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शिवसेना की बीजेपी के सामने शर्त- 152 विधानसभा सीटें और सीएम पद दो!

By Yogender Kumar
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    मुंबई। बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह ने हाल में मातोश्री जाकर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ मुलाकात की। बीजेपी के 'संपर्क फॉर समर्थन' अभियान के तहत हुई इस मुलाकात के पहले और बाद में शिवसेना ने एक ही राग अलापा- हम 2019 में अकेले चुनाव लड़ेंगे। वैसे शिवसेना का यह स्‍टैंड कोई नया नहीं है, वह पहले भी ऐसे दावे करती रही है, लेकिन अंदर की खबर कुछ और है। टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अमित शाह के साथ बातचीत के दौरान उद्धव ठाकरे ने एक प्रस्‍ताव रखा। उन्‍होंने बीजेपी के सामने गठबंधन के लिए 'बड़े भाई' की भूमिका वाला फार्मूला भी पेश कर दिया है। फार्मूले के मुताबिक, शिवसेना अगले विधानसभा चुनाव में महाराष्‍ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से 152 पर चुनाव लड़ना चाहती है, जबकि बीजेपी समेत अन्‍य सहयोगियों के लिए 136 सीटें छोड़ने की बात कर रही है। शिवसेना ने सीएम पद भी अपने पास रखने की बात कही है। जहां तक लोकसभा चुनाव की बात है तो शिवसेना को 2014 का सीट बंटवारे का फार्मूला मानने में कोई गुरेज नहीं है। 2019 का रण बीजेपी के लिए बेहद अहम है, लेकिन शिवसेना के लिए यह अस्तित्‍व की लड़ाई है, क्‍योंकि 2019 में महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव भी होने हैं।

    उद्धव ठाकरे के लिए क्‍या हो सकता है बीजेपी का ऑफर

    उद्धव ठाकरे के लिए क्‍या हो सकता है बीजेपी का ऑफर

    सूत्रों के मुताबिक, मातोश्री में मुलाकात के दौरान उद्धव ठाकरे ने जब अमित शाह के सामने 15 सीटें शिवसेना को देने का प्रस्‍ताव रखा तो जवाब में बीजेपी अध्‍यक्ष ने कहा कि वह दोबारा उनसे मिलने आएंगे और सीट शेयरिंग फार्मूले पर चर्चा करेंगे। इधर, बीजेपी में चर्चा गर्म है कि अगर समझौता होता है तो शिवसेना को 130 से ज्‍यादा विधानसभा सीटें नहीं दी जानी चाहिए। इसके साथ ही सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं अमित शाह ने महाराष्‍ट्र के शीर्ष नेताओं को 2019 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहने को कहा है। बीजेपी के रणनीतिकार यह मानकर चल रहे हैं कि शिवसेना के साथ सीट शेयरिंग पर समझौता होना मुश्किल है। शिवसेना के एक वरिष्‍ठ नेता कहा कि उद्धव ठाकरे बीजेपी के साथ तभी गठबंधन करेंगे, जब उन्‍हें 152 विधानसभा सीटें दी जाएंगी।

    सीट बंटवारे की असल हकीकत आखिर है क्‍या

    सीट बंटवारे की असल हकीकत आखिर है क्‍या

    2014 में 26 लोकसभा सीटों पर बीजेपी और शिवसेना 22 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। बीजेपी 26 लोकसभा सीटों में से 23 पर जीतने में सफल रही थी, जबकि शिवसेना 22 में से 18 सीटें जीती थी। इसके बाद विधानसभा चुनाव आए तो दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा नहीं हो सका और बीजेपी-शिवसेना ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। शिवसेना ने 2014 लोकसभा चुनाव में 282 सीटों पर उम्‍मीदवार उतारे थे, जबकि उसे जीत सिर्फ 62 सीटों पर ही मिल सकी थी। दूसरी ओर बीजेपी ने 260 सीटों पर उम्‍मीदवार उतारे और वह 122 सीटों जीतने में सफल रही थी। 2014 के इन नतीजों की वजह से ही शिवसेना बैकफुट पर आ गई और बीजेपी महाराष्‍ट्र में बड़ा भाई बनकर बर्ताव करने लगी। वैसे 1990 का एक जमाना वह भी था बाला साहेब ठाकरे का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलता था। उस समय बीजेपी 117 सीटों पर जबकि शिवसेना 171 सीटों पर चुनाव लड़ा करती थी।

    शिवसेना के लिए चुनाव में अकेले जाना साबित होगा घाटे का सौदा

    शिवसेना के लिए चुनाव में अकेले जाना साबित होगा घाटे का सौदा

    महाराष्‍ट्र में बीजेपी के साथ बरसों से गठबंधन धर्म निभा रही शिवसेना क्‍या अकेले सत्‍ता की सीढ़ी चढ़ने का दम रखती भी है? शिवसेना के ही कई नेता यह मानने को तैयार नहीं हैं। उन्‍हें डर है कि अगर 2019 लोकसभा चुनाव में एनडीए की सत्‍ता में वापसी हो गई तो जाहिर है महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी को इसका फायदा होगा। ऐसी स्थिति में शिवसेना अलग-थलग पड़ जाएगी, क्‍योंकि बीजेपी चाहे तो उसे एनसीपी का समर्थन मिल सकता है, लेकिन महाराष्‍ट्र में शिवसेना को बीजेपी के अलावा किसी और दल का साथ मिल पाना नामुमकिन होगा।

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    English summary
    Maharashtra poll tie-up: Uddhav Thackeray seeks to fight 152 seats, wants Sena CM.

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