93000 पाक सैनिकों को घुटने टेकने पर मजबूर करने वाले हीरो थे लेफ्टिनेंट जनरल जैकब
नई दिल्ली। पाकिस्तान के खिलाफ वर्ष 1971 की जंग पाकिस्तान को धूल चटाने वाले हीरो लेफ्टिनेंड जनरल जेएफआर जैकब को देश ने आज भावभीनी श्रद्धांजलि दी। जैकब को पूरे सम्मान के साथ आज अंतिम विदायी दी गयी।

92 वर्ष की आयु में हुआ निधन
लेफ्टिनेंट जनरल जैकब 92 वर्ष के थे और उन्होंने पाक को 1971 के युद्ध में घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था। जैकब की अंतिम विदायी में लालकृष्ण आडवाणी सहित कई आला नेता पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर गहरा शोक जताया था।
पिता की इच्छा के विरुद्ध शामिल हुए सेना में
जैकब ने अपना जीवन अविवाहित ही गुजारा और उनका निधन बुधवार को सुबह सेना के अस्पताल में 8.30 बजे हुआ था। लेफ्टिनेंट जनरल जैकब का जन्म 1923 में बंगाल प्रेसिडेंसी में स्थित कलकत्ता में हुआ था। उन्होंने अपने पिता कि विरुद्ध ब्रिटिश भारतीय सेना में महज 19 वर्ष की आयु में भर्ती हो गये थे।
इराकी बगदादी यहूदी थे जैकब
लेफ्टिनेंट जनरल जैकब के पूर्वज इराक से आये बगदादी यहूदी थे और वह कलकत्ता में आकर बसे थे। लेफ्टिनेंट जनरल जैकब को 1971 में बांग्लादेश की आजादी का हीरो माना जाता है। बांग्लादेश के लोग भी जैकब को अपना हीरो मानते हैं। लेफ्टिनेंट जनरल जैकब ने युद्ध के दौरान 16 दिसंबर को ढाका के लिए उड़ान भरी और तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान के सैन्य कमांडर एएके नियाजी को समर्पण के लिए राजी करने में बड़ी सफलता पायी थी।
1971 के हीरो थे जैकब
पाकिस्तान की 93 हजार सेना सशस्त्र बल के साथ भारत के सामने आत्मसमर्पण करे लिए तैयार हुई थी। यह ऑपरेशन तीन दिन चलना था लेकिन लेफ्टिनेंट जनरल जैकब की काबिलियत के चलते यह ऑपरेशन दो ही दिन में खत्म हो गया था।
दूसरे विश्वयुद्ध में भी लिया था हिस्सा
लेफ्टिनेंट जनरल जैकब उस वक्त पूर्वी कमान के प्रमुख थे। वह 1978 में सेवानिवृत्त हुए थे और उन्होंने द्वीतिय विश्वयुद्ध और 1965 में भारत-पाक के युद्ध में शामिल थे। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें 1998 में गोवा का राज्यपाल भी बनाया गया था।












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