मिल्खा सिंह से 'फ्लाइंग सिख' तक: जानें महान एथलीट के बारे में,जिसने भारत को 'ट्रैक एंड फील्ड' से परिचित करवाया
मिल्खा सिंह से 'फ्लाइंग सिख' तक: जानें महान एथलीट के बारे में, जिसने भारत को 'ट्रैक एंड फील्ड' से परिचित करवाया
नई दिल्ली, 19 जून: भारत के महान एथलीट मिल्खा सिंह का 18 जून की देर रात चंडीगढ़ निधन हो गया। मिल्खा सिंह 91 साल के थे। मिल्खा सिंह पोस्ट कोविड-19 संबंधित परेशानियों से जूझ रहे थे। मिल्खा सिंह ने स्प्रिंट (दौड़ना) के क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों तक अपना दबदबा कायम रखा। मिल्खा सिंह ने कई रिकॉर्ड बनाए और देश के लिए कई अवॉर्ड जीतें। यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि मिल्खा सिंह ने भारत को 'ट्रैक एंड फील्ड' से परिचित कराया और आज तक इस क्षेत्र में उनकी बराबरी करने वाला कोई नहीं है। मिल्खा सिंह का जन्म 1929 में भारत के पंजाब प्रांत के पास एक गांव गोविंदपुरा में हुआ था। 1947 में विभाजन के दौरान वह दिल्ली आ गए थे। मिल्खा विभाजन के बाद अनाथ हो गए थे। भारतीन सेना में आने के बाद उन्होंने एथलीट के बारे में जाना। भारतीय सेना में रहकर ही उन्होंने अपनी दौड़ने की कला को और भी निखारा।
Recommended Video

कैसे सुर्खियों में आए पहली बार मिल्खा सिंह
मिल्खा सिंह पहली बार तब सुर्खियों में आए जब उन्होंने सैनिकों की दौड़ में 394 जवानों को हराया और सबसे आगे निकले। जिसके बाद भारतीय सेना ने उन्हें एक प्रोफेशनल धावक बनाने की ट्रेनिंग दी। मिल्खा सिंह ने 1956 में मेलबर्न ओलंपिक, 1960 में रोम ओलंपिक और 1964 में टोक्यो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
मिल्खा सिंह ने 1958 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था और ये आजादी के बाद भारत का पहला गोल्ड मेडल था। मिल्खा सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स में व्यक्तिगत एथलेटिक्स श्रेणी में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट हैं।

मिल्खा सिंह कैसे बने 'फ्लाइंग सिख'
मिल्खा सिंह को 'फ्लाइंग सिख' कहा जाता था। लेकिन ये नाम कैसे पड़ा इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है। 1958 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद 1960 के रोम ओलिंपिक में उनको कोई पदक नहीं मिल पाया था। इसका दुख उन्हें था। इसके बाद 1960 में ही मिल्खा सिंह को पाकिस्तान के इंटरनेशनल एथलीट में जाने का मौका मिला। मिल्खा सिंह ने यहां 200 मीटर की दौड़ में पाकिस्तान के धावक अब्दुल खालिक को हराकर टोक्यो एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता।
पाकिस्तान के धावक अब्दुल खालिक 1958 में एशिया के सबसे तेज दौड़ने वाले व्यक्ति थे। मिल्खा सिंह ने जब उन्हें हराया तो इन्हें "द फ्लाइंग सिख" की उपाधि दी गई। मिल्खा सिंह को ये नाम पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने दी थी। इस जीत के साथ ही मिल्खा सिंह एशिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीट बन गए थे।

