रसना और कैडबरी की तरह मैगी की ‘कमबैक’ संभव
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) नेस्ले की मैगी पर बैन लग चुका है। इसे फूड डिपार्टमेंट खाने के लायक नहीं मानता। पर ये फिर से बाजार में अपनी धाक जमा सकती है। इस बात को नकारा नहीं जा सकता। अगर गुजरे दौर के कुछ उदाहरणों को देखें तो साफ हो जाएगा कि नेस्ले की मैगी भी बाजार में कमबैक कर सकती है।
कड़वा रसना
मैगी के 5 हजार करोड़ के बाजार पर रामदेव की नजरें
जानकारों को याद है जब 90 के दशक के शुरू में कोल्ड ड्रिंक रसना को पीने लायक नहीं माना गया था। आरोप थे कि इसमें कुछ इस तरह के पदार्थ मिला दिए जाते हैं जिसके चलते इसका सेवन करना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
सुधरा रसना
जानकारों ने बताया कि रसना बनाने वाली कंपनी ने अपने प्रोड्क्ट में सुधार किया। उसकी क्वालिटी को सुधारा। नतीजा ये है कि अब रसना बाजार में फिर से मजबूत स्थिति में है। अब यह अपने सेगमेंट में बड़े ब्रांड के रूप में जगह बना चुका है।
धड़ाम से गिरा धारा
इसके बाद 1997 में खाने के तेल धारा पर भी संकट के बादल छाए थे। तब इस पर आरोप था कि इसमें जहरीले पदार्थ होते हैं। इसके चलते धारा की सेल बहुत गिर गई थी। ग्राहकों ने इसे लेने से मना कर दिया था। पर धारा का उत्पादन करने वाली कंपनी नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड ने तमाम आरोपों का जवाब दिया। उन कमियों को दूर किया जिसके चलते इस पर बैन लगा था। अब तो धारा अपने सेगमेंट का बड़ा और विश्वसनीय नाम है। अब धारा ब्रांड मदर डेयरी के पास है।
ताजा आंकड़ों पर गौर करें तो हर साल इसका 350 करोड़ का टर्नओवर है। कैडबरी डेयरी मिल्क के चाकलेट उत्पादों पर साल 2003 में संकट आ गया था। आरोप था कि उनमें कीड़े पाए गए। तगड़ा हंगामा हुआ। अब सब कुछ सामान्य है। जानकारों का कहना है कि भारत में आमतौर पर खाने-पीने की चीजों पर ही विवाद खड़े होते हैं। अगर कंपनियां अपने उत्पादों में सुधार कर लें तो वे फिर से बाजार में छा सकते हैं। इसलिए नेस्ले की मैगी भी कमबैक कर सकती है।













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