Exclusive: मुंबर्इ, बैंगलोर में कम वोटर टर्नआउट, सोशल मीडिया जिम्मेदार!

भारत में 16वीं लोकसभा के लिए चुनाव जारी हैं और इस बार चुनावों में यहां भी कहीं न कहीं सोशल मीडिया का वैसा ही दबदबा देखने को मिल रहा है जैसा वर्ष 2012 में अमेरिका में देखने को मिला था। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन की ओर से वर्ष 2013 में कराए गए एक सर्वे के नतीजों पर भरोसा करें तो चुनावों के नतीजों पर सोशल मीडिया का खासा असर देखने को मिलेगा।
कुछ हद तक होता है असर
इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कंसलटेंट रक्षित टंडन की मानें तो सोशल मीडिया वोटरों के निर्णयों को प्रभावित कर सकता है। रक्षित ने वनइंडिया हिंदी के साथ हुई एक खास बातचीत में बताया कि सारा दिन सोशल मीडिया पर किसी खास पॉलिटिकल पार्टीज की गतिविधियों पर यूजर्स नजर रखते हैं।
वह उनसे जुड़ी पोस्ट और फोटोग्राफ को शेयर करते हैं। ऐसे में कहीं न कहीं सोशल मीडिया उनके निर्णय को जरूर प्रभावित करता है। यह तय कर पाना कि सोशल मीडिया किस हद तक उनके निर्णय को प्रभावित करता है थोड़ा मुश्किल है लेकिन वोटर्स के दिमाग पर उसका असर काफी देर तक रहता है।
तो कम वोटिंग की वजह सोशल मीडिया
वर्ष 2012 में जब अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हुए थे तो राष्ट्रपति बराक ओबामा की सोशल मीडिया टीम हर पल ट्विटर और फेसबुक पर उनसे जुड़ी जानकारियां अपडेट करने में लगी हुई थी। इसके बावजूद उस वर्ष अमेरिका की आर्थिक राजधानी न्यूयॉर्क में सिर्फ 42 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। कुछ यही हाल इस बार देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का रहा है जहां पर सिर्फ 53 प्रतिशत वोटिंग ही दर्ज हो सकी।
रक्षित के मुताबिक आज फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्स एप, गूगल हैंगआउट फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्स एप, गूगल हैंगआउट यह कुछ ऐसे सोशल नेटवर्किंग प्लेटफार्म हैं जिन पर भारतीय यूजर की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। यूजर उनकी हर गतिविधि को करीब से देखता है और इस बात की संभावना है कि वह आखिरी पलों में अपना फैसला बदल दे।












Click it and Unblock the Notifications