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मध्‍य प्रदेश: टिकट के दावेदारों से जाति के आधार पर बॉन्‍ड भरवाकर फंड जुटा रहीं मायावती

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    भोपाल। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई हैं। न्‍यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, मायावती ने मध्‍य प्रदेश में चुनाव लड़ने के लिए आवेदन करने वाले लोगों के लिए जाति के आधार पर फीस निर्धारित कर दी है। फंड जुटाने के लिए दावेदारों से बॉन्‍ड भरवाने का मायावती का यह तरीका कारगर साबित होता दिख भी रहा है। एमपी में टिकट पाने के लिए बसपा के पास अब तक 300 आवेदन आ भी चुके हैं। मायावती ने एससी-एसटी, ओबीसी और जनरल कैटेगरी के हिसाब से आवेदन करने वालों के लिए राशि तय की है।

    मध्‍य प्रदेश: टिकट के दावेदारों से जाति के आधार पर बॉन्‍ड भरवाकर फंड जुटा रहीं मायावती

    जानकारी के मुताबिक, बसपा के पास टिकट पाने के लिए सबसे ज्यादा आवेदन रीवा, ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग से मिले हैं। मायावती ने एससी-एसटी वर्ग के दावेदारों से पांच हजार, ओबीसी वर्ग से दस हजार और जनरल कैटेगरी के लोगों से पंद्रह हजार रुपए का फंड पार्टी को देने के लिए निर्धारित किया है।

    मध्य प्रदेश में बसपा करीब 75 विधानसभा सीटों पर अच्‍छी स्थिति में होने का दावा कर रही है। बसपा की मध्य प्रदेश इकाई पार्टी मायावती को जल्‍द रिपोर्ट भी भेजने जा रही है, जिसके आधार पर ही बसपा सुप्रीमो टिकट बंटवारे के बारे में अंतिम फैसला ले सकती हैं।

    मध्‍य प्रदेश के 22 जिलों में बसपा का प्रभाव

    बसपा की मध्‍य प्रदेश में मजबूत स्थिति के पीछे सबसे अहम कारण है- एमपी में 15 प्रतिशत दलितों की मौजूदगी। कुल मिलाकर देखें तो राज्‍य के करीब 22 जिलों में बसपा का खास प्रभाव है। मध्य प्रदेश में बसपा का विंध्य, बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल संभाग में खासा प्रभाव है। 2013 के चुनाव में बसपा के खाते में चार सीटें आईं थीं। इसमें 62 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां बीएसपी को 10 हजार और 17 सीटों पर 30 हजार वोट प्राप्‍त हो सके थे। मध्य प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा को 6.29 फीसदी वोट मिले थे।

    मायावती रखती हैं एमपी चुनाव के समीकरण बदलने का दम

    मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस काफी समय से बसपा के साथ गठबंधन की आस लगा रही है, लेकिन मायावती ने अब तक उसे हरी झंडी नहीं दी हैं। मायावती एमपी बेहद प्रभावी साबित हो सकती हैं। मध्‍य प्रदेश में 2003 विधानसभा चुनाव से शुरुआत करते हैं, जो कि कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह के नेतृत्‍व में लड़ था।

    इस चुनाव में कांग्रेस 230 सीटों वाली विधानसभा चुनाव में केवल 38 सीटें जीत सकी थी। 2003 के इसी विधानसभा चुनाव में बसपा मात्र 2 सीटें जीत पाई थी, लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस 25 सीटें सिर्फ बसपा की वजह से हार गई थी। कुछ ऐसा ही बसपा के साथ भी हुआ था। इसी चुनाव में बसपा 14 सीटों पर सिर्फ इसलिए हार गई थी, क्‍योंकि कांग्रेस के साथ वोट बंट गए थे। अगर इन दोनों पार्टियों के नुकसान को जोड़ा जाए तो 25+14=39 सीटें बनती हैं।

    2008 में भी मायावती ने किया था कांग्रेस का खेल खराब

    बसपा मध्‍य प्रदेश में कोई बहुत बड़ी ताकत भले न हो, लेकिन हर चुनाव में वह 5 से 7 प्रतिशत वोट जरूर पाती है। 2008 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 2003 में 38 सीटें जीतने वाली कांग्रेस 2008 में 71 सीटों पर विजयी रही थी। वहीं, 2003 में 173 सीटें जीतने वाली बीजेपी 143 सीटों पर जीत के साथ सत्‍ता में लौटी थी। इस चुनाव में बसपा ने कांग्रेस को करीब 39 पर झटका दिया था, जबकि खुद बसपा को करीब 14 सीटें पर कांग्रेस की वजह से मात खानी पड़ी। अगर 71+39+14 को जोड़ दिया जाए तो आंकड़ा 131 पहुंच जाता है। मतलब बीजेपी की 143 सीटों के बेहद करीब।

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    English summary
    Madhya Pradesh Election 2018 : bsp supremo mayawati unique formula for raising party fund.

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