स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के अनावरण से पहले कई लोग हिरासत में लिए गए

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गुजरात के नर्मदा ज़िले में आज दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी' का अनावरण होगा, मगर इसका विरोध कर रहे लोगों को कथित तौर पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के पहले गृहमंत्री रहे सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा का एक भव्य समारोह में अनावरण करने वाले हैं.

183 मीटर ऊंची यह मूर्ति केवडिया में सरदार सरोवर बांध के पास है. स्थानीय आदिवासी इस प्रतिमा के निर्माण और भव्य उद्घाटन समारोह का विरोध कर रहे हैं.

आदिवासी नेताओं ने दावा किया है 90 लोगों को हिरासत में लिया गया है और अभी तक इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि उन्हें कहां रखा गया है.

मगर नर्मदा ज़िले के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर आर.एस. निनामा ने बीबीसी गुजराती को बताया कि किसी को भी हिरासत में नहीं लिया गया है.

पुलिस ने कितनों को पकड़ा?

आदिवासी नेता आनंद मझगांवकर ने दावा किया है कि लगभग 90 लोगों को स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के पास के इलाक़े से हिरासत में लिया गया है.

उन्होंने कहा, "इन लोगों को पुलिस ने पकड़ा है मगर हमें जानकारी नहीं है कि उन्हें रखा कहां गया है."

आमलेठा पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी एम.ए. परमार ने बीबीसी को बताया कि पांच लोगों को आमलेठा थानाक्षेत्र से हिरासत में लिया गया है.

उन्होंने कहा, "हमें जानकारी मिली थी कि ये लोग प्रदर्शन करने वाले हैं, इस आधार पर हमने उन्हें हिरासत में ले लिया."

डेडियापाडा पुलिस स्टेशन के एएसआई नरान वसवा ने बीबीसी गुजराती को बताया कि बीटीएस और बीपीटी जैसे संगठन उद्घाटन समारोह का विरोध कर रहे हैं और इन संगठनों के 16 कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए हैं.

उन्होंने कहा, "पुलिस ने समारोह का विरोध कर रहे 16 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है."

स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी
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स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी

विरोध में बुलाया गया है बंद

इस इलाक़े के आदिवासियों ने दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के उद्घाटन का विरोध करते हुए आज बंद बुलाया है.

बताया जा रहा है कि अंबाजी से उमरगाम तक के कई गांव इस बंद में शामिल हो रहे हैं.

स्थानीय लोग लंबे समय से स्टैचू ऑफ़ यूनिटी का विरोध कर रहे हैं.

मध्य गुजरात के चार ज़िलों- छोटा उदयपुर, पंचमहल, वडोदरा और नर्मदा के आदिवासियों ने ख़ुद को पानी में डुबोने की धमकी दी है.

किसान
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क्यों है नाराज़गी

इस इलाक़े के गन्ना किसान मांग कर रहे हैं कि चीनी मिलों से उन्हें उनकी रुकी हुई पेमेंट दिलवाई जाए.

किसानों का दावा है कि चीनी की जिन मिलों ने उनकी फसल खरीदी थी, वे बंद हो चुकी हैं और अभी तक उनका भुगतान नहीं हुआ है.

वे आरोप लगाते हैं कि लंबे समय से वे प्रशासन के सामने अपनी मांगें रख रहे हैं मगर उनकी सुनवाई नहीं हो रही.

प्रतिमा का निर्माण कार्य पूरा होने पर राज्य सरकार द्वारा आयोजित 'एकता यात्रा' का भी किसानों ने विरोध किया. आदिवासियों ने कथित तौर पर एकता यात्रा के प्रचार के लिए लगाए गए पोस्टर फाड़ दिए.

पोस्टर
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बहुत से आदिवासी कहते हैं कि इस प्रतिमा को बनाने में खर्च हुई रकम को आदिवासी प्रधान इलाक़ों के विकास में खर्च किया जा सकता था.

स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी के आसपास के 22 गांवों के आदिवासियों ने प्रधानमंत्री को एक खुला पत्र भी लिखा है जिसमें उन्होंने लिखा है कि जब वह प्रतिमा के अनावरण के लिए आएंगे तो उनका स्वागत नहीं किया जाएगा.

स्थानीय आदिवासी नेता भी समारोह का बहिष्कार कर रहे हैं.

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