तमिलनाडु के इस गांव में 18 महिलाओं के साथ हुआ था रेप, अब हाई कोर्ट ने पुलिस समेत 215 अफसरों को भेजा जेल
मद्रास हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 18 महिलाओं के साथ हुए रेप और अत्याचार के मामले में पुलिस समेत 215 अफसरों को जेल की सजा सुनाई है। मद्रास हाई कोर्ट ने शुक्रवार (29 सितंबर) को सभी अपीलों को खारिज कर दिया और एक सत्र अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए 1992 के मामले में ये फैसला सुनाया है।
मद्रास उच्च न्यायालय ने 215 लोगों को जेल की सजा सुनाई है। इन 215 लोगों में वन, पुलिस और राजस्व विभागों के अधिकारी शामिल हैं। इन अधिकारियों पर 1992 में चंदन की तस्करी के दौरान तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले के एक आदिवासी गांव वाचथी में 18 महिलाओं के साथ रेप और अत्याचार का दोष साबित हुआ है।

न्यायमूर्ति पी वेलमुरुगन ने अपने आदेश में कहा, "इस अदालत ने पाया है कि सभी पीड़ितों और अभियोजन पक्ष के गवाहों के साक्ष्य ठोस और सुसंगत हैं और उनपर पूरी तरह भरोसा किया जा सकता है। अभियोजन पक्ष ने अपने साक्ष्य के माध्यम से अपना आरोप और मामला साबित कर दिया है।''
जानिए 20 जून, 1992 को 18 महिलाओं के साथ तमिलनाडु के गांव में क्या हुआ था...?
18 महिलाओं के साथ रेप और अत्याचार की ये घटना 20 जून 1992 को की है। ये घटना तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले के एक आदिवासी गांव वाचथी में हुई थी।
20 जून 1992 को अधिकारियों ने तस्करी के चंदन की लकड़ी की तलाश में वाचाथी गांव में छापेमारी की थी। इस छापेमारी के दौरान 18 महिलाओं के साथ अधिकारियों ने बलात्कार किया था। इतना ही नहीं, इस छापेमारी में संपत्ति और पशुधन का भी व्यापक विनाश हुआ था।
2011 में धर्मपुरी की एक सत्र अदालत ने मामले के सिलसिले में 126 वन कर्मियों को दोषी ठहराया, जिनमें चार भारतीय वन सेवा अधिकारी, 84 पुलिसकर्मी और पांच राजस्व विभाग के अधिकारी शामिल थे। 269 आरोपियों में से 54 की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई और शेष 215 को 1 से 10 साल तक जेल की सजा सुनाई गई थी। इसी सजा को अब मद्रास हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा है।












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