MIG-21 सेना के जवानों के लिए, क्यों बन गए हैं मौत के उड़न खटोले?
मिग-21 के क्रैश होने का इतिहास काफी पुराना है। पिछले 60 साल में 400 से अधिक एयरक्राफ्ट क्रैश हो चुके हैं। इन हादसों में 200 से अधिक पायलट की जान जा चुकी है।

MIG-21 Crash History: आज एक बार फिर से भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान मिग-21 क्रैश हो गया है। राजस्थान के हनुमानगढ़ में यह मिग क्रैश हो गया है। मिग में सवार पायलट सुरक्षित हैं। सूत्रों के अनुसार मौके पर राहत और बचान के लिए सेना का हेलीकॉप्टर पहंच गया है।
यह पहली बार नहीं है जब मिग-21 क्रैश हुआ है। मिग-21 के क्रैश होने का इतिहास काफी लंबा है। पिछले 60 साल की बात करें तो 400 से अधिक मिग एयरक्राफ्ट क्रैश हो चुके हैं जिसमे 200 से अधिक पायलट की और 60 से अधिक आम लोगों की जान जा चुकी है।
फ्लाइंग कॉफिन (Flying Coffin)
मिग-21 के क्रैश होने का इतिहास इतना अधिक है कि इसे फ्लाइंग कॉफिन के नाम से भी जाना जाता है। इस लड़ाकू विमान को भारतीय वायुसेना में 1960 में शामिल किया गया था। लेकिन तमाम हादसों के बाद भी इस एयरक्राफ्ट को वायुसेना में इस्तेमाल किया जा रहा है।
सर्वाधिक मिग हए क्रैश
वर्ष 2010 के बाद से तकरीबन 22 मिग-21 एयरक्राफ्ट क्रैश हो चुके हैं। जबकि 2003 से 2013 के बीच 39 मिग क्रैश हो चुके हैं। बड़ी संख्या में मिग क्रैश होने की वजह से इसे फ्लाइंग कॉफिन का नाम मिला है।
आखिर बंद क्यों नहीं हो रहा मिग-21 का इस्तेमाल
सवाल यह उठता है कि आखिर इतने हादसे होने के बाद भी क्यों इस एयरक्राफ्ट को क्यों बंद नहीं किया जा रहा है। आज भी यह वायुसेना की रीढ़ है। मिग-21 भारतीय वायुसेना में अपनी सेवा देने वाला सबसे पुराना एयरक्राफ्ट है।
200 से अधिक पायलट की मौत
भारत को पहला सिंगल इंजन मिग-21 1963 में मिला था। इसके बाद 874 मिग-21 को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया। जिसमे से तकरीबन 60 फीसदी एयरक्राफ्ट को भारत में एचएएल में बनाया गया है। जिसमे से आधे से ज्यादा एयरक्राफ्ट क्रैश हो चुके हैं, जिसमे 200 से अधिक भारतीय पायलट की जान जा चुकी है।
विंग कमांडर अभिनंदन ने उड़ाया था मिग-21
वर्ष 2000 में मिग-21 को अपग्रेड किया गया था, इसमे नया सेंसर और हथियार लगाया गया। इस अपग्रेडेड एयरक्राफ्ट से विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने पाकिस्तान के एफ-16 को 2019 में मार गिराया था।
सबसे अधिक मिग-21 के एयरक्राफ्ट
एक्सपर्ट का कहना है कि मिग-21 एयरक्राफ्ट भारतीय वायुसेना में सर्वाधिक मात्रा में हैं, यही वजह है कि ये सबसे ज्यादा क्रैश भी होते हैं। अधिक संख्या में मिग-21 होने की वजह से इनका इस्तेमाल सबसे अधिक होता है, जिसके चलते अक्सर इन्ही एयरक्राफ्ट का हादसा होता है।
नए एयरक्राफ्ट की खरीद में देरी
नए लड़ाकू विमान की खरीद में होने वाली देरी की वजह से भी मिग-21 का इस्तेमाल करना मजबूरी बन जाता है, जिसकी वजह से हादसे अक्सर होते रहते हैं। वायुसेना को भारत के आसमान की सुरक्षा में लड़ाकू विमान की कमी से जूझना पड़ रहा है।
1990 में ही होना चाहिए था रिटायर
स्वदेशी तेजस विमान के निर्माण में देरी, राफेल को लेकर राजनीतिक विवाद के चलते भी मिग को इस्तेमाल करने वायुसेना की मजबुरी है। रिपोर्ट के अनुसार मिग-21 ने अपने रिटायरमेंट की उम्र 1990 में ही पूरी कर ली थी।
नए पायलट की होती है इससे ट्रेनिंग
सवाल यह उठता है कि आखिर पायलट मिग-21 को क्यों उड़ाते हैं। इसकी बड़ी वजह है कि नए फाइटर जेट को शामिल करने में हो रही देरी के चलते नए पायलट को ट्रेनिंग के लिए ये एयरक्राफ्ट दिए जाते हैं।












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