हिंदी सम्‍मेलन में बोले मोदी, चाय बेचते-बेचते मैंने हिंदी सीख ली

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने गुरुवार को दसवें विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन का शुभारंभ किया। यह सम्‍मेलन तीन दिनों तक चलेगा। शुभारंभ अवसर पर नरेन्‍द्र मोदी ने लोगों को संबोधित किया और हिंदी भाषा की महत्‍ता के बारे में बताया। मोदी ने कहा कि मैं गुजराती हूं और मैंने चाय बेचते-बेचते हिंदी सीखी है। मोदी ने कहा कि हमारी भाषा की भक्ति एक्‍सक्‍लूसिव नहीं बल्‍कि इनक्‍लूसिव होनी चाहिए क्‍योंकि भाषा अपने आप में बहुत बड़ा बाजार है। पीएम मोदी ने कहा कि भाषा लुप्त होने पर उसकी कीमत पता चलती है और संकट पैदा होते हैं।

Prime Minister Narendra Modi
प्राणियों की तरह भाषा का मूल्य है, इसलिए विरासत को बचाना पीढ़ी का दायित्व है। पक्षी-पौधे की तरह भाषा को भी बचाएं। मोदी ने कहा कि जिस प्रकार से दुनिया तेजी से बदल रही है, 21वीं सदी का अंत होते-होते दुनिया की 6000 भाषाओं में से 90 फीसदी के लुप्त होने की संभावना जताई जा चुकी है। इसलिए हमें हिंदी के संरक्षण करना चाहिए और इसे समृद्ध बनाना चाहिए।

मोदी ने कहा कि डिजिटल वर्ल्ड में हिन्दी, चीनी और अंग्रेजी भाषाओं का दबदबा रहेगा। आने वाले समय में डिजिटल वर्ल्ड का महत्व होगा। टेक्नोलॉजी से जुड़े लोग सोचें कि कैसे हिन्दी को डिजिटल वर्ल्ड से जोड़ें। उन्‍होंने कहा दुनिया अब हमारी बात स्वीकारने को तैयार है।

पीएम ने कहा कि चीन में लोग हिन्दी में बात करते हैं। उज्बेकिस्तान में हिन्दी शब्दकोश बना हुआ है। गुजराती झगड़े में हिन्दी का इस्तेमाल करते हैं। मुंबई में रहने वाले ने यूपी के भैंसवाले से हिन्दी सीखी। उन्होंने कहा कि हिन्दी को दूसरी भाषाओं से तालमेल बढ़ाना होगा। दूर देश में हिन्दी भाषा का प्यार हम महसूस करते हैं।

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