कांग्रेस के हाथ से मणिपुर छीनने के लिए भाजपा ने किया असम फार्मूले पर काम
मणिपुर में कांग्रेस के 15 साल से चले आ रहे शासन को खत्म करने के लिए भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से बेताब है। कांग्रेस को हटाकर खुद सत्ता में आने के लिए अब भाजपा असम फॉर्मूले पर काम कर रही है।
इंफाल। मणिपुर में कांग्रेस के 15 साल से चले आ रहे शासन को खत्म करने के लिए भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से बेताब है। कांग्रेस को हटाकर खुद सत्ता में आने के लिए अब भाजपा असम फॉर्मूले पर काम कर रही है। एक समय वर्ष 2012 में जहां भाजपा ने मात्र 19 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ा था। इस बार पार्टी सारी 60 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ रही है। असम और अरुणाचल प्रदेश में मिली सफलता को पार्टी हर हाल में यहां पर जारी रखना चाहती है। पर इसका नतीजा तो 11 मार्च को ही होगा कि आखिर किसके हाथ में जाती है।

असम की तर्ज पर ही भाजपा ने इस बार भी मणिपुर में कांग्रेस छोड़कर आए सभी विधायकों को टिकट दिया है। चुनाव से पहले कांग्रेस के छह विधायकों ने पार्टी छोड़ी थी और उन सबको भाजपा ने टिकट दिया है।
टी चोबा सिंह ने मुताबिक मणिपुर विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी और उसे 30-35 सीटें मिलेंगी, वहीं कांग्रेस की सीटों की संख्या 20 से नीचे रह जाएगी।
पिछले साल असम में अधिक मतदान के चलते भाजपा को सफलता हाथ लगी थी, उसी तरह से मणिपुर विधानसभा चुनाव 2017 के दोनों चरणों में 86 फीसदी वोटिंग हुई है। इसके चलते भाजपा को उम्मीद है कि उनकी ज्याद सीटें आएंगी।
असम सरकार में मंत्री हिमांता शर्मा ने बताया कि मणिपुर में इतना ज्यादा मतदान दिखाता है कि लोग अपने मतदान के जरिए कांग्रेस की सरकार को बदलने के लिए तैयार हैं।
वहीं नागा पीपुल फ्रंट कुल 15 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पिछली बार वर्ष 2012 में वो चार सीटें जीतने में कामयाब रही थी। यह भी कहा जा रहा है कि चुनाव के बाद भाजपा और एनपीएफ में गठबंधन हो सकता है।
आपको बताते चले कि यूनाइटेड नागा काउसिंल की ओर से नेशनल हाइवे को बंद किए जाने पर कांग्रेस और मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह पर हमला बोला था। इंफाल में अपने चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीने भी कहा था कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो नेशनल हाइवे को खुलवाया जाएगा।












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