असम में हीरो बने मेजर गोगोई, मुगलों को हराने वाले जनरल से हो रही है तुलना

सन् 1671 में असम में एक मध्‍यकालीन युद्ध नायक ने मुगलों की सेना को हराया था। अब मेजर नितिन लीतुल गोगोई की तुलना उसी युद्ध नायक से की जा रही है।

गुवाहाटी। एक माह से ज्‍यादा का समय हो गया है लेकिन इं‍डियन आर्मी के ऑफिसर मेजर नितिन लीतुल गोगोई के बारे में हर तरफ बातें हो रही हैं। कुछ लोगों उनके एक्‍शन को सकारात्‍मक तौर पर देख रहे हैं तो कुछ उनके एक्‍शन की आलोचना कर रहे हैं। मेजर नितिन लीतुल गोगोई इंडियन आर्मी के वही ऑफिसर हैं जिन्‍होंने कश्‍मीर में उपचुनाव के दौरान एक युवक, जो पत्‍थरबाजों की भीड़ में शामिल था, उसे जीप से बांध दिया था। अब फेसबुक से लेकर ट्विटर तक असम के लोग अपने इस 'हीरो' की तारीफ में कई तरह के कसीदे गढ़ रहे हैं।

मुगलों को हराने वाले नायक की तरह गोगोई

मुगलों को हराने वाले नायक की तरह गोगोई

मेजर गोगोई उस समय खबरों में आए जब उन्‍होंने कश्‍मीर के बडगाम में एक पत्‍थरबाज को उस समय ह्यूमन शील्‍ड के तौर पर प्रयोग किया था जब सेना पर पत्‍थरबाजी हो रही थी। मेजर गोगोई को उनके राज्‍य के लोग उस युद्ध नायक की तरह बता रहे हैं जिसने सन् 1671 में मुगलों की सेना को तब हराया था तब वह असम को जीतने की कोशिशों में लगी थी।

फेसबुक पर मेजर गोगोई के फैन

फेसबुक पर मेजर गोगोई के फैन

मेजर गोगोई असम के नामरूप के रहने वाले हैं और यहां के लोग अपने इस मेजर के फैन हो गए हैं। फेसबुक पर एक यूजर अभिजीत बरूआ ने लिखा है, 'असम का गौरव मेजर लीतुल गोगोई जिंदाबाद।' असम के बिजनेसमैन श्‍याम कानू महंता ने लिखा है, 'इस तरह की वीरता की उम्‍मीद सिर्फ बीर लाछित बोरफूकन के वशजों से ही की जा सकती है। मेजर गोगोई हमें आप पर गर्व है हमेशा ऐसे ही मान बढ़ाते रहिए।'

कौन थे बीर लाछित बोरफूकन

कौन थे बीर लाछित बोरफूकन

असम में कई लोगों ने अब यह फैसला किया है कि वह मेजर गोगोई को इनवाइट करेंगे और उनका सम्‍मान करेंगे। गोगोई अहोम समुदाय से आते हैं। यह एक ऐसा समुदाय है जिसने असम में सन 1824 में ब्रिटिश शासन के आने से पहले 600 वर्षों तक राज किया। बोरफूकन अहोम जनरल थे जिन्‍होंने मुगलों को सराईघाट के युद्ध में शिकस्‍त दी थी। यह युद्ध सन् 1671 में हुआ था।

मेजर बनने से पहले सेना में जवान थे गोगोई

मेजर बनने से पहले सेना में जवान थे गोगोई

मेजर गोगोई ने जब 18 वर्ष के थे तब वह एक जवान के तौर पर सेना का हिस्‍सा बने थे। नौ वर्ष बाद उन्‍होंने देहरादून स्थितत आर्मी कैडेट कॉलेज में हिस्‍सा लिया और ऑफिसर बने। दिसंबर 2008 में वह लेफ्टिनेंट के तौर पर सेना में कमीशंड हुए थे।

 माता-पिता को बेटे पर गर्व

माता-पिता को बेटे पर गर्व

मेजर गोगोई के पिता धर्मेश्‍वर गोगोई और मां स्‍वर्णलता गोगोई इस पूरे प्रकरण के बाद कुछ दिनों के लिए अकेला रहना चाहते हैं। उनका कहना है कि उनके बेटे ने अपनी ड्यूटी पूरी की जिसकी उम्‍मीद हर सैनिक से की जाती है। मेजर गोगोई को पिछले दिनों आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया है। उन्‍होंने भी इस मसले पर अपनी चुप्‍पी तोड़ी है और कहा है कि उन्‍होंने वही किया जो उन्‍हें सही लगा और उन्‍हें किसी बात का डर नहीं है।

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