मेघालय: मुश्किल में कांग्रेस सरकार, मंत्री और मुख्य सचिव के खिलाफ केस दर्ज
कथित गड़बड़ी के समय शिक्षा मंत्री रहे लिंगदोह और शिक्षा विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव और 1984 बैच के आईएएस अधिकारी के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी और अन्य आरोपों को लेकर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है
नई दिल्ली। मेघालय में कांग्रेस की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। सात विधायकों के इस्तीफे के बाद सीबीआई ने मेघालय के पीडब्ल्यूडी मंत्री अंपरीन लिंगदोह और राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव पी एस थांगखिव के खिलाफ शिक्षकों की नियुक्ति में कथित गड़बड़ी को लेकर मामला दर्ज किया है। यह मामला वर्ष 2008-09 में शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया के दौरान अंकपत्र की कथित हेरफेर करने से संबंधित है। सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि एजेंसी ने मेघालय हाईकोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की है।

शिक्षकों की नियुक्ति में कथित गड़बड़ी का मामला
कथित गड़बड़ी के समय शिक्षा मंत्री रहे लिंगदोह और शिक्षा विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव और 1984 बैच के आईएएस अधिकारी के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी और अन्य आरोपों को लेकर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। थांगखिव अभी अतिरिक्त सचिव हैं और उनके पास गृह जैसा अहम विभाग है।

अंकपत्र में किया गय था बदलाव
मेघालय में इसी साल चुनाव होना है। सीबीआई ने प्राथमिकी में प्राथमिक एवं जन शिक्षा विभाग के निदेशालय एवं अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया है। मेघालय हाईकोर्ट ने दो नवंबर, 2017 को सीबीआई को इस मामले को राज्य पुलिस से अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया था। आरोप है कि लिंगदोह ने उस समय प्राथमिक और जन शिक्षा की निदेशक जे डी संगमा और उनकी दो समर्थकों को अंकपत्र में छेड़छाड़ करने और उसके साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया था।

मेघालय में इसी साल चुनाव होना है
मेघालय में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक उठापटक तेज हो गई है। कांग्रेस और अन्य दलों के 4 विधायकों ने अब बीजेपी का दामन थाम लिया है। ये विधायक पहले ही विधानसभा से अपना इस्तीफा दे चुके थे। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी राम माधव ने इसे राज्य में बदलाव की बयार बताया है। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक ए एल हेक ने पहले ही बीजेपी में शामिल होने का ऐलान कर चुके थे। विधायकों की बगावत को विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में सत्तारूढ़ दल के लिए करारा झटका माना जा रहा है। एक यूडीएफ से और दो निर्दलीय विधायकों ने भी बीजेपी के सहयोगी दल नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) में शामिल होने की ऐलान किया था।












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