जम्मू-कश्मीर: 8 महीने से लापता सैनिक बेटे की तलाश में रोजाना जमीन खोद रहा पिता, न लाश मिली न आस
श्रीनगर। दुश्मनों से देश की सुरक्षा के लिए हर साल सैकड़ों सुरक्षाबलों के जवान खुशी-खुशी अपनी जान कुर्बान कर देते हैं। जम्मू-कश्मीर में आए दिन आतंकवादियों से लोहा लेते हुए सेना के जवान शहीद हो जाते हैं लेकिन उसके घर वालों पर क्या बीतती है, इसका एहसास सिर्फ वही लोग कर सकते हैं। एक पिता के लिए दुनिया का सबसे बड़ा दुख है अपने जवान बेटे के शव को कंधा देना, लेकिन जम्मू-कश्मीर के एक पिता को यह भी नसीब नहीं हो सका।

पिछले आठ महीने से कर रहे तलाश
दरअसल, मंजूर अहमद वागय पिछले आठ महीने से अपने बेटे की तलाश कर रहे हैं जो ईद के बाद कभी लौट के घर नहीं आया। अपने बेटे के गम में मंजूर अहमद की हालत ये हैं कि वह जगह-जगह घाटी में खुदाई कर अपने बेटे की लाश की ढूंढ रहे हैं। मंजूर अहमद वागय के बेटा जम्मू-कश्मीर में टेरिटोरियल आर्मी का जवान था और वह पिछले 8 महीने से लापता है। इस दौरान ऐसा कोई दिन नहीं गया जब वागय ने जमीन खोदकर अपने बेटे की तलाश ना की हो।

आखिरी बार ईद पर मिला था बेटा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल 2 अगस्त को 25 वर्षीय सिपाही राइफलमैन शाकिर मंजूर शोपियां इलाके में बालपोरा से बाहिबाग सेना के कैंप के लिए जा रहे थे। उस दिन ईद था इसलिए शाकिर अपने परिवार से मिलने घर चले गए। उन्होंने घर पर दोपहर का भोजन किया और शाम 5 बजे घर से निकल गए। शाकिर के 56 वर्षीय पिता बताते हैं कि वह आखिरी बार था जब उन्होंने अपने बेटे को देखा था। घर से निकलने के आधे घंटे बाद शाकिर ने फोनकर बताया था कि वह अपने दोस्तों के पास जा रहा है।

अपहरण होने का दावा
मंजूर अहमद वागय का दावा है कि उनके बेटे का अपहरण किया गया था वह आखिरी बार उनसे बात करना चाहता था। उसी दिन कुछ घंटे बाद शाकिर का वहन घर से करीब 16 किमी दूर एक खेत से बरामद हुआ। करीब एक सप्ताह बाद उसके कपड़े गांव से तीम किमी दूर खाई में मिले। शाकिर के कपड़े खून में लतपत थे, बेटे के कपड़े देख मंजूर फूट-फूटकर रोने लगे। शाकिर की गाड़ी को आग के हवाले किया गया था, उसमें एक शर्ट का टुकड़ा भी मिला था।

सपने में आया था शाकिर
बुधवार को वागय एक बार फिर वहां पहुंचा जहां खून में सने उनके बेटे के कपड़े मिले थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वह वहां इसलिए गए थे क्योंकि उनकी भतीजी ने उन्हें जाने के लिए कहा था। वागय ने कहा, सुबह तड़के मेरी भतीजी उफैरा ने बताया कि उसने सपने में शाकिर भाई को देखा, शाकिर ने सपने में कहा कि उसे उसी जगह दफनाया गया है जहां उसके कपड़े मिले थे। मेरे साथ गांव के 30 और लोग आ गए और सभी ने खुदाई की। आस-पास की पूरी जमीन खोदने के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।
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