महुआ मोइत्रा की संसद सदस्यता गई तो उनके खिलाफ हो सकती है ये भी कार्रवाई, एथिक्स कमेटी ने की है सिफारिश

Mahua Moitra Expulsion: लोकसभा की एथिक्स कमेटी ने गुरुवार को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को सदन की सदस्यता से निष्कासित करने के लिए लोकसभा स्पीकर को सिफारिश की है।

लोकसभा की एथिक्स कमेटी में 15 सदस्य हैं, जिनमें से 4 के मुकाबले 6 सदस्यों ने उन्हें लोकसभा की सदस्यता से निष्कासित करने वाली समिति की रिपोर्ट पर अपनी मुहर लगाई है। द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट का समर्थन करने वालों में कांग्रेस सांसद परनीत कौर भी शामिल हैं, जिन्होंने इसके पक्ष में अपना वोट दिया है। विपक्ष के चार सांसदों ने इसकी रिपोर्ट से असहमति जताई है।

mahua moitra ethics panel

लोकसभा स्पीकर को करना है निष्कासन पर फैसला
महुआ मोइत्रा के निष्कासन पर अब फैसला लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को लेना है। वह चाहें तो एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट को सदन के सामने चर्चा के लिए भी रख सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक एथिक्स कमेटी ने महुआ को 'अनैतिक आचरण' का दोषी और लोकसभा के लॉग-इन डिटेल अनाधिकृत व्यक्ति से साझा करने को 'सदन की अवमानना' माना है।

लोकसभा के एथिक्स कमेटी के चेयरमैन और बीजेपी सांसद विनोद सोनकर ने रिपोर्ट की जानकारी देते हुए कहा, 'महुआ मोइत्रा के खिलाफ आरोपों पर एथिक्स कमेटी ने एक रिपोर्ट ड्राफ्ट की। आज की बैठक में रिपोर्ट ड्राफ्ट की गई। 6 सदस्यों ने रिपोर्ट का समर्थन किया, जबकि चार ने असहमति नोट दाखिल किए.....कल लोकसभा स्पीकर को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाएगी....जो भी कार्रवाई की जाएगी...वह स्पीकर द्वारा होगी.....'

'कड़ी सजा' देने की सिफारिश-रिपोर्ट
लेकिन, इस आधार पर अगर महुआ की संसद सदस्यता जाती है तो बात यहीं खत्म होते नजर नहीं आ रही है। क्योंकि, एथिक्स कमेटी ने उनको लेकर बहुत ही सख्त रुख अपना है। पैनल ने उनके रवैए को 'गंभीर दुराचार' मानते हुए 'कड़ी सजा' देने की सिफारिश की है।

समयबद्ध तरीके से संस्थागत जांच की सिफारिश
जानकारी के मुताबिक पैनल ने, 'अत्यधिक आपत्तिजनक, अनैतिक, जघन्य और आपराधिक आचरण को देखते हुए भारत सरकार की ओर से समयबद्ध तरीके से इसकी गहन, कानूनी, संस्थागत जांच की सिफारिश की है।'

महुआ के खिलाफ आगे एजेंसियो की ओर से जांच की जा सकती है
दरअसल, महुआ के खिलाफ अपना लोकसभा वाला लॉग-इन डिटेल जो अनाधिकृत व्यक्ति से साझा करने का आरोप है, इससे यह मामला बुहत ही संगीन हो गया है। क्योंकि, दावे के हिसाब से इसे कई बार विदेश से इस्तेमाल किया गया, इस वजह से यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बनता है।

भारत सरकार की एजेंसियों से समयबद्ध जांच इसी बात से संबंधित है। उधर उनके खिलाफ लोकपाल की ओर से सीबीआई जांच के आदेश की जानकारी पहले से ही आ रही है। अगर जांच में यह सब आरोप सही पाए गए हैं तो उनके खिलाफ आगे एफआईआर भी दर्ज हो सकती है।

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ यह जांच बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की लिखित शिकायत के आधार पर हुई है। उन्होंने महुआ के पुराने मित्र जय अनंत देहद्राई से मिली जानकारी के आधार पर उनपर संसद में सवाल पूछने के लिए रिश्वत और गिफ्ट लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

यह भी आरोप है कि उद्योगपति गौतम अडाणी के बिजनेस से जुड़े सवाल पूछने के लिए उन्होंने अपने लोकसभा के लॉग-इन डिटेल दुबई के कारोबारी दर्शन हीरानंदानी को दिए थे। पिछली बैठक में समिति दुबे, महुआ और देहद्राई का पक्ष सुन चुकी है। हालांकि, टीएमसी सांसद बीच में ही समिति के अध्यक्ष पर निजी सवाल पूछने का आरोप लगाते हुए तिलमिला कर बैठक का बायकॉट कर निकल आई थीं।

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