2 मिनट की मैगी पर बैन से लाखों लाइफ पर 'लाइफ टाइम' बैड इफेक्ट

नयी दिल्ली। जिस मैगी को लेकर आज भारत में इतना बवाल मचा है वो आज का नहीं है। 1982 में बारत के बाजार में आया मैगी भले आज लोगों की नजरों में गिर गया हो, लेकिन लाखों लोगों की जिंदगियों को इनसे संवारा भी। ये मैगी लाखों लोगों की जीविका का सहारा रही है, लेकिन इसपर लगे बैन ने अब इसकी जिंदगी पर ग्रहण लगा दी है।

maggi

बस दो मिनट मैगी नूडल्स का क्रेज बीते कुछ सालों में इतना अधिक बढ़ा कि दुकानदारों के रोजगार का साधन बन गया। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की मसूरी रोड पर दुकानें खुलीं और मैगी मिलने के कारण जगह मैगी प्वाइंट के नाम से मशहूर हो गई। यहां मैगी खाने वालों की भीड़ रहती है, लेकिन आज ये जगह सूना पड़ा है।

कौन हैं वी के पांडे? मैगी वाली नेस्ले कंपनी को धूल में मिलाया

मैगी पर लगे बैन ने मैगी प्वाइंट के दुकानदारों का व्यवसाय भी डगमगाने लगा है। जिस मैगी से कई परिवार की गुजर बसर हो रहा था। आज वो अपने भविष्य को लेकर संशय में है। जिन मैगी प्वाइंट पर 150-200 लोग हर रोज पहुंच रहे थे वहां आज 30-40 लोग भी मिल जाए तो दुकानदार अपनी नसीब अच्छा मान रहे है। ऐसे में उन्हें अब अपनी जीविका को लेकर भय लगा हुआ है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के टॉम अंकल भी अपने गिरती कमाई को लेकर चिंतित है। मैगी की प्रतिष्ठा पर सवाल उठने से टॉम अंकल बेहद परेशान है। 1995 से दिल्ली विश्वविद्यालय में मैगी के बेहतरीन स्वाद के बूते एक अलग पहचान कायम करने वाले टॉम अंकल की कमाई 70 फीसदी तक गिर गई है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि मैगी पर बैन ने लाखों लोगों की जिंदगियों में अंधकार भर दिया है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+