'थरूर को विदेश मंत्री बनना है',कांग्रेसी नेताओं की पोल खोलने में लगे मणिशंकर अय्यर, खेड़ा-जयराम पर भी निशाना
Mani Shankar Aiyar News: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर एक बार फिर अपनी ही पार्टी के लिए असहज स्थिति खड़ी कर गए हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने न सिर्फ पार्टी की केरल में संभावनाओं पर सवाल उठाए, बल्कि शशि थरूर की महत्वाकांक्षा, पवन खेड़ा की भूमिका और जयराम रमेश की स्थिति पर भी तीखे तंज कसे। उनके बयानों ने चुनावी मौसम में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है।
मणिशंकर अय्यर ने तिरुवनंतपुरम से चार बार सांसद रहे शशि थरूर को लेकर चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि शशि थरूर पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की कोशिश करते हैं और उनकी महत्वाकांक्षा देश का अगला विदेश मंत्री बनने की है। शशि थरूर विदेश मंत्री बनना चाहते हैं। अय्यर के मुताबिक थरूर की राजनीति का रुख इसी दिशा में दिखाई देता है।

हाल के महीनों में शशि थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद भी चर्चा में रहे हैं। ऐसे में अय्यर का यह बयान पार्टी के भीतर चल रही खामोश हलचल को और उजागर करता है।
'पवन खेड़ा एक कठपुतली हैं,वो कांग्रेस के प्रवक्ता नहीं हैं'
अय्यर ने पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने खेड़ा को कठपुतली बताते हुए कहा कि वह पार्टी के अधिकृत प्रवक्ता नहीं हैं और पिछले दो साल से उन पर लगातार निशाना साध रहे हैं। मणिशंकर अय्यर ने यहां तक कह दिया कि अगर कांग्रेस के पास खेड़ा के अलावा कोई बेहतर चेहरा नहीं है तो पार्टी की हालत समझी जा सकती है।
मणिशंकर अय्यर बोले,
"पवन खेड़ा कांग्रेस की कठपुतली, पपेट हैं, उनकी कोई औकात ही नहीं है। अगर कांग्रेस को पवन खेड़ा से बेहतर प्रवक्ता नहीं मिल सकता, तो वह जहां है वहीं रहने की हकदार है। वह तो एक आईएएस अधिकारी था, चाटुकारिता करके यहां तक पहुंचा है।''
दरअसल, खेड़ा ने हाल में स्पष्ट किया था कि अय्यर पार्टी से जुड़े नहीं हैं और अपने निजी विचार रखते हैं। इसी बयान से नाराज होकर अय्यर ने सार्वजनिक तौर पर पलटवार किया।
जयराम रमेश पर भी तंज
अय्यर ने कांग्रेस के संचार प्रमुख जयराम रमेश पर भी कटाक्ष किया। उनका कहना था कि रमेश को अपनी नौकरी बचाए रखने की चिंता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के भीतर रणनीति और संदेश को लेकर पहले ही मतभेद की चर्चाएं हैं। रमेश ने हालांकि जवाब में भरोसा जताया कि केरल की जनता जिम्मेदार और जवाबदेह शासन के लिए यूडीएफ को वापस लाएगी और वाम मोर्चा तथा बीजेपी के बीच गुप्त समझ को भी समझती है।
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अय्यर ने साफ कहा कि वह चाहते हैं कांग्रेस जीते, लेकिन उन्हें भरोसा नहीं है। उन्होंने साफ-साफ कहा कि कांग्रेस केरल में किसी कीमत पर जीतने वाली नहीं है। उनका तर्क है कि पार्टी नेता आपस में ज्यादा बंटे हुए हैं और एक दूसरे से ज्यादा नाराज हैं, बजाय इसके कि वामपंथियों से मुकाबला करें।
यह बयान ऐसे समय आया है जब केरल में कांग्रेस को पिनाराई विजयन की अगुवाई वाली वाम सरकार को चुनौती देनी है। अय्यर पहले भी विजयन की तारीफ कर चुके हैं और भरोसा जता चुके हैं कि वह फिर मुख्यमंत्री बनेंगे। उनके इस रुख से कांग्रेस ने खुद को अलग कर लिया था।
'विजन 2031 डेवलपमेंट एंड डेमोक्रेसी' नामक सेमिनार में अय्यर ने केरल की पंचायती राज व्यवस्था की तारीफ की और कहा कि यह राजीव गांधी के सपनों को साकार करने वाला मॉडल है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि कांग्रेस जो जिम्मेदारी छोड़ चुकी है, उसे वह आगे बढ़ाएं। इस बयान ने पार्टी नेतृत्व को असहज कर दिया, क्योंकि चुनाव से पहले ऐसे संदेश को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा गया।
अंदरूनी असहमति या खुला बगावत का इशारा?
मणिशंकर अय्यर के ताजा बयान कांग्रेस के भीतर बढ़ती असहजता का संकेत हैं। एक तरफ पार्टी के नेता चुनावी रणनीति में जुटे हैं, दूसरी तरफ वरिष्ठ नेता सार्वजनिक मंच से ही सवाल खड़े कर रहे हैं।
शशि थरूर की महत्वाकांक्षा, पवन खेड़ा की प्रतिक्रिया और जयराम रमेश की सफाई के बीच यह साफ है कि केरल चुनाव से पहले कांग्रेस को पहले अपने घर की सियासत संभालनी होगी। वरना विपक्ष से पहले अंदरूनी खींचतान ही भारी पड़ सकती है।












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