Manipur Violence: मणिपुर में नई सरकार की शपथ पर क्यों सुलग उठा चुराचांदपुर? कूकी समुदाय की क्या है नाराजगी
Manipur Violence: भले ही मणिपुर में नई सरकार का गठन हो गया हो लेकिन राज्य में पुराना संघर्ष अभी जारी है। मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में 6 फरवरी को शाम उस समय हालात बेकाबू हो गए, जब राज्य के नए उपमुख्यमंत्रियों के शपथ ग्रहण के विरोध में शुरू हुआ। देखते ही देखते पूरा प्रोटेस्ट हिंसक हो गया।
न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, नेमचा किपगेन और लॉसी दीको के डिप्टी चीफ मिनिस्टर के रूप में शपथ लेने को लेकर नाराज भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं। देखते ही देखते स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पूरे इलाके में तनाव फैल गया।

विस्तार से पढ़िए आखिर नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद एक बार फिर चुराचांदपुर में हिंसा भड़क उठी, क्या है कुकी-जोमी समुदाय की नाराजगी का कारण...
Churachandpur में फिर कैसे भड़क उठी हिंसा?
सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार, 5 फरवरी को शाम करीब 6 बजे चुराचांदपुर के तुइबोंग मेन मार्केट इलाके में सैकड़ों युवा प्रदर्शनकारी एकत्र हो गए। उन्होंने सुरक्षा बलों से अपनी बैरकों में लौटने की मांग की। जब सुरक्षाकर्मियों ने ऐसा करने से इनकार किया, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया और प्रदर्शन उग्र रूप ले बैठा।
इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। कुछ लोगों ने सड़क के बीच टायर जलाकर रास्ता जाम कर दिया, जिससे आगजनी और धुएं के कारण पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हालात इतने बिगड़े कि आम लोगों में दहशत फैल गई और बाजार क्षेत्र में दुकानें बंद होने लगीं।
Kuki Zomi Community Protest: कूकी-जोमी समुदाय में क्यों है नाराजगी?
स्थानीय लोगों, विशेषकर कूकी-जोमी समुदाय के युवाओं में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि उनकी जानकारी के अनुसार तीन कूकी-जोमी विधायक मणिपुर सरकार में शामिल होने जा रहे हैं। नेमचा किपगेन पहले ही उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले चुकी हैं, जबकि एलएम खाउते और नगुरसंगलुर के भी जल्द शपथ लेने की चर्चा है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बीते वर्षों में कूकी-जोमी समुदाय ने भीषण हिंसा झेली है। सूत्रों के अनुसार, इम्फाल और आसपास के इलाकों में सैकड़ों लोगों की दिनदहाड़े हत्या हुई, करोड़ों रुपये की संपत्ति जलकर राख हो गई और कई चर्चों को भी निशाना बनाया गया। ऐसे में मौजूदा राजनीतिक फैसलों ने समुदाय के जख्मों को फिर से हरा कर दिया है, जिससे आक्रोश और असंतोष और बढ़ गया।
हालात काबू में करने की कोशिश
स्थिति को संभालने के लिए असम राइफल्स के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें 27 सेक्टर के कमांडर भी शामिल थे, मौके पर तैनात किए गए। शुरुआत में प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिशें नाकाम रहीं। हालात और बिगड़ते देख सुरक्षा बलों को कुछ समय के लिए पीछे हटना पड़ा, हालांकि उन्होंने रणनीतिक पोजिशन बनाए रखीं।
इसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इसके बावजूद झड़पें देर रात तक जारी रहीं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा बल अब भी इलाके में गश्त कर रहे हैं और हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।
NDA New government Manipur: नई सरकार की राजनीतिक पृष्ठभूमि ने बढ़ाया तनाव
गौरतलब है कि भाजपा के युमनाम खेमेंचंद सिंह ने बुधवार को मणिपुर की पुनर्स्थापित एनडीए सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके साथ ही कूकी विधायक नेमचा किपगेन और नागा विधायक लॉसी दीको को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। यह बहु-जातीय मणिपुर में साझा शासन की एक नई पहल मानी जा रही है, लेकिन यही फैसला विवाद और विरोध का कारण भी बन गया।
मणिपुर पहले से ही मीजी (मैतेई) और कूकी समुदायों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष से जूझ रहा है। मई 2023 में दोनों समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा ने राज्य को गहरे जख्म दिए थे। लगातार अशांति और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के चलते पिछले साल फरवरी में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा था।
अब भी तनावपूर्ण हालात
फिलहाल चुराचांदपुर में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। सुरक्षा बल लगातार गश्त कर रहे हैं और प्रशासन हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए अतिरिक्त बलों को अलर्ट पर रखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मणिपुर में शांति बहाली के लिए केवल राजनीतिक फैसले ही नहीं, बल्कि सभी समुदायों के बीच संवाद और भरोसा बहाल करना बेहद जरूरी है। चुराचांदपुर की यह ताजा हिंसा एक बार फिर यह दिखाती है कि राज्य में स्थायी शांति की राह अब भी आसान नहीं है।












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