रूस की मदद से भारत बना सकता है न्यूक्लियर फ्यूल, मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20वें वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस के दो दिवसीय दौरे पर हैं। बुधवार को रूस के राष्ट्रपित व्लादिमिर पुतिन के साथ उनकी मुलाकात में दोनों देशों के मजबूत रिश्तों की झलक देखने को मिली। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते भी हुए। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण असैन्य परमाणु उर्जा उत्पादन को लेकर सहमति बनती दिख रही है।

क्योंकि पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पोर्ट सिटी व्लादिवोस्तोक में अपनी द्विपक्षीय बैठक के दौरान भारत में परमाणु ईंधन के संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर चर्चा की। अगर यह डील पूरी होती है तो इससे मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा। दोनों देशों के नेताओं की बीच मुलाकात से कुछ हफ्ते पहले ही रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोस्तम की सहयोगी टीवीईएल के वाइस प्रेसिडेंट ओलेग ग्रिगॉर्येव ने कहा था कि उनकी कंपनी भारत में न्यूक्लियर फ्यूल रॉड्स को असेंबल करने की दिशा में सोच रही है।
ग्रिगॉर्येव ने कहा कि हम समझते हैं कि भारत की प्रबल इच्छा चीजों के स्थानीय उत्पादन पर है। हम ऐसे सहयोग के लिए तैयार हैं और स्थानीय स्तर पर काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा था कि रूस द्वारा दी गई फ्यूल पैलेट्स के इस्तेमाल से फ्यूल रॉड्स भारत में असेंबल की जा सकती है लेकिन ज्यादा कुछ यूनिटों की संख्या पर निर्भर करता है।
वहीं बुधवार को असैन्य परमाणु ऊर्जा पर एक एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद पुतिन ने कहा हम फ्लैगशिप जॉइंट प्रॉजेक्ट के तौर पर रोस्तम के भारतीय पार्टनरों के साथ सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। इसमें एक आधुनिक कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र का निर्माण भी शामिल है।
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