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भीषण गर्मी की चपेट में भारत समेत विश्व के कई देश, जानिए क्या है इसकी वजह?

नई दिल्ली, 29 जुलाई। भीषण गर्मी से केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व के दूसरे देश भी बहुत ज्यादा दुखी और परेशान हैं। फ्रांस, ब्रिटेन , स्पेन और ग्रीस जैसे कई देश इस वक्त गर्मी की तपिश झेल रहे हैं। मौसम में आया बदलाव हर देश के लिए चिंता का विषय है तो वहीं इसी बीच विश्व मौसम एट्रिब्यूशन नेटवर्क की स्टडी में कहा गया है कि 'जलवायु परिवर्तन वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण पैटर्न को प्रभावित कर रहा है, जिससे दुनिया भर में भीषण गर्मी हो रही है और यह एक गंभीर विषय है, जिस पर हर किसी को सोचने की जरूरत है।'

'जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी बढ़ रही है'

'जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी बढ़ रही है'

WWA, ने शुक्रवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी बढ़ रही है, यही नहीं इस परिवर्तन की वजह से 10 गुना गर्मी में इजाफा हुआ है। इन्होंने एक मॉडल प्रस्तुत किया जिसके मुताबिक Pre Industrial Times यानि कि पूर्व-औद्योगिक समय के दौरान यह मौसम आज की तुलना में करीब 1.2 डिग्री ठंडा था और ये बीते सवा लाख सालों में अब तक का सबसे गर्म दौर चल रहा है।

जलवायु परिवर्तन ने 30 गुना हीटवेव का खतरा

जलवायु परिवर्तन ने 30 गुना हीटवेव का खतरा

हालांकि स्टडी में ये भी कहा गया है कि केवल जलवायु परिवर्तन ही भीषण गर्मी की वजह नहीं लेकिन मौसम के बदलाव ये बड़ा कारण जरूर है जो कि मौसम के बदलावों को तीव्रता से प्रभावित करता है। शोध में तो ये भी बोला गया कि क्लाइमेट परिवर्तन ने 30 गुना हीटवेव का खतरा बढ़ा दिया है।

हीटवेव का खतरा बढ़ा

हीटवेव का खतरा बढ़ा

स्टडी में साफ तौर पर लिखा है कि नार्थ-वेस्ट इंडिया और साउथ-ईस्ट पाकिस्तान इस बार मार्च-अप्रैल में भारी हीटवेव की चपेट में थे बल्कि इंडिया में मार्च पिछले 122 सालों में इतना गर्म नहीं रहा जितना इस साल तपा है। इन दोनों ही देशो में कई बार तापमान मार्च-अपैल में 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया जो कि मौसम के खराब बदलाव का सूचक है।

वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (WWA)

वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (WWA)

स्टडी में कहा गया है कि जब तक ग्रीनहाउस से कार्बन डाई आक्साइड, नाइट्रस आक्साइड, मीथेन, क्लोरो-फ्लोरो कार्बन, वाष्प, ओजोन का उत्सर्जन होता रहेगा तब तक मौसम में इस तरह का बदलाव देखने को मिलेगा। आपको बता दें कि वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (WWA) जलवायु परवर्तन पर रिसर्च करने वाली एक इंटरनेशनल टीम है, जो कि एट्रिब्यूशन विश्लेषण पर लगतार स्टडी कर रही है।

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