2027 तक पूरी तरह बैन हो सकते हैं डीजल वाहन, पेट्रोलियम मंत्रालय के पैनल ने दिए कई अहम सुझाव
Diesel Vehicle पर 2027 तक बैन लग सकता है। इसको लेकर एक रिपोर्ट पेट्रोलियम मंत्रालय के पैनल ने दी है।

ग्रीन हाउस गैस पूरी दुनिया के लिए बड़ी मुसीबत हैं। भारत भी इसके सबसे बड़े उत्सर्जकों में से एक है। इसको लेकर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक पैनल बनाया था। जिसने सुझाव दिया है कि भारत को 2027 तक डीजल से चलने वाले चार पहिया वाहनों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
पैनल के मुताबिक ग्रीन हाउस उत्सर्जन में कटौती के लिए दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों और प्रदूषित शहरों में इलेक्ट्रिक या गैस-ईंधन से चलने वाले वाहनों का इस्तेमाल करना चाहिए। पैनल ने साफ किया कि अगर भविष्य में ग्रीन हाउस गैस की चुनौती से निपटना है, तो अभी से उसकी तैयारी शुरू करनी होगी।
मंत्रालय की वेबसाइट पर पैनल की विस्तृत रिपोर्ट जारी हुई है, जिसके अध्यक्ष पूर्व तेल सचिव तरुण कपूर थे। रिपोर्ट में पैनल ने कहा कि सिटी ट्रांसपोर्ट के लिए डीजल बसें 2024 से नहीं जोड़ी जानी चाहिए। इसके अलावा सरकार को 31 मार्च से आगे के लिए 'फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक एंड हाइब्रिड व्हीकल्स स्कीम' (FAME) के तहत दिए गए प्रोत्साहन पर विचार करना चाहिए।
इन सब के अलावा 2024 से केवल इलेक्ट्रिक शहरी वाहनों को ही इजाजत देनी चाहिए। वहीं कार्गों के लिए सीएनजी जैसी गैस से चलने वाले ट्रकों के उपयोग का सुझाव दिया गया। पैनल ने रेलवे को भी डीजल इंजन बंद करने को कहा। हालांकि इस दिशा में पहले से काम चल रहा। रेलवे नेटवर्क के दो से तीन साल में पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होने की उम्मीद है।
बायोफ्यूल व्हीकल्स पर भी विचार
इलेक्ट्रिक वाहनों के अलावा बायोफ्यूल भी वाहनों के लिए अच्छा विकल्प है। कई कंपनियों ने इससे जुड़े वाहन भी निकालना शुरू कर दिए। इसी वहज से पैनल की रिपोर्ट में कई जगहों पर इसका जिक्र किया गया।
क्या केंद्रीय कैबिनेट देगी मंजूरी?
फिलहाल पैनल ने सिर्फ सुझाव दिया है। इसको मंजूरी देना केंद्रीय कैबिनेट का काम है। हालांकि मोदी सरकार कई अहम बैठकों में ग्रीन हाउस गैसों का मुद्दा उठा चुकी है। ऐसे में अगर इस सुझावों को मान लिया गया, तो कार निर्माण से जुड़ी कंपनियों को बड़ा झटका लगेगा।












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