'अग्निपथ में बदलाव की योजना पहले से तय थी, दबाव नहीं', भर्ती के नए मॉडल पर रक्षा मंत्रालय
नई दिल्ली, 19 जून: केंद्र सरकार के सेना में भर्ती के नए मॉडल 'अग्निपथ' स्कीम को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है। इस बीच रविवार को सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव अनिल पुरी ने 'अग्निपथ' योजना को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया, जहां उन्होंने कहा कि यह सुधार लंबे समय से लंबित था। हम इस सुधार के साथ युवा जोश और अनुभव लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सेना में किए गए नया बदलाव पहले से तय किया हुआ था और रक्षा मंत्रालय पर दबाव नहीं था।
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इसी के साथ उन्होंने यह भी साफ कहा कि अग्निपथ योजना को वापस नहीं लिया जाएगा। यह एक प्रगतिशील कदम है। लेफ्टिनेंट जनरल अनिल पुरी ने मीडिया को बताया कि हाल ही में घोषित अग्निपथ योजना में बदलाव पहले से ही योजनाबद्ध थे और हिंसा और आगजनी की हालिया घटनाओं के कारण दबाव में नहीं थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय सेना के एडजुटेंट जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल बंसी पोनप्पा, भारतीय नौसेना के प्रमुख वाइस एडमिरल दिनेश त्रिपाठी और भारतीय वायु सेना के कार्मिक प्रभारी एयर मार्शल सूरज झा भी मौजूद थे।
लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने यह भी कहा कि अग्निपथ स्कीम की योजना 1989 में बनाई गई थी और इसे लागू करने के लिए आवश्यक कदम भी लगभग उसी समय शुरू हुए थे। उन्होंने कहा, "हमें पहले कई पहलुओं पर विचार करना था और कई अन्य बदलावों को लागू करना था। उम्र के पहलू पर विचार किया जाना था। सशस्त्र बलों में शामिल होने की उम्र पहले कम करनी पड़ी। कमांडिंग ऑफिसर्स की उम्र भी कम होनी थी।" उन्होंने आगे कहा, "2030 तक, भारत की आधी आबादी 25 साल से कम उम्र की होगी। हम अनुभवी सेवारत सैनिकों के साथ-साथ उत्साह और ऊर्जा से भरे युवाओं का एक अच्छा मिश्रण बनाना चाहते थे।"
इसी के साथ उन्होंने बताया कि भविष्य में अग्निपथ योजना के तहत सैनिकों की भर्ती एक लाख से अधिक हो जाएगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में होने वाले युद्ध तकनीक पर आधारित होंगे। बख्तरबंद वाहनों और टैंकों को नष्ट करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। हमें ऐसे तकनीकी युवाओं की जरूरत है जो इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल करने में माहिर हों। केंद्र योजना का 'विश्लेषण' करने के लिए सेना के 46,000 उम्मीदवारों की भर्ती के साथ शुरुआत करेगा।












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