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मेजर के खिलाफ एफआईआर मामले में सुब्रमण्यम स्वामी का सनसनीखेज दावा

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    Subramanian Swamy का मेजर पर FIR मामले में सनसनीखेज दावा । वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। जिस तरह से कश्मीर में सेना के जवान के खिलाफ जम्मू कश्मीर की पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी, उसके बाद भाजपा सांसद और वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि उनके पास इस बात की पुख्ता जानकारी है कि महबूबा मुफ्ती के पास सेना के अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए रक्षा मंत्री की गैरकानूनी स्वीकृति मिली थी। स्वामी ने एक ट्वीट करके कहा कि जम्मू में मेरे पास पुख्ता जानकारी है कि महबूबा मुफ्ती ने निर्मला सीतारमण को फोन किया था लेकिन उन्हें सेना के अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए अवैध स्वीकृति दी गई थी। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने जम्मू कश्मीर के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी थी।

    महबूबा मुफ्ती ने किया था दावा

    महबूबा मुफ्ती ने किया था दावा

    आपको बता दें कि जिस तरह से सेना के अधिकारी के खिलाफ जम्मू कश्मीर की पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी, उसके बाद काफी विवाद हुआ था। यह एफआईआर उस वक्त दर्ज की गई थी, जब शोपियां में सेना की टुकड़ी पर पत्थरबाजी के बाद मेजर ने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी, जिसके बाद एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि मेजर के खिलाफ एफआईआर रक्षामंत्री की अनुमति के बाद एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं मेजर के पिता ने भी इस एफआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक

    सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक

    सुप्रीम कोर्ट ने मेजर के खिलाफ एफआईआर के मामले में सुनावाई करते हुए एफआईआर पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस मामले में किसी की भी गिरफ्तारी नहीं होगी। कोर्ट ने कहा कि जबतक यह मामला कोर्ट में लंबित है, अधिकारी को इस मामले में पूछताछ के लिए नहीं बुलाया जाएगा।

    क्या था मामला

    क्या था मामला

    आपको बता दें कि शोपियां के गान्‍वपोरा गांव में पत्‍थरबाजी करने वाली भीड़ पर सेना को गोलियां चलानी पड़ गई थीं। इस फायरिंग में जहां दो व्‍यक्तियों की घटनास्‍थल पर ही मौत हो गई तो तीसरे व्‍यक्ति ने अस्‍पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इस घटना के बाद मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने हत्‍या की जांच के आदेश भी दिए थे। इस याचिका को एडवोकेट ऐश्‍वर्य भाटी के जरिए दायर किया गया है। भाटी का कहला है कि घटना के समय जमीनी हालात काफी खराब थे और ऐसे में एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई है। उन्‍होंने कहा कि जिस तरह से पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है उसके पीछे राजनीतिक मंशा झलकती है।

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