CJI पर आरोप लगाने वाली महिला के खिलाफ FIR करने वाला शख्स लापता
नई दिल्ली: 31 साल के व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिला कर्मचारी पर आरोप लगाया कि उसने उसके साथ जॉब दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी की है। उसने महिला पर सुप्रीम कोर्ट में जॉब लगाने के नाम पर 50,000 हजार रुपये की धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे। पुलिस ने दिल्ली की अदालत को जानकारी की दी कि वो पिछले अप्रैल से अपने हरियाणा के आवासीय पते से गायब है। ये वो ही महिला है, जिसने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।

सीजेआई पर आरोप लगाने वाली महिला ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला ने शपथ पत्र दायर कर धोखाधड़ी के मामले को झूठा बताया था। उसने शपथ पत्र दाखिल कर दावा किया था कि उसके खिलाफ ये मामला इसलिए दर्ज किया गया है क्योंकि उसने सीजेआई के खिलाफ शिकायत की है और इसी वजह से उसे परेशान किया जा रहा है। चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट मनीष खुराना ने जब शिकायतकर्ता नवीन कुमार को अपने समक्ष पेश होने को बुलाया तब उनके लापता होने का खुलासा हुआ।

दिल्ली पुलिस ने जमानत का किया विरोध
इससे पहले दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने महिला की जमानत रद्द करने की मांग की थी। पुरुष ने आरोप लगाया था कि उसे महिला और उसके पति द्वारा धमकी दी जा रही है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने जब अप्रैल में नवीन कुमार के झज्जर के घर का दौरा किया था, तो उनकी मां ने बताया था कि उनका बेटा 20 अप्रैल को सुबह 7 बजे चंडीगढ़ के लिए रवाना हुआ था और उसके बाद उसका फोन बंद हो गया था। 50 साल की नवीन की मां ने कहा कि उसने पहले ही केस करने से मना किया था क्योंकि वो शक्तिशाली लोग हैं। कुमार के परिवार के अनुसार वो झज्जर में एचएल सिटी प्राइवेट लिमिटेड में एक सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करता था। उसे वहां हर महीने 15,000 रुपये सैलरी मिलती है।

कोर्ट ने नवीन को पेश होने के दिए थे आदेश
24 अप्रैल को सीएमएम मनीष खुराना ने कुमार को नोटिस जारी कर 23 मई को अदालत में उपस्थिति रहने को कहा था। लेकिन जांच अधिकारी मुकेश अंतिल ने कोर्ट को बताया कि शिकायतकर्ता को जारी किया गया नोटिस उसे नहीं मिला क्योंकि वह अपने पते पर नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने नए सिरे से नोटिस जारी किया और 6 सितंबर को उपस्थित रहने को कहा। कोर्ट ने ये भी आदेश दिया कि कुमार को अगली तारीख के लिए आईओ के माध्यम से नोटिस दिया जाए। इस पर महिला वकील वीके ओहरी ने आपत्ति जताई। उन्होंने पुलिस की याचिका खारिज करने और उनके मुवक्किल के खिलाफ मामला बंद करने की मांग की।












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