कौन हैं रवींद्र धंगेकर जिन्होंने ढा दिया भाजपा का सबसे मज़बूत क़िला? जानिए उनके बारे में ख़ास
कांग्रेस ने चुनावी समीकऱण देखते हुए धंगेकर को टिकट दिया। वहीं भाजपा ने ओबीसी समुदाय से ही चुनावी मैदान में प्रत्याशी को उतारा। कांग्रेस की तरफ से रवींद्र धंगेकर गठबंधन के उम्मीदवार बने और इसका फायदा मिला।

Maharashtra Bypoll Result: महाराष्ट्र उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को ज़ोरदार झटका दिया है। कांग्रेस उम्मीदवार रवींद्र धंगेकर ने उपचुनाव में जीत हासिल कर भाजपा के सबसे मज़बूत किले को ढा दिया है। भारतीय जनता पार्टी के गढ़ में कान्ग्रेस का परचम बुलंद होना बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन ने पुणे की कस्बा- चिचवाड़ सीट पर सत्तारूढ़ गठबंधन दल भाजपा-शिवसेना को ज़ोरदार झटका दिया है। कांग्रेस उम्मीदवार रवींद्र धंगेकर ने 10 हज़ार से ज्यादा मतों से भाजपा उम्मीदवार हेमंत रसाने को शिकस्त दी है। कांग्रेस उम्मीदवार रवींद्र धंगेकर को 72 हज़ार 599 वोट मिले, वहीं भाजपा उम्मीदवार हेमंत रसाने को 61 हज़ार 771 वोट मिले।
उपचुनाव में जीत हासिल करने के बाद रवींद्र धंगेकर ने मतदाताओं का शुक्रिया अदा किया, उन्होंने कहा कि 'यह मतदाताओं की जीत है, क्योंकि उन्होंने ही मुझे जिताने की जिम्मेदारी ली थी। मैं निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के लिए कड़ी मेहनत करूंगा और मतदाताओं के भरोसे पर खरा उतरूंगा। आपको बता दें कि बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र की दो विधानसभा कस्बा और पिंपरी-चिंचवड में उपचुनावों का परिणाम आया। भाजपा विधायक मुक्ता तिलक और लक्ष्मण जगताप की मौत के बाद यह दोनों सीटें खाली हुई थी। 26 फरवरी को इन दोनों सीटों पर उपचुनाव हुआ था। आइए जानते हैं कि रवींद्प धंगेकर कौन हैं, जिन्होंने भाजपा का सबसे मज़बूत किले पर क़ब्ज़ा जमाया है।
रवींद्र धंगेकर बहुत ही साधारण ज़िंदगी बिताने वाले नेताओं में शुमार किए जाते हैं। कांग्रेस के ज़ंमीनी कार्यकर्ता से उन्होंने विधायक तक का सफर तय किया है। कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की तरफ से उन्होंने चुनावी बिगुल फूंका था। पहले वह शिवसेना से जुड़े हुए थे, बाद में उन्होंने राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस का दामन थामा, वह ठाकरे के बहुत ही करीबी माने जाते थे। मनसे में उन्होंने चार बार नगरसेवक की ज़िम्मेदारी संभाली। साल 2009 में उन्होंने एमएनएस की टिकट पर विधानसभा चुनाव में दांव आज़माया था, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। 2014 के विधानसभा चुनाव में दोबारा चुनावी दंगल में उतरे लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का रुख किया लेकिन 2019 के चुनाव में कांग्रेस की तरफ से टिकट के दावेदार नहीं बन पाए।
OBC समुदाय से ताल्लुक रखने वाले रवींद्र धंगेकर मौके का इंतज़ार करते रहे। कस्बा की सीट ब्राह्मण उम्मीदवारों क टिकट मिलता रहा। ब्राह्मण समाज का 30 फीसदी वोट होने की वजह से यहां से ब्राह्मणों को टिकट दिया जाता था। हालांकि ब्राह्मण समाज के अलावा कस्बा सीट पर ओबीसी और मराठा मतदाताओं की भी तादा अच्छी है। कांग्रेस ने चुनावी समीकऱण देखते हुए धंगेकर को टिकट दिया। वहीं भाजपा ने ओबीसी समुदाय से ही चुनावी मैदान में प्रत्याशी को उतारा। कांग्रेस की तरफ से रवींद्र धंगेकर गठबंधन के उम्मीदवार बने और इसका फायदा मिला। नतीजा यह हुआ कि धंगेकर ने भाजपा के गढ़ में ही उनके प्रत्याशी को मात दी।
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