9 साल जेल में रहते हुए कितने बदल गए कर्नल पुरोहित

जमानत मिलने के बाद जब श्रीकांत पुरोहित से पूछा गया कि 9 साल जेल में रहकर उन्हें गुस्सा नहीं आता तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा 'मैं किसी और को नहीं, अपनी किस्मत को दोष देता हूं।'

नई दिल्ली। मालेगांव बम ब्लास्ट के मुख्य आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित 9 साल बाद जेल से आजाद हुए हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी। लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्होंने आर्मी के लिए गुप्तचर के तौर पर काम किया था न कि वे आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे। पुरोहित को जमानत मिलने के बाद राजनीति भी तेज हो गई है। बीजेपी इसे जीत के तौर पर देख रही है तो कांग्रेस का कहना है कि जमानत मिलने से आरोपी दोषमुक्त नहीं हो जाता। पुरोहित की जमानत इसलिए ज्यादा अहमियत रखती है, क्योंकि मालेगांव धमाके के बाद पहली बार देश में 'हिन्दू आतंकवाद' जैसा शब्द लोगों के सामने आया था।

'वक्त आने पर सबकुछ बताऊंगा'

'वक्त आने पर सबकुछ बताऊंगा'

जमानत मिलने के बाद जब श्रीकांत पुरोहित से पूछा गया कि 9 साल जेल में रहकर उन्हें गुस्सा नहीं आता तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा 'मैं किसी और को नहीं, अपनी किस्मत को दोष देता हूं।' जब इस बात को लेकर सवाल किया गया कि क्या उन्हें लगता है कि इस मामले में उन्हें फंसाया गया है, तो पुरोहित ने कहा 'यह एहसास भर नहीं है, यह हकीकत है।'। श्रीकांत पुरोहित को क्यों और किसने फंसाया इस सवाल का जवाब पुरोहित ने नहीं दिया लेकिन इतना जरुर कहा कि वक्त आने पर बताऊंगा।

जब गिरफ्तार हुए थे तब कांग्रेस की सरकार थी

जब गिरफ्तार हुए थे तब कांग्रेस की सरकार थी

श्रीकांत पुरोहित जब 2008 में गिरफ्तार हुए थे तब देश में यूपीए की सरकार थी और बीजेपी के आरोपों के अनुसार हिंदू आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल जानबूझकर किया जा रहा था। हिंदू आतंकवाद को हवा देने की कोशिश की जा रही थी। अब जब वो जेल से आजाद हुए हैं तो देश में एनडीए की सरकार है और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं। भारतीय जनता पार्टी ने कर्नल पुरोहित की जमानत के बाद कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने 'हिंदू आतंकवाद' जैसे शब्द का गठन किया था। देश के तत्कालीन गृहमंत्री ने सोनिया गांधी की उपस्थिति में इसका जिक्र किया था। बाद में पी. चिदंबरम ने भी इसे हवा दी थी। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी अमेरिकी राजदूत से कहा था कि उन्हें 'हिंदू आतंकवाद' से डर लगता है। संबित पात्रा ने कहा कि आज कांग्रेस की साजिश बेनकाब हो गई है।

आतंकी घटनाओं का राजनीतिकरण क्यों?

आतंकी घटनाओं का राजनीतिकरण क्यों?

केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से कांग्रेस लगातार ये आरोप लगा रही है कि मोदी सरकार के राज में मालेगांव ब्लास्ट मामले के आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस ने इस मामले में एनआईए की भूमिका पर भी सवाल उठाए है। इससे पहले मालेगांव ब्लास्ट मामले में साध्वी प्रज्ञा भी ज्ल से बाहर आ चुकी है। अब श्रीकांत पुरोहित भी 9 साल बाद जेल से आजाद हो चुके है। एक बार फिर से इम मुद्दे को लेकर राजनिति तेज होने की संभावना है। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत के बाद कहा कि देश में आतंकी घटनाओं का राजनीतिकरण किया जाता है।

पुरोहित पर बम सप्लाई करने का आरोप

पुरोहित पर बम सप्लाई करने का आरोप

महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को हुए बम विस्फोट में 7 लोग मारे गए थे। मालेगांव की हमीदिया मस्जिद के नजदीक एक मोटरसाइकल पर रखे बम में धमाका हुआ था। केस की शुरुआती जांच महाराष्ट्र एटीएस ने की। बाद में एनआईए ने जांच का जिम्मा संभाला। ब्लास्ट केस के बाद से ही कर्नल पुरोहित जेल में थे। पुरोहित पर बम सप्लाई का आरोप था। इस मामले में महाराष्ट्र एटीएस ने पाया कि ब्लास्ट के पीछे कथित तौर पर कुछ 'हिन्दुवादी संगठनों' का हाथ है। इस केस के बाद ही सबसे पहले हिंदू आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल हुआ था। चार हजार पन्ने के आरोप पत्र में यह आरोप लगाया गया कि मालेगांव को धमाके के लिए चुनने की वजह थी, वहां पर भारी तादाद में मुस्लिम आबादी। इस धमाके के मुख्य आरोपी के तौर पर प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल को मुख्य अभियुक्त माना गया, जबकि स्वामी दयानंद पांडे को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया।

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