मणिरत्नम का खुलासा, पीएम मोदी को लिखे पत्र में साइन नहीं किया, फर्जी हैं हस्ताक्षर
नई दिल्ली। पिछले कुछ समय में जिस तरह से देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों के साथ भीड़ द्वारा मारपीट की खबरें सामने आई उसके बाद फिल्म और अन्य जगत की 49 नामचीन हस्तियों ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर इसपर चिंता जाहिर की है। लेकिन इस मामले में अब नया मोड़ सामने आ गया है। दरअसल जिन 49 लोगों ने पीएम मोदी को अपनी चिंता जाहिर करते हुए पत्र लिखा है उसमे फिल्मकार मणिरत्नम का भी नाम सामने आया था, लेकिन मणिरत्नम ने इस पत्र को सिरे से खारिज कर दिया है। बता दें कि पीएम मोदी को जो पत्र लिखा गया है उसमे 49 लोगों के हस्ताक्षर भी हैं।

मैंने नहीं किया हस्ताक्षर
मणिरत्नम ने पीएम मोदी को लिखे गए पत्र पर साइन करने से साफ इनकार किया है। मणिरत्नम की टीम की ओर से कहा गया है कि उन्होंने इस पत्र पर साइन नहीं किया है। साथ ही तमाम रिपोर्ट को खारिज किया है। बता दें कि मणिरत्नम अपनी आने वाली फिल्म के प्रमोशन में व्यस्त हैं। उन्होंने साफ किया है कि पीएम मोदी को लिखे गए किसी भी पत्र पर मैंने हस्ताक्षर नहीं किया है और ना ही इस पत्र का समर्थन करने के लिए मुझसे किसी ने समर्थन मांगा है।

तमाम घटनाओं पर चिंता जाहिर की
आपको बता दें कि जिन लोगों ने पीएम मोदी को यह पत्र लिखा है उसमे अदूर गोपालकृष्णन, मणिरत्नम, अनुराग कश्यप और अपर्णा सेन, कोंकणा सेन शर्मा, सौमित्र चटर्जी जैसे कई फिल्म निर्देशक और अभिनेता शामिल हैं। 49 दिग्गजों ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में खेद प्रकट करते हुए लिखा कि आज 'जय श्री राम' आज एक भड़काऊ युद्ध बन गया है, । इस पत्र में आगे लिखा गया है कि राम बहुसंख्यक समाज के लिए पवित्र है। राम का नाम लेना बंद कर दें। देश में लिंचिंग के मामलों पर मशहूर हस्तियों ने कहा है कि मुसलमानों, दलितों और और अल्पसंख्यकों की लिंचिंग को तुरंत रोका जाना चाहिए। हम एनसीआरबी के आंकड़े को जानकर हैरान हो गए कि साल 2016 में दलितों से अत्याचार के 840 मामले सामने आए हैं और दोषियों को सजा के मामले में कमी आई है।

क्या कार्रवाई हुई
पीएम मोदी को लिखे गए लेटर में विनायक सेन, सौमित्र चटर्जी, रेवती, श्याम बेनेगल, शुभा मुद्गल, रूपम इस्लाम, अनुपम रॉय, परमब्रता, रिद्धि सेन के नाम भी शामिल हैं। 23 जुलाई को लिखे इस लेटर में कहा गया कि प्रधानमंत्री जी आपने संसद में इस तरह की लिंचिंग की आलोचना कि लेकिन ये पर्याप्त नहीं है। वास्तव में अपराधियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? अफसोस है कि 'जय श्री राम' एक भड़काऊ युद्ध बन गया है। आज ये कानून व्यवस्था के लिए समस्या बन गया है और कई लिंचिंग की घटनाएं इसके नाम पर हो रही हैं। इतिहासकार रामचंद्र गुहा, डॉक्टर और सामाजिक कार्यकर्ता विनायक सेन, विद्वान और समाजशास्त्री आशीष नंदी उन लोगों में से हैं जिन्होंने पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।












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