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पत्नी खाने में हर रोज खिलाती है तीनों टाइम सिर्फ मैगी, परेशानी पति ने लिया Divorce

पत्नी खाने में हर रोज खिलाती है तीनों टाइम सिर्फ मैगी, परेशानी पति ने लिया Divorce

नई दिल्ली, 31 मई: आपने मैगी तो खाई ही होगी, बच्चों से लेकर बड़े तक सभी मैगी के दिवाने है। लेकिन आपने कभी सुना है कि किसी का तलाक मैगी की वजह से हुआ हो? नहीं ना, लेकिन कर्नाटक के बेल्लारी में ऐसा ही एक अजीबोगरीब मामला सामने आया था। यहां पति-पत्नी के बीच तलाक की वजह मैगी बन गई। दरअसल, यहां एक पत्नी अपने पति को हर रोज सुबह नाश्ते में, दोपहर के भोजन में और रात के डिनर में सिर्फ और सिर्फ मैगी बनाकर देती थी।

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    पत्नी को नहीं आता खाना बनाना

    पत्नी को नहीं आता खाना बनाना

    तीन टाइम मैगी खा खाकर पति का दिमाग पक गया और उसने कोर्ट में तलाक की अर्जी दे दी। पति ने बताया कि उसकी पत्नी को खाना बनाना नहीं आता और न ही वो सीखना चाहती। वह सिर्फ मैगी बनाना जानती है। पति की पीड़ा सुनकर कोर्ट ने भी दोनों पति-पत्नी की आपसी रजामंदी से तलाक की अर्जी को स्वीकार कर लिया। इस संबंध में सत्र न्यायालय में न्यायधीश रहे एमएल रघुनाथ ने शुक्रवार को मैट्रीमोनियल केसेज़ पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया।

    मैगी ही लाती है खरीदकर

    मैगी ही लाती है खरीदकर

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जज एम एल रघुनाथ ने बताया कि 'एक पति ने कोर्ट में इस आधार पर तलाक की अर्जी दे दी कि उसकी पत्नी सिर्फ मैगी बनाना जानती है। वह नाश्ते में, दोपहर के भोजन और रात के खाने के लिए नूडल्स बनाती है। यहां तक कि वो प्रोविजन स्टोर से भी केवल और केवल इंस्टेंट नूडल्स ही खरीदकर लाती है। जज रघुनाथ ने बताया कि इस केस को "मैगी केस" का नाम दिया गया था। उन्होंने कहा कि आखिरकार आपसी सहमति से दोनों का तलाक हो गया।

    यह अजीबोगरीब वजह भी बताई

    यह अजीबोगरीब वजह भी बताई

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस एम एल रघुनाथ ने बताया कि इन दिनों छोटी-छोटी बातों पर तलाक की अर्जी डाली जा रही है। शादी के कुछ ही दिनों बाद आपसी तालमेल की कमी के चलते लोग तलाक की अर्जी डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि थाली में गलत जगह नमक डाल देने या शादी के सूट का रंग पसंद नहीं आने के आधार पर भी लोगों ने तलाक की अर्जी दाखिल की है। जस्टिस रघुनाथ ने कहा कि तलाक के मामलों में जो अर्जी दी जा रही है उसमें अरेंज और लव मैरेज दोनों के समान मामले हैं।

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