Mayawati Targets Congress:'राहुल से सतर्क रहें, आरक्षण खत्म करना चाहती है कांग्रेस', मायावती का तीखा प्रहार

Mayawati Targets Congress: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने मंगलवार को कांग्रेस और इसके नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला किया। उन्होंने जनता को कांग्रेस से सावधान रहने की सलाह दी, खासकर ओबीसी आरक्षण और जातीय जनगणना के मुद्दों पर।

मायावती का आरोप है कि कांग्रेस ने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद ओबीसी आरक्षण लागू नहीं किया और अब यह पार्टी जातीय जनगणना के नाम पर सत्ता में वापसी के सपने देख रही है।

Mayawati Targets Congress

कांग्रेस के रवैये पर सवाल

मायावती ने अपने बयान में आरोप लगाया कि कांग्रेस जातीय जनगणना का दिखावा कर रही है, जबकि उसकी मंशा कभी भी इसे लागू करने की नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक कांग्रेस सत्ता में थी, उसने इस मुद्दे को नजरअंदाज किया और अब इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है।

मायावती ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने विदेश में कहा था कि जब भारत बेहतर स्थिति में होगा, तो SC, ST, OBC का आरक्षण खत्म कर दिया जाएगा। इससे यह साफ है कि कांग्रेस इन वर्गों के आरक्षण को खत्म करने के लिए षडयंत्र कर रही है।

आरक्षित वर्ग को सावधान रहने की चेतावनी
मायावती ने आरक्षित वर्ग के लोगों से आग्रह किया कि वे राहुल गांधी और कांग्रेस के इस नाटक से सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई, तो वह SC, ST, OBC का आरक्षण खत्म करने के अपने मंसूबे को जरूर अंजाम देगी। इसीलिए, मायावती ने इन वर्गों से अपील की कि वे कांग्रेस की चालों से सावधान रहें और अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करें।

आरक्षित वर्ग के साथ न्याय की मांग
मायावती ने उत्तर प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती को लेकर चल रहे विवाद पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने यूपी सरकार से अपील की कि वह आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के साथ किसी भी तरह का अन्याय न होने दे। मायावती का यह बयान तब आया, जब इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर उच्चतम न्यायालय ने रोक लगाई थी, जिसमें 69,000 सहायक शिक्षकों की नई चयन सूची तैयार करने का आदेश दिया गया था।

हाई कोर्ट का आदेश और सुप्रीम कोर्ट की रोक
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जून 2020 और जनवरी 2022 में जारी सहायक शिक्षकों की चयन सूचियों को रद्द कर दिया था। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और अन्य न्यायाधीश शामिल थे, ने हाई कोर्ट के इस फैसले पर रोक लगा दी। यह रोक उन 6,800 उम्मीदवारों के लिए राहत लेकर आई, जिनकी नौकरी खतरे में थी।

मायावती की सरकार से अपील
मायावती ने जोर देकर कहा कि शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को उनके संवैधानिक अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने सरकार से इस मामले में निष्पक्ष और ईमानदार रुख अपनाने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता होनी चाहिए, ताकि किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव न हो।

कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब सहायक शिक्षक पदों के लिए उम्मीदवारों के चयन में इस्तेमाल किए गए आरक्षण सूत्र पर सवाल उठे। चयन प्रक्रिया में आरक्षण को सही तरीके से लागू न करने की शिकायतें सामने आईं, जिसके चलते उच्च न्यायालय ने मौजूदा चयन सूचियों को रद्द कर दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस फैसले पर रोक लगाई है, जिससे चयनित उम्मीदवारों को अस्थायी राहत मिली है।

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