Maharashtra govt formation issue: शिवसेना और कांग्रेस पहले भी रह चुके हैं साथ-साथ, जानिए दिलचस्प इतिहास

मुंबई। महाराष्ट्र में सीएम पद को लेकर लगातार भाजपा और शिवसेना में रस्साकशी जारी है, तो वहीं कयासों का दौर भी जारी है, बीजेपी-शिवसेना में मुख्यमंत्री पद को लेकर अभी तक कोई समझौता नहीं हो पाया है। इसी बीच एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने सोमवार को सोनिया गांधी से महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर अहम बैठक की। बैठक के बाद पवार ने पत्रकारों से कहा कि महाराष्ट्र की जनता बीजेपी के खिलाफ है पर सरकार बनाने के लिए नंबर हमारे पास नहीं है, जिनके पास नंबर है, वे सरकार बनाने के लिए जिम्मेदार हैं।

पहले भी हो चुका है शिवसेना और कांग्रेस का साथ

पहले भी हो चुका है शिवसेना और कांग्रेस का साथ

हालांकि शिवसेना के तेवर देखकर लग रहा है कि वो सरकार बनाने के लिए एनसीपी और कांग्रेस के साथ जा सकती है, वरना संजय राउत अपने पास 170 से 175 विधायकों के साथ होने का दावा नहीं करते हैं। कहते है ना राजनीति की बिसात पर सबकुछ जायज है और कोई भी कभी भी किसी का साथी बन सकता है इसलिए यहां कभी भी कुछ भी हो सकता है। अगर दावपेंच के बीच दो वैचारिक मतभेद वाले दल यानी कि कांग्रेस और शिवसेना साथ में आते हैं तो किसी को अचरज नहीं होना चाहिए।

बालासाहेब ठाकरे ने इंदिरा गांधी के आपतकाल को सपोर्ट किया था

बालासाहेब ठाकरे ने इंदिरा गांधी के आपतकाल को सपोर्ट किया था

क्योंकि ये पहली बार नहीं होगा, इससे पहले भी महाराष्ट्र इन दोनों दलों के साथ आने का गवाह बन चुका है, दरअसल साल 1975 में बालासाहेब ठाकरे ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का सपोर्ट किया था, ये उस समय एक घोर अचरज की बात थी क्योंकि ठाकरे की छवि एक कट्टर कांग्रेस विरोधी दल की थी, उन्होंने कांग्रेस के विरोध में ही साल 1966 में शिवसेना की स्थापना की थी लेकिन जब इंदिरा गांधी को आपातकाल और साल 1977 के चुनाव में ठाकरे ने सपोर्ट किया तो हर कोई हैरान रह गया।

1978 के चुनावों में शिवसेना को भुगतना पड़ा था खामियाजा

1978 के चुनावों में शिवसेना को भुगतना पड़ा था खामियाजा

इससे पहले ठाकरे ने अपने कार्टूनों के माध्यम से इंदिरा गांधी और उनकी नीतियों पर जमकर निशाना साधा था लेकिन राजनीति के मंच पर उन्होंने इंदिरा गांधी को अपना समर्थन दिया था, हालांकि शिवसेना का ये कदम उसके समर्थकों को रास नहीं आया था और 1978 के विधानसभा चुनाव और बीएमसी चुनाव में शिवसेना को मुंह की खानी पड़ी थी। हालांकि इसके बाद शिवसेना की राहें अलग हो गईं।

कुछ भी हो सकता है....

कुछ भी हो सकता है....

लेकिन 1980 में भी शिवसेना ने कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में समर्थन किया था, तब भी लोग हैरान रह गए थे, यही नहीं बालासाहेब ने प्रतिभा पाटिल और प्रणव मुखर्जी दो कांग्रेसी उम्मीदवारों का राष्ट्रपति चुनाव के लिए समर्थन किया था, इसलिए अगर आज शिवसेना औऱ कांग्रेस साथ में आते हैं तो कोई नई बात नहीं होगी, फिलहाल तो खींचतान जारी है, देखते हैं महाराष्ट्र के सीएम की कुर्सी किसको नसीब होती है।

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