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Lok Sabha Election 2024: क्या केरल में कांग्रेस के नक्शेकदम पर चलने को मजबूर हो गई बीजेपी?

Lok Sabha Election Kerala: बीजेपी इस बार केरल में इतिहास बदलने की उम्मीद से चुनाव मैदान में उतरी है। राज्य की 20 सीटों में से ज्यादातर पर एलडीएफ और यूडीएफ में ही एक तरह का 'दोस्ताना' (दोनों ही इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं) मुकाबला नजर आ रहा है। लेकिन, कुछ सीटों पर भाजपा को गंभीरता से लिया जा रहा है और इसके लिए उसने एक बदली हुई रणनीति भी अपनाई है।

इस दक्षिण भारतीय राज्य में भाजपा का आधार तैयार करने में उसके वैचारिक अगुवा संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने अहम भूमिका निभाई है। लेकिन, इस चुनाव में बीजेपी की ओर से संघ फ्रंट पर बैटिंग करता नजर नहीं आ रहा है। आम तौर पर चुनाव क्षेत्रों में आरएसएस की ओर से पार्टी के साथ तालमेल बिठाने के लिए 'समायोजक' नियुक्त करने की जो परंपरा रही है, वह भी केरल में उस हद तक नजर नहीं आ रहा है।

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राहुल के रोडशो से गायब रहे कांग्रेस-मुस्लिम लीग के झंडे
अभी हाल ही में जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी वायनाड में नामांकन दाखिल करने पहुंचे थे तो उनकी रैली से कांग्रेस और उसकी सहयोगी मुस्लिम लीग के झंडे संदेहास्पद रूप से गायब थे। तब ऐसे दावे सामने आए कि अगर कांग्रेस ऐसा करेगी तो बीजेपी को उत्तर भारत में मुस्लिम लीग के झंडे को पाकिस्तानी झंडे के रूप में प्रचारित करने का मौका मिल जाएगा, जिससे कांग्रेस की मुसीबत बढ़ सकती थी।

केरल में 'भगवा' झंडे और 'संघ' की सीधी भूमिका से परहेज!
इसी तरह टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक केरल में भाजपा के प्रचार अभियान के दौरान उस तरह से भगवा झंडे नहीं नजर आ रहे हैं और इस अभियान में संघ भी सामने से उस तरह नहीं नजर आ रहा है, जिस तरह से भाजपा को उसके कैडर किसी भी चुनाव में मदद करते नजर आते हैं।

संघ परिवार के सूत्रों का कहना है, 'इसका ये मतलब नहीं है कि आरएसएस को शांत कर दिया गया। आरएसएस बीजेपी को सहायता देने वाला प्रमुख स्रोत बना हुआ है। लेकिन, बीजेपी लीडरशिप का मानना ​​है कि आरएसएस की ज्यादा मौजूदगी, उसकी छाप और उस संगठन से जुड़े अन्य चीजें केरल के चुनावों में बीजेपी प्रत्याशियों को फायदा की जगह नुकसान ज्यादा पहुंचाते हैं। '

'बूथ-प्रबंधन में संघ के स्वयं सेवकों की रहेगी भूमिका'
संघ सूत्रों के मुताबिक राज्य में आरएसएस के स्वयं सेवकों से विशेष रूप से बूथ स्तर पर ही ध्यान देने को कहा गया है, जबकि अन्य जिम्मेदारियां जो सामने से नजर आती हैं, वे भाजपा के लोग ही संभाल रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और विकास पर फोकस रखने की रणनीति
गौर करने वाली बात है कि बीजेपी ने केरल में पिछले एक वर्ष से ईसाइयों के बीच संपर्क बढ़ाने पर काफी जोर दिया है। इसलिए पार्टी राज्य में विकास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर ही ज्यादा फोकस करना चाहती है। उदाहरण के लिए राजधानी तिरुवनंतपुरम में