मणिपुर: 2017 के चुनाव में कांग्रेस थी सबसे बड़ी पार्टी, सरकार बनाई थी भाजपा ने
इंफाल, 8 जनवरी: चुनाव आयोग आज पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए तारीखों का ऐलान करने जा रहा है। पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा के साथ पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में भी मतदान के लिए तारीखों का ऐलान किया जाएगा। मणिपुर में कांग्रेस और भाजपा के साथ कई क्षेत्रीय दल चुनाव मैदान में हैं। 2017 में यहां के विधानसभा चुनाव में किसी को बहुमत नहीं मिला था। ऐसे में इस दफा भी यहां काफी कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
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भाजपा राज्य में सत्ता में
मणिपुर में विधानसभा का कार्यकाल 19 मार्च 2022 को खत्म हो रहा है। ऐसे में यहां चुनाव हो रहा है। मणिपुर में इस भाजपा सरकार में है और वो एक बार फिर से सत्ता पर काबिज होना चाहती है। हाल के दिनों में लगातार भाजपा के सीनियर नेताओं ने राज्या का दौरा किया है। राज्य में उसका सीधा मुकाबला कांग्रेस से होने की उम्मीद है। भाजपा 2017 के चुनाव में दूसरा बड़ा दल थी लेकिन सरकार बनाने में कामयाब रही थी।
2017 में कांग्रेस थी सबसे बड़ी पार्टी
मणिपुर में विधानसभा की 60 सीटें हैं। ऐसे में यहां बहुमत का आंकड़ा 31 सीटों का है। 60 सीटों वाली मणिपुर विधानसभा में 2017 में कांग्रेस को 28 सीटें मिली थीं। भाजपा को 60 में 21 सीटें मिलीं थीं। चुनाव में नेशनल पीपल्स पार्टी और नगा पीपल्स फ्रंट को चार-चार और लोजपा, टीएमसी को एक-एक सीट मिली थी।
2017 के चुनाव में कांग्रेस 28 सीटों पर जीत के साथ मणिपुर में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और बहुमत से सिर्फ तीन सीट दूर थी। इसके बावजूद वो सत्ता से दूर रह गई थी। भाजपा ने 21 सीटें जीतने के बाद नेशनल पीपल्स पार्टी (4), नगा पीपल्स फ्रंट (4), लोजपा (1) और दो अन्य विधायकों के सहयोग से मणिपुर में सरकार बनाई थी। राज्य में भाजपा के एन बीरेन सिंह मुख्यमंत्री बने थे।












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