Mahua Moitra: क्या विक्टिम कार्ड खेल रही हैं महुआ मोइत्रा? एथिक्स कमेटी की पावर पर पहले ही उठा चुकी हैं सवाल

Mahua Moitra News: टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा विपक्ष के उन नेताओं में शामिल हैं, जो केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई के खिलाफ उंगलियां उठाने में अगली कतार में खड़ी रहती हैं।

लेकिन, जब उनपर खुद संसद में सवाल पूछने के बदले कथित रूप से दुबई के एक बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी से रिश्वत और अन्य सुविधाएं लेने के आरोप लगे तो उन्हें ऐसी ही जांच एजेंसियों की कार्रवाई जंचने लगी है।

mahua moitra and victim card?

जांच से पहले ही एथिक्स कमेटी की शक्तियों पर उठाया था सवाल
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को जारी एक खत में ही तृणमूल सांसद ने एथिक्स कमेटी की शक्तियों पर सवाल उठा दिया था। महुआ मोइत्रा ने एथिक्स कमेटी में पेश होने से पहले ही इस चिट्ठी में कहा था, 'इसके पास क्रिमिनल ज्यूरिस्डिक्शन नहीं है और कथित क्रिमिनलिटी की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है।'

अचानक केंद्रीय जांच एजेंसियों से जांच की करने लगीं पैरवी!
मतलब, गुरुवार को जब महुआ लोकसभा की एथिक्स कमेटी के सामने संसद में सवाल पूछने के बदले में रिश्वत लेने के आरोपों में अपना पक्ष रखने के लिए पहुंचीं तो उससे पहले ही उनके मन में यह विचार आ चुका था कि उनपर लगे आरोपों की जांच के लिए संसद की यह समिति सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा था कि 'यह सिर्फ लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियां ही कर सकती हैं।'

आधे-अधूरे मन से एथिक्स कमेटी में पेश हुईं?
यानि गुरुवार को महुआ आधे-अधूरे मन से ही एथिक्स कमेटी के सामने तब हाजिर हुई थीं, जब कमेटी ने उन्हें इसके लिए और मोहलत देने से इनकार कर दिया था। शुरू में उन्होंने शनिवार तक के लिए समय मांगा था?

एथिक्स कमेटी के चेयरमैन पर लगाए बेहद गंभीर आरोप
और जब वह गुरुवार को पेश हुईं भी तो काफी नाराजगी की हालत में बैठक छोड़कर निकल आईं। बाद में स्पीकर ओम बिड़ला को लिखे खत में उन्होंने एथिक्स कमेटी के चेयरमैन विनोद सोनकर पर सदस्यों की चेतावनी के बावजूद 'निहायत ही निजी प्रश्न' पूछने का आरोप लगाया। उन्होंने समिति के अध्यक्ष पर कथित रूप से 'अनैतिक, घिनौना, अपमानजनक और पूर्वाग्रहपूर्ण व्यवहार' का आरोप लगाया। यहां तक दावा किया कि उन्हें समिति के अन्य सदस्यों की मौजूदगी में 'वस्त्रहरण' वाली कहावत' का सामना करना पड़ा।

महुआ के आरोपों को एथिक्स कमेटी चेयरमैन कर चुके हैं खारिज
जबकि, विनोद सोनकर जो कि बीजेपी के सांसद हैं, उन्होंने महुआ के आरोपों का न सिर्फ खंडन किया है, बल्कि कहा है कि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया और सवालों का 'जवाब टालने की कोशिश' की और उत्तर देने की जगह क्रोधित हो गईं।

महुआ पर लगा है चेयरमैन के खिलाफ असंसदीय भाषा के इस्तेमाल का आरोप
यही नहीं, उन्होंने कहा है कि तृणमूल सांसद ने उनके और अन्य सदस्यों के खिलाफ असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया, जिसकी पुष्टि भाजपा की महिला सांसद अपराजिता सारंगी भी मीडिया से बातचीत में कर चुकी हैं।

क्या विक्टिम कार्ड खेल रही हैं महुआ मोइत्रा?
महुआ मोइत्रा के खिलाफ यह मामला झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की शिकायत पर सामने आया है और उन्हीं के आरोपों के तहत जांच चल रही है। एथिक्स कमेटी में महुआ आरोपी के तौर पर तो दुबे गवाह के रूप में मौजूद थे। दुबे ने एक्स (ट्विटर) पर कहा है कि संसदीय कार्यवाही की तरह इसकी समितियों में भी बहस का पूरा रिकॉर्ड दर्ज होता है।

उन्होंने विपक्षी सांसदों के आरोपों पर चुनौती देते हुए लिखा है, '.....जानकारी के लिए संसद की तरह ही संसदीय कमेटी में भी डिबेट शब्दशः लिखा जाता है....कांग्रेस-जेडीयू के सांसदों में यदि हिम्मत है तो डिबेट की कॉपी दिखाएं । महिला के विक्टिम कार्ड के चक्कर में इतने ओछे नहीं बनिए दानिश.....' उन्होंने अपने दावे गलत साबित होने पर राजनीति से संन्यास लेने की भी बात कही है।

समिति के कई सदस्यों ने महुआ के आरोपों को नकारा
दरअसल, महुआ के साथ विपक्ष के कुछ सांसद भी समिति की बैठक छोड़कर निकल आए थे और चेयरमैन पर उनसे आपत्तिजनक प्रश्न पूछने का आरोपों में हां में हां मिला डाला था। लेकिन, स्वराज्यमार्ग ने समिति के एक भाजपा सांसद से जब चेयरमैन के खिलाफ विपक्ष के आरोपों को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा, 'चेयरमैन ने उनसे बहुत ही सम्माजनक तरीके से प्रश्न पूछे। उन्होंने पूछा कि हालिया वर्षों में वो कितनी बार (दुबई समेत, जहां के रहने वाले हैं बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी) विदेश गई हैं, वह कहां रुकीं और विदेश यात्राओं के लिए उनका खर्च किसने उठाया....'

कोई निजी सवाल नहीं पूछे- समिति के सदस्य
भाजपा सांसद ने नाम नहीं जाहिर होने की इच्छा जताते हुए कहा, 'उन्होंने (सोनकर) कोई निजी सवाल नहीं पूछे। पूछताछ का मकसद यह पता लगाने के लिए था कि क्या एक सांसद के रूप में मोइत्रा की ओर से सरकार से पूछे गए सवालों और हीरानंदानी से मिले 'गिफ्टों' के बीच कोई संबंध था।'

दरअसल, महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने दर्शन हीरानंदानी से रिश्वत और गिफ्ट लेकर अडाणी ग्रुप को लेकर संसद में सवाल पूछे, ताकि इस तरह से उद्योगपति गौतम अडाणी को टारगेट किया जा सके और खुद लाइम-लाइट में रह सकें। क्योंकि, विपक्ष लगातार आरोप लगाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अडाणी से कथित मित्रता होने की वजह से उनके कारोबार के हित वाले फैसले लेते रहे हैं। पिछले कई चुनावों से पीएम मोदी को निशाना बनाने के लिए विपक्ष का यह सबसे बड़ा चुनावी एजेंडा रहा है।

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