इस दौड़ के लिए हमेशा याद किए जाएंगे मिल्खा सिंह
मिल्खा सिंह ने 1960 में रोम ओलंपिक खेलों में 400 मीटर फाइनल में चौथा स्थान प्राप्त किया था। इस ओलंपिक खेल में मिल्खा सिंह का दौड़ना इवेंट का शोपीस बन गया था। मिल्खा सिंह इस ओलंपिक में काफी मशहूर हुए। मिल्खा सिंह को इस दौड़ के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
1960 में हुए रोम ओलंपिक की अपनी दौड़ पर मिल्खा सिंह ने एएफआई से कहा था, "मैंने अपनी दौड़ बहुत अच्छी तरह से शुरू की और 250 मीटर की दूरी से मैं आगे बढ़ रहा था। इसके बाद मेरे दिमाग में एक अजीब सा ख्याल आया, कि 'क्या मैं बहुत तेज दौड़ रहा हूं? क्या मैं दौड़ को खत्म कर पाऊंगा? क्या इस स्पीड से दौड़ना ठीक है? ये सब सोचकर मैंने अपनी स्पीड कम कर ली। जैसा कि आप जानते हैं कि एक बार जब आप जिस स्पीड से दौड़ रहे थे, उसको कम करते हैं तो फिर से उस स्पीड को हासिल करना मुश्किल होता है। बाकी एथलीट जो मेरे से काफी पीछे चल रहे थे, उन्होंने मुझे ओवरटेक किया और मैं उनसे पीछे एक गज की दूरी पर रह गया। मैं उसके बाद पागल हो गया था और कवर करने की कोशिश में लग गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मैं दक्षिण अफ्रीका के मैल्कम स्पेंस से कांस्य पदक हार गया, जिसे मैंने 1958 के कॉमनवेल्थ गेम्स में में हराया था। यह सोचकर मैं आज भी परेशान होता हूं कि मैंने ओलंपिक में इस तरह से एक पदक खो दिया है यह मेरे खेल करियर की सबसे बड़ी भूल थी।"

मिल्खा सिंह का रोम ओलंपिक में चौथा स्थान बन गया रिकॉर्ड
मिल्खा सिंह का रोम ओलंपिक (160) का चौथ स्थान 45.73 का भारतीय धावक के लिए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बन गया और लगभग 40 वर्षों तक नहीं टूटा। मिल्खा सिंह ने चार बार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतें और 1958 में कॉमनवेल्थ गेम्स के चैंपियन रहें। मिल्खा सिंह अभी भी एशियाई और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले एकमात्र भारतीय एथलीट हैं। मिल्खा सिंह को उनकी उपलब्धियों के लिए भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

मिल्खा सिंह पर बनी फिल्म 'भाग मिल्खा भाग'
महान धावक मिल्खा सिंह के ऊपर 2013 में बॉलीवुड फिल्म आई, 'भाग मिल्खा भाग'। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही थी और काफी सराही गई थी। फिल्म में मिल्खा सिंह के अनाथ होने से लेकर महानतम एथलीट बनने तक की पूरी कहानी दिखाई गई है। बॉलीवुड अभिनेता फरहान अख्तर ने इस फिल्म में 'द फ्लाइंग सिख' मिल्खा सिंह की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म के आने के बाद मिल्खा सिंह से देश का युवा दर्शक बहुत अधिक प्रभावित हुआ।
-
भारत में बनेगा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम, 1 लाख दर्शक क्षमता, अहमदाबाद को टक्कर देने की तैयारी -
US-Israel-Iran War: Khamenei के सलाहकार Kamal Kharazi पर एयर स्ट्राइक, पत्नी की मौत, कितने हैं बच्चे? -
Ex IPS Shivdeep Lande: 'तुमने मुझे झकझोर दिया', कौन हैं लांडे? क्यों हुए बीवी के सामने नतमस्तक? -
AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा उपनेता पद से क्यों हटाया? किसे दी जगह? पार्टी की कोई नई रणनीति?- समझें -
LPG Price Today: आज फिर से बढ़े सिलेंडर के दाम? आपके शहर में क्या है एलपीजी का रेट? -
Hanuman Jayanti 2026 : हनुमान जयंती पर मंगल का गोचर, इन 4 राशियों की बदलेगी किस्मत, शुरू होगा गोल्डन टाइम -
आम जनता को राहत! इन प्रोडक्ट पर Customs Duty खत्म, बाजार जाने से पहले चेक करें क्या होगा सस्ता? -
IPL 2026 के बीच दिग्गज खिलाड़ी ने लिया संन्यास, अचानक आखिर क्यों लिया यह फैसला? -
रहस्यमयी तरीके से कहां गायब हुईं 'वीराना' की भूतनी Jasmine Dhunna? 38 साल से हैं लापता, अनसुलझे हैं 3 सवाल -
Iran Donation Money: खामेनेई की मौत के बाद भारत में जुटाया गया मोटा चंदा क्यों ईरान नहीं जा सकता? क्या होगा? -
Bengal Election 2026: 'मुझसे छीन ली गई सत्ता’ मालदा कांड पर ममता बनर्जी का पलटवार, EC पर लगाया बड़ा आरोप -
Apple की नौकरी छोड़, बेंगलुरू में ऑटो ड्राइवर बने राकेश बी. पाल, इनकी 'कहानी' सुन आप भी हो जाएंगे 'फैन'












Click it and Unblock the Notifications