Middle East Crisis: एक्शन मोड में पीएम मोदी, कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर की सप्लाई पर बड़ा फैसला!
Middle East Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधानों के बीच भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राजधानी दिल्ली में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें पेट्रोलियम, गैस, बिजली और उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति का बारीकी से आकलन किया गया।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद देश के भीतर आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और घरेलू अर्थव्यवस्था को किसी भी संभावित झटके से बचाना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर पैनी नजर रखे हुए है और नागरिकों व उद्योगों के हितों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

जरूरी सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन पर सरकार का 'कड़ा पहरा'
प्रधानमंत्री की इस अहम बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जैसे दिग्गज शामिल हुए। बैठक में मुख्य चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि युद्ध की स्थिति में भी देश का लॉजिस्टिक्स और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम मजबूत बना रहे। सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे बुनियादी ढांचे और आपूर्ति मार्गों की निगरानी बढ़ाएं ताकि किसी भी स्तर पर रुकावट न आए।
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LPG और गैस आपूर्ति, घबराने की जरूरत नहीं
आपूर्ति को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर लगाम लगाते हुए सरकार ने कहा है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी पूरी तरह सामान्य है। शुरुआती दिनों में 'पैनिक बुकिंग' के कुछ मामले सामने आए थे, जो अब काफी कम हो गए हैं।
- कोटा में बढ़ोतरी: स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों जैसे आवश्यक संस्थानों के लिए कमर्शियल एलपीजी का कोटा बढ़ा दिया गया है।
- PNG पर जोर: राज्यों को सलाह दी गई है कि वे एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू और कमर्शियल दोनों क्षेत्रों में PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन देने की प्रक्रिया में तेजी लाएं।
जमाखोरी के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' और समुद्री सुरक्षा
संकट के समय कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है। देशभर में गैस एजेंसियों और वितरकों के यहां छापेमारी की जा रही है। वहीं, समुद्री व्यापार को लेकर राहत की खबर यह है कि सभी भारतीय बंदरगाह सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
हाल ही में अमेरिका के टेक्सास से एलपीजी लेकर एक बड़ा जहाज न्यू मंगलौर पोर्ट पहुंचा है, जिससे घरेलू स्टॉक को और मजबूती मिली है। सरकार ने यह भी आश्वस्त किया कि फारस की खाड़ी में मौजूद सभी 22 भारतीय जहाज और 611 नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं।
क्यों बढ़ा तनाव? 28 फरवरी की घटना और डीजल की कीमतों पर असर
पश्चिम एशिया में संघर्ष का यह चौथा हफ्ता है। तनाव की मुख्य वजह 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को माना जा रहा है। इसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने Strait of Hormuz जैसे रणनीतिक समुद्री रास्तों को प्रभावित किया है, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है।
इस वैश्विक संकट का सीधा असर अब कीमतों पर भी दिखने लगा है:
- इंडस्ट्रियल डीजल: औद्योगिक उपयोग वाले डीजल की कीमतों में 25% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- नई दरें: इसकी कीमत 87.67 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर अब 109.59 रुपये प्रति लीटर हो गई है। हालांकि, सामान्य रिटेल ग्राहकों के लिए कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है।
With AI Inputs
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