Mann ki Baat: पीएम मोदी ने पानी को लेकर किया 'कैच द रेन' का जिक्र, जानिए क्या है
Mann ki Baat: पीएम मोदी ने पानी को लेकर किया 'कैच द रेन' का जिक्र, जानिए क्या है
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (28 फरवरी) मन की बात में जल को बचाने पर जोर दिया। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, जल हमारे लिए जीवन, आस्था और विकास की धारा है। पानी एक तरह से पारस से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। कहा जाता है पारस के स्पर्श से लोहा, सोने में परिवर्तित हो जाता है। वैसे ही पानी का स्पर्श जीवन के लिए जरूरी है। पानी के संरक्षण के लिए हमें अभी से ही प्रयास शुरू कर देने चाहिए। 22 मार्च को विश्व जल दिवस भी है। पीएम मोदी ने कहा, अब से कुछ दिन बाद जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जल शक्ति अभियान 'कैच द रेन' शुरू किया जा रहा है। पीएम मोदी ने इस दौरान मन की बात कार्यक्रम में हरिद्वार में हो रहे इस बार के कुंभ का भी जिक्र किया।

'कैच द रेन' अभियान क्या है?
'कैच द रेन' अभियान का मतलब बारिश के पानी का संरक्षण करने से है। राष्ट्रीय जल मिशन के तहत जल शक्ति मंत्रालय द्वारा इसे शुरू किया जा रहा है। ये एक तरह का जागरूकता अभियान है। जिसका टैगलाइन है- बारिश के पानी का संरक्षण, जहाँ भी संभव हो, जैसे भी संभव हो" यानी वर्षा के जल को बचाइए चाहे कैसे भी हो। इसके तहत राज्यों के लगभग हर जिलमें रेन सेंटर खोला जाएगा। जो सभी के लिये एक तकनीकी मार्गदर्शन केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इस सेंटर द्वारा लोगों को बताया जाएगा कि कैसे सही तरीके से वर्षा जल संचयन किया जा सकता है।
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पीएम मोदी ने मन की बात में क्या-क्या कहा?
-पीएम मोदी ने संत रविदास जी को याद करते हुए कहा, संत रविदास जी ने समाज में व्याप्त विकृतियों पर हमेशा खुलकर अपनी बात कही हम अपने सपनों के लिए किसी दूसरे पर निर्भर रहें, ये बिलकुल ठीक नहीं है। जो जैसा है वो वैसा चलता रहे, रविदास जी कभी भी इसके पक्ष में नहीं थे। आज हम देखते हैं कि देश का युवा भी इस सोच के पक्ष में बिलकुल नहीं है।
- राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर पीएम मोदी ने कहा, आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस है। आज का दिन भारत के महान वैज्ञानिक, डॉक्टर सी.वी. रमन जी द्वारा की गई 'रमन प्रभाव' खोज को समर्पित है। केरल से योगेश्वरन जी ने नमो ऐप पर लिखा है कि 'रमन प्रभाव' की खोज ने पूरी विज्ञान की दिशा को बदल दिया था।
-पीएम मोदी ने कहा, जब हम विज्ञान की बात करते हैं तो कई बार इसे लोग फिजिक्स और केमिस्ट्री या फिर लैब्स तक ही सीमित कर देते हैं, लेकिन साइंस का विस्तार इससे कहीं ज्यादा है और ''आत्मनिर्भर भारत अभियान'' में साइंस की शक्ति का बहुत योगदान है।












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