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जानिए कौन हैं डाक्‍टर शैलजा वी जिन्होंने जमीन से हजारों फीट ऊपर 'हवा' में करवाई डिलीवरी

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बेंगलुरु। कोरोना काल में सुविधा संपन्‍न हॉस्पिटल में महिला की सेफ डिलीवरी करवाना बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रहा है ऐसे आप स्‍वयं कल्‍पना कर सकते हैं कि किसी डाक्‍टर के लिए हवा में उड़ती हुई फ्लाइट में एक छोटे से टॉयलेट में बच्‍चे की डिलीवरी करवाना कितना कठिन रहा होगा, लेकिन ये कमाल बेंगलुरु की डाक्‍टर शैलजा वी ने कर दिखाया है। बता दें 8 अक्‍टूबर को इंडिगो विमान में सफर कर रही गर्भवती महिला को अचानक लेबर पेन शुरु हो गया और उसी फ्लाइट में मौजूद डाक्‍टर शैलजा वल्लभनेनी ने अपनी सूझबूझ से जमीन से हजारों किलोमीटर ऊप मिडएयर में फ्लाइट की टॉयलेट सीट पर सुरक्षित डिलीवरी करवाकर महिला और बच्‍चे की जान बचाई।

फ्लाइट के छोटे से टॉयलेट में महिला की करवाई डिलीवरी

फ्लाइट के छोटे से टॉयलेट में महिला की करवाई डिलीवरी

स्‍त्री रोग विशेषज्ञ और सर्जन डाक्‍टर शैलजा वी पिछले 10 सालों से बेंगलुरु में प्रैक्टिस कर रही हैं। वर्तमान समय में डाक्‍टर शैलजा बेंगलुरु के लोटस डायग्नोस्टिक सेंटर और क्लाउड नाइन हॉस्टिपटल की कन्‍सलटेंट डाक्‍टर हैं जिन्‍होंने हमेशा अस्‍पताल की ओटी और लेबर रुप में डिलीवरी करवाई थी उन्‍होंने फ्लाइट के छोटे से टॉयलेट में महिला की डिलीवरी करवाने के साथ संसाधनों के अभाव में महिला और प्री मैच्‍योर बेबी की देखभाल कर अकल्‍पनीय काम किया है। उन्‍होंने रास्‍ते भर महिला और प्रीमेच्‍योर नवजात शिशु की देखभाल की और ये सुनिश्चित किया कि माँ और बच्चे कोरोना संक्रमण में सुरक्षित रहें।

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तुरंत केबिन क्रू को अलर्ट किया और टॉयलेट की तरफ दौड़ पड़ी

तुरंत केबिन क्रू को अलर्ट किया और टॉयलेट की तरफ दौड़ पड़ी

डाक्‍टर शैलजा बुधवार शाम को दिल्ली से बेंगलुरु अपने घर लौट रही थी। डाक्‍टर शैलजा ने बताया कि मोनिका नामक महिला जिसकी 30 हफ्ते की प्रेगनेंसी थी। फ्लाइट के टेक ऑफ के 15 मिनट बाद ही गर्भवती महिला मोनिका ने दर्द महसूस किया और इंडिगो 6 ई 122 फ्लाइट दिल्ली-बैंगलोर के केबिन क्रू से शिकायत की। इसके बाद फ्लाइट में यात्रा कर रहे प्‍लास्टिट सर्जन डाक्‍टर नागराज ने उनका चेकअप किया और उन्‍होंने बताया कि महिला के पेट में दर्द बदहजमी की वजह से हो रहा है, लेकिन दर्द बढ़ने पर मोनिका घबरीा गई और टॉयलेट की ओर भागी। तभी डाक्‍टर शैलजा ने देखा कि महिला को ब्लीडिंग शुरु हो गई। अपनी सीट पर बैठी डाक्‍टर शैलजा ने जैसे ये देखा उन्‍होंने तुरंत केबिन क्रू को अलर्ट किया और टॉयलेट की तरफ दौड़ पड़ी।

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जमीन से हजारों फीट ऊपर 'हवा' में यूं करवाई डिलीवरी

जमीन से हजारों फीट ऊपर 'हवा' में यूं करवाई डिलीवरी

मोनिका ने कहा कि उसकी डिलीवरी में अभी डेढ़ महीने बाकी है। डॉ शैलजा ने बताया कि उसकी प्रेगनेंसी 32 सप्‍ताह से कम की होगी लेकिन समय से पहले लेबर पेन शुरु हो गया और बेबी जिस फ्लुएट बैग में रहता है वो फट गया जिसके बाद मैंने चेकअप में देखा कि डिलीवरी होने वाली है। जिसके बाद डाक्‍टर शैलजा ने दस्ताने पहने, पीपीई किट और डिलीवरी की प्रक्रिया शुरू की। मोनिका को टॉयलेट सीट पर बैठाया गया और बेबी बाहर आ सके इसके लिए धक्का देना शुरू कर दिया डाक्‍टर ने बताा कि सिर बाहर निकल आया था और मैंने महिला के पेट को दबाया और कुछ समय के भीतर से बच्‍चा सही सलामत बाहर आ गया। महिला ने एक स्‍वस्‍थ्‍य बेटे को शाम 6.10 जन्‍म दिया जिसका वजन लगभग 1.82 किलोग्राम था। डिलवरी की मिड एयर लोकेशन पिन भोपाल के ऊपर दिखाया गया है।

