महाराष्ट्र: करीब 12 BJP विधायक और एक सांसद MVA के संपर्क में, छोड़ सकते हैं पार्टी?
नई दिल्ली- राजनीति के गलियारों में भाजपा का ऑपरेशन 'लोटस' बहुत ही चर्चित है। कहा जाता है कि इसके तहत पार्टी दूसरे दलों के विधायकों और सांसदों को पहले इस्तीफा दिलवाकर अपनी पार्टी में शामिल करा लेती है और फिर उन्हें 'लोटस' सिंबल पर उपचुनाव में उतार देती है। लेकिन, लगता है कि बीजेपी का यही तरीका अब कहीं महाराष्ट्र में उसपर भारी न पड़ जाए। ऐसी आशंका से इनकार करना इसलिए मुश्लिक है, क्योंकि तथ्य ये है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कई नेता एनसीपी और कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल हुए हैं और चुनाव जीत भी चुके हैं। दरअसल, ऐसी खबरे आ रही हैं कि प्रदेश में बदले सियासी समीकरण में करीब एक दर्जन भाजपा विधायक और एक राज्यसभा सांसद सत्ताधारी महाराष्ट्र विकास अघाड़ी के नेताओं के संपर्क में हैं और इशारा मिलते ही बीजेपी को टाटा बोल सकते हैं।
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एक दर्जन भाजपा विधायक सत्ताधारी गठबंधन के संपर्क में
जानकारी के मुताबिक भाजपा के जो एमएलए सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं के संपर्क में हैं उनमें से ज्यादातर विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ही बीजेपी में शामिल हुए थे। ईटी की एक खबर के मुताबिक भाजपा विधायकों से बातचीच में शामिल महाराष्ट्र विकास अघाड़ी के सूत्रों ने बताया है कि बगावत पर तुले कुछ विधायक वैसे भी हैं, जो अपनी-अपनी वजहों से पार्टी से नाराज चल रहे हैं। जानकारी के मुताबिक पाला बदलने को तैयार बैठे सभी विधायकों ने सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं से कहा है कि वह अपनी विधायकी छोड़कर सत्ताधारी पार्टियों की टिकट पर चुनाव लड़ने को तैयार हैं। खबरों के मुताबिक चुनाव के दौरान जो नेता एनसीपी-कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में गए थे, उनका राज्य के एजुकेशन और सुगर मिल सेक्टर में बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है और सिर्फ सरकारी एजेंसियों के भय से ही उन्होंने तब पार्टियां छोड़ी थीं। लेकिन, जब अब सरकार बदल चुकी है तो उनका हित अघाड़ी के साथ रहकर सध सकता है।

बीजेपी के तरीके से ही मात देने की चाल?
अब सवाल है कि बीजेपी ने कुछ राज्यों में जिस तरह से दूसरी पार्टी के नेताओं पर डोरे डाले हैं, कहीं महाराष्ट्र में वही तरीका उसपर भारी तो नहीं पड़ने वाला है। महाराष्ट्र विकास अघाड़ी के एक नेता ने कहा भी है कि, 'भाजपा नेतृत्व ने पहले से यह तरीका बना रखा है कि अलग-अलग राज्यों में और राज्यसभा में विपक्षी विधायकों-सांसदों को इस्तीफा दिलाकर 'कमल' निशान पर उप चुनाव लड़वा दो। इसी से प्रभावित होकर करीब एक दर्जन बीजेपी एमएलए और एक राज्यसभा सदस्य हमसे बातचीत कर रहे हैं। वह इस्तीफा देने और उपचुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। उनके अगले कदम को लेकर हम उनके साथ गंभीरता से चर्चा कर रहे हैं। ' एक और नेता ने कहा कि, 'वो हमारी लीडरशिप की ओर से हरी झंडी मिलने के इंतजार में हैं। नागपुर में महाराष्ट्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बाद यह मामला ज्यादा तेजी से आगे बढ़ेगा।'

विश्वासमत से इसी डर से वॉयकॉट कर गई थी बीजेपी ?
जानकारी के मुताबिक बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में बीजेपी से बगावत पर तुले ज्यादातर विधायक वापस एनसीपी में शामिल होना चाहते हैं, जबकि बाकी कांग्रेस में वापस जाना चाहते हैं। वहीं बाकी बचे विधायक अब शिवसेना में अपनी जगह तलाश रहे हैं। इन विधायकों ने पिछले चुनाव में एनसीपी और कांग्रेस के प्रत्याशियों को ही हराया है, पर अब वे सोच रहे हैं कि समीकरण बदल चुके हैं और अगर एनसीपी-कांग्रेस और शिवसेना के वोट उनके पक्ष में पड़ गए तो वह अपनी सीट निकाल ही लेंगे। अघाड़ी के नेताओं का दावा है कि ऐसे ही विधायकों के डर से बीजेपी ने विश्वास मत से वॉकआउट किया था और स्पीकर के चुनाव में अपना उम्मीदवार वापस ले लिया था। एक नेता ने कहा, 'बीजेपी विधायकों के बीच हमारे कई अदृश्य मित्र हैं।.....'

एनसीपी पहले ही दे चुकी है धमकी
महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसी खबरें तब सामने आ रही हैं, जब ऐसी बातें कही जा रही थीं कि टिकट काटे जाने से नाराज बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर पार्टी से मोहभंग होने के संकेत दिए थे और पार्टी छोड़ने तक की धमकी दी थी। यही नहीं, एनसीपी नेता नवाब मलिक ने भी कहा था कि अगर शरद पवार चाहें तो भाजपा के 70 विधायकों को भी तोड़ सकते हैं, क्योंकि ज्यादातर लोग कांग्रेस-एनसीपी छोड़कर ही बीजेपी में गए हैं। बीजेपी के लिए महाराष्ट्र से ऐसी खबरें तब आ रही हैं, जब शिवसेना नेता संजय राउत खुलेआम कह चुके हैं कि उनकी पार्टी गोवा में भी बीजेपी की सरकार को गिरा सकती है।
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