मणिपुर: कुकी विधायकों ने इंफाल को बताया 'मौत और विनाश की घाटी', PM मोदी को पत्र लिखकर रखीं ये मांगें
मणिपुर में पिछले कई महीने से जारी जातीय हिंसा की आग अभी भी सुलग रही है। इसी बीच मणिपुर के दस कुकी विधायकों ने बुधवार को पीएम मोदी को पत्र लिखा है। इन विधायकों ने पत्र मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के समान पद बनाने की मांग की है।
इन 10 विधायकों ने पांच पहाड़ी जिलों चुराचांदपुर, कांगपोकपी, चंदेल, तेंगनौपाल और फेरज़ावल के लिए मुख्य सचिव और डीजीपी के समकक्ष पद बनाने की मांग की। इसके अलावा चुराचांदपुर के लिए पीएम राहत कोष से 500 करोड़ के रिलीव फंड की भी मांग की है।

विधायकों ने पत्र में लिखा कि, कुकी समुदाय के सदस्यों के घरों, बस्ती क्षेत्रों, वाहनों और चर्चों को जला दिया गया। मणिपुर विश्वविद्यालय के छात्रावासों, मेडिकल कॉलेजों और नर्सिंग सहित अन्य छात्रावासों और संस्थानों में पढ़ने और रहने वाले कुकी छात्रों को निकाल दिया गया है।मैतेई लोगों ने छात्रों को किराए के मकानों से बाहर निकाल दिया गया।
पत्र में कहा गया है कि, इन छात्रों के साथ मारपीट, बलात्कार, जैसे अत्याचार हो रहे हैं। उनकी हत्या की जा रही है। यहां तक कि राज्य विधानसभा के सदस्यों को भी नहीं बख्शा गया है। मणिपुर विधानसभा के थानलॉन निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य वुंगज़ागिन वाल्टे और उनके ड्राइवर को उस समय रोका गया जब वह मुख्यमंत्री के बंगले से एक बैठक से लौट रहे थे।
विधायकों ने बताया कि, वुंगज़ागिन वाल्टे के ड्राइवर को पीट-पीटकर मार डाला गया, और विधायक को यातना दी गई और पीटा गया और मरने के लिए छोड़ दिया गया। हालांकि, सुरक्षाबलों ने उन्हें बचा लिया और नई दिल्ली ले गए। जहाँ वह धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं लेकिन वह शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम हो गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि दो कैबिनेट मंत्रियों के घर वे दोनों हस्ताक्षरकर्ता हैं जलाकर राख कर दिए गए हैं।
विधायकों ने पत्र में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह पर हमला बोलते हुए दावा किया कि घरों को जलाने के बाद भी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मैतेई लोग पहाड़ी के गांवों पर हमला करके कुकी आदिवासियों के खिलाफ युद्ध जारी रखे हुए हैं। पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले विधायकों में हाओखोलेट किपगेन, लेटपाओ हाओकिप, एलएम खाउते, नेमचा किपगेन, नगुर्सांगलुर सनाटे, पाओलिएनलाल हाओकिप, चिनलुनथांग, लेटज़मांग हाओकिप, किम्नेओ हाओकिप हैंगशिंग और वुंगज़ागिन वाल्टे शामिल हैं।
विधायकों ने कहा कि मणिपुर का राजधानी इंफाल कुकी लोगों के लिए मौत और विनाश की घाटी बन गई है और अब कोई भी इंफाल वापस जाने की हिम्मत नहीं करता है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि, एक मानसिक रूप से अस्थिर महिला, जिसे मैतेई महिला समूह, मीरापैबिस ने पकड़ा था। उसे मैतेई मिलिशिया को सौंप दिया गया था। बाद में उसे कुकी महिला समझकर मार डाला गया।
पत्र में विधायकों ने लिखा कि, मैतेई आतंकवादियों द्वारा लांग्ज़ा गांव के एक युवक डेविड थिएक की सिर काटकर हत्या कर दी गई। वहीं मैतेई भीड़ द्वारा दो कुकी महिलाओं को नग्न किया और उनके साथ छेड़छाड़ और सामूहिक बलात्कार किया। इन वीभत्स और बर्बर घटनाओं ने हमारे देशवासियों की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है।
पत्र में विधायकों ने कहा कि कुकी समुदाय के आने वाले सरकारी कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए और हमारे निवास वाले जिलों के कुशल प्रशासन के लिए मुख्य सचिव और डीजीपी के समकक्ष एक नए पद को तत्काल सृजित करने की जरूरत है। पत्र में कहा गया है कि इसके अलावा, नागरिक और पुलिस विभाग में अन्य प्रमुख वरिष्ठ स्तर के पद भी जनहित में पद सृजित किए जाने चाहिए।












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