मां और नवजात को बचाने के लिए यात्रियों ने यूं की मदद

मां और नवजात को बचाने के लिए यात्रियों ने यूं की मदद

डाक्‍टर शैलजा ने बताया कि बच्‍चे के जन्‍म के बाद चुनौती आई - नवजात और मां को संभालने की। उन्‍होंने फ्लाइट के स्‍टॉफ से डायपर, अंडरगारमेंट्स, कपड़े, सैनिटरी नैपकिन, शॉल लाने लिए कहा। डॉ। शैलजा ने बताया कि "मां को जबरदस्‍त ब्लीडिंग हो रही थी और हमें कपड़ों की जरूरत थी। उन्‍होंने बताया कि यात्री मदद के लिए आगे आए और उन्‍होंने टॉवल, कपड़े शॉल दिया। डाक्‍टर ने बताया कि हमने मां और बच्चे को लपेटने के लिए शॉल का इस्तेमाल किया। मां के लिए तीन सीटों वाली रो में बैग रख कर एक ऊंचा बिस्तर तैयार कर‍के उस पर लिटाया। डाक्‍टर ने बताया कि चूंकि बच्चा समय से पहले हुआ था, उसे अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता थी।

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प्रीमेच्‍योर बेबी को सुरक्षित करने के लिए डाक्‍टर शैलजा ने कंगारू पद्धति का किया इस्‍तेमाल

प्रीमेच्‍योर बेबी को सुरक्षित करने के लिए डाक्‍टर शैलजा ने कंगारू पद्धति का किया इस्‍तेमाल

शैलजा ने इनक्यूबेटर जैसी बाहरी चीज़ बनाने के लिए पारंपरिक तरीके जैसे कि बेबी और कंगारू पद्धति को लपेटने की कोशिश की। कंगारू देखभाल एक बच्चे को पकड़ने की एक विधि है जिसमें मां की त्वचा से बच्‍चे की त्वचा का संपर्क शामिल है। बच्चे को सिर्फ एक डायपर के साथ, एक माँ की नंगी छाती पर लिटा कर रैप कर दिया गया । उन्‍होंने बताया कि इस पद्धति का उपयोग अक्सर समयपूर्व जन्‍म लेने वाले शिशुओं के लिए अस्‍पताल में भी किया जाता है।

 गर्भनाल को काटने के बाद कोई क्लैम्प उपलब्ध नहीं हुआ था तब...

गर्भनाल को काटने के बाद कोई क्लैम्प उपलब्ध नहीं हुआ था तब...

37 वर्षीय डाक्‍टर शैलजा ने बताया कि फ्लाइट के स्‍टॉफ और डॉक्टर नागराज और यात्रियों ने आगे बढ़कर मदद की जिनके सहयोग से हम मां और बच्‍चे को सुरक्षित कर सके। उन्‍होंने बताया कि गर्भनाल को काटने के बाद कोई क्लैम्प उपलब्ध नहीं हुआ था तब मैंने पट्टी (gauze) का इस्‍तेमाल किया। मोनिका को ओरल ड्रिप दी गई। शैलजा ने कहा कि कोरोना के लिए धन्यवाद क्योंकि कोरोना के चलते फ्लाइट में अत्‍यधिक मात्रा में पीपीई किट और ग्लब्स उपलब्ध थे। डाक्‍टर शैलजा ने मुस्‍कुराते हुए बोला डिलीवरी के बाद नवजात को गोद में उठाने का एहसास बहुत सुखद था।

 भारत का पहला बच्चा जिसने आसमां में खोली आंखें

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डॉ शैलजा ने कहा इसके बाद लोग उनको बधाई करने के लिए कॉल और संदेश भेज रहे हैं। डाक्‍टर शैलजा ने कहा कि हालांकि, इस घटना के बाद ये मुद्दा उठने लगा है कि सभी हवाई जहाजों को मूल मातृत्व किट से सुसज्जित किया जाना चाहिए "यह बहुत महत्वपूर्ण है। केबिन क्रू को इस तरह की आपात स्थितियों से निपटने के लिए कुछ बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। कौन जानता है कि इस घटना की तरह क्या परिस्थिति आ जाए। बता दें इंडिगो प्रबंधन की ओर से जब तक यह बताया नहीं गया कि बच्‍चे का जन्‍म करवाने वाले डाक्‍टर शैलजा थी तब तक किसी को नहीं पता चला क्योंकि ये नेक काम करने वाली डाक्‍टर शैलजा अपनी इस यात्रा के बाद थकावट के बाद अपने घर चली गईं। उन्‍होंने केवल कुछ दोस्तों को बताया था कि बच्चा उसके हाथों पैदा हुआ था। डाक्‍टर शैलजा ने कहा कि सबसे मजेदार है कि इस बच्‍चे का जन्‍म प्रमाण पत्र में क्या दर्ज होगा ? स्थान: मिड एयर !

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English summary
Meet Dr. Sailaja V, the Bengaluru,Gynaecologist Who Successfully Delivered a Baby Boy Onboard an IndiGo Flight
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