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असम में माजुली द्वीप और कामाख्या मंदिर की बदलेगी सूरत, 15वें वित्त आयोग ने की ऐसी सिफारिश

15th finance commission recommendations:जल्दी ही असम (Assam) की दो मशहूर जगहों की तस्वीर बदलने की उम्मीद जग गई है। यह दोनों जगह हैं, विश्व का सबसे बड़ा और चर्चित आबादी वाला नदी द्वीप (river island) माजुली और पवित्र शक्तिपीठ माता कामाख्या मंदिर (Kamakhya Temple)। ऐसा इसलिए संभव लग रहा है,क्योंकि 15वें वित्त आयोग ने इन दो स्थानों के विकास के लिए अच्छे-खासे अनुदान दिए जाने की सिफारिश की है। गौरतलब है कि एनके सिंह की अध्यक्षता वाले 15वें वित्त आयोग ने अपनी सिफारिशें आम बजट वाले दिन यानी सोमवार को ही लोकसभा में पेश की हैं।

असम में माजुली द्वीप और कामाख्या मंदिर की बदलेगी सूरत

असम में माजुली द्वीप और कामाख्या मंदिर की बदलेगी सूरत

15वें वित्त आयोग (15th Finance Commission ) ने माजुली (Majuli Island) के लिए तटबंध और सड़क के निर्माण के मकसद से 1,075 करोड़ रुपये देने की सिफारिश की है। जबकि, माता कामाख्या मंदिर परिसर (Kamakhya temple complex)के विकास के लिए 300 करोड़ रुपये देने की सिफारिश की है। वित्त आयोग की ये सिफारिशें सोमवार को संसद में पेश की गई है। इस संवैधानिक आयोग की सिफारिश के मुताबिक दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले नदी द्वीप माजुली (river island Majuli) के आसपास यह नया तटबंध-सह-सड़क बनाने का प्रस्ताव है। बता दें कि ब्रह्मपुत्र बेसिन (Brahmaputra basin) की विशाल नदी प्रणाली से बना यह द्वीप करीब 875 वर्ग किलोमीटर में फैला है। समुद्र की सतह से 85 से 90 मीटर ऊंचा यह नदी द्वीप करीब 80 किलोमीटर लंबा और 10 से 15 किलोमीटर चौड़ा है।

कैसे द्वीप में तब्दील हुआ माजुली ?

कैसे द्वीप में तब्दील हुआ माजुली ?

विश्व का यह से सबसे बड़ा आबादी वाला नदी द्वीप अपने अजीबोगरीब स्थान की वजह से ना सिर्फ भयंकर बाढ़ की चपेट में आ जाता है, बल्कि सामान्य बाढ़ भी ये यहां रहने वाले लोगों के लिए बहुत परेशानी का सबब बन जाता है। उम्मीद है कि जब यहां तटबंधों के साथ-साथ सड़कों का निर्माण होगा तो यहां के लोग कटाव की समस्या से तो मुक्ति पा ही लेंगे, द्वीप के आसपास की यात्रा भी उनके लिए बहुत अधिक सुलभ हो जाएगी। बता दें कि सातवीं शताब्दी की शुरुआत में माजुली जमीन के बड़े टुकड़े का ही हिस्सा था, लेकिन ब्रह्मपुत्र नदी की धारा बदलने और रेत जमा होने से यह धीरे-धीरे द्वीप में तब्दील हो गई।

असम की मुख्य भूमि से 2.5 किलोमीटर दूर है द्वीप

असम की मुख्य भूमि से 2.5 किलोमीटर दूर है द्वीप

आज की तारीख में माजुली द्वीप असम की मुख्य भूमि से 2.5 किलोमीटर दूर हो चुका है और उसके दक्षिणी किनारे पर जोरहाट जिले के निमती घाट से पहुंचा जा सकता है। इसके उत्तरी हिस्से में असम के उत्तरी लखीमपुर और धाकुवाखाना शहर हैं। इस द्वीप पर इस समय कुल 243 छोटे और बड़े गांव हैं। कुछ वर्ष पहले ही सरकार ने इसे देश का पहला आयलैंड डिस्ट्रिक्ट घोषित किया था। माजुली असम में वैष्णव विचारधारा का भी प्रमुख केंद्र है और यहां के वैष्णव मठों को सत्र कहा जाता है। इसलिए इसे सत्रों की भूमि के नाम से भी जाना जाता है, जिसका मायने है ईमानदारों का मठ। कहते हैं कि एक वक्त असम में जितने भी वैष्णव मठ (Vaishnavite monasteries) थे, उसका एक अच्छा-खासा हिस्सा यहीं पर था।

कामाख्या मंदिर के विकास पर भी वित्त आयोग का ध्यान

कामाख्या मंदिर के विकास पर भी वित्त आयोग का ध्यान

इसके अलावा वित्त आयोग ने गुवाहाटी के पास स्थित विश्व प्रसिद्ध पवित्र माता कामाख्या मंदिर के विकास के लिए भी 300 करोड़ रुपये देने की सिफारिश की है, जिसे देश के एक बड़े शक्तिपीठ के रूप में स्थान है। यह मंदिर नीलाचल के पहाड़ पर स्थित है और हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस मंदिर में लगने वाला अंबुबाची मेला भी खूब चर्चित है।

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