजोरम में चुनाव शांतिपूर्ण होता है। उनके मुताबिक, 'हां, चुनाव कैसे होते हैं, उस हिसाब से यह अलग है...यह अच्छा प्लेटफॉर्म है, जहां एक बार में सब तक पहुंचा जा सकता है। इस तरह से एकसाथ प्रचार होता है और उम्मीदवारों का दिमाग शांत रहता है....'

एक चुनाव सभा में 6 उम्मीदवारों के बीच हुई डिबेट
आइजोल नॉर्थ-III विधानसभा में इन संगठनों की ओर से एक ऐसा ही डिबेट आयोजित किया गया, जिसमें एक साथ 6 उम्मीदवार मौजूद थे। सभी उम्मीदवारों को खुद का और अपनी पार्टी का एजेंडा मतदाताओं के सामने रखने का मौका मिला। सभी ने 15-15 मिनट मतदाताओं के सामने अपना राजनीतिक घोषणापत्र पेश किया।

उम्मीदवारों और मतदाताओं दोनों का काम होता है आसान
हालांकि, यह चुनाव सभाएं स्थानीय स्तर पर आयोजित होती हैं। लेकिन, राष्ट्रीय पार्टियों के बड़े नेताओं के लिए अलग सभाएं जरूर आयोजित की जाती हैं। लेकिन, जिस तरह से उम्मीदवारों को एक मंच पर बहस में उतारा जाता है, उससे उनका और वोटर दोनों का काम आसान हो जाता है।

मिजोरम में 40 विधानसभा सीटों के लिए 7 नवंबर को एक ही चरण में मतदान होना है। नतीजे पांचों राज्यों के साथ ही 3 दिसंबर को आएंगे।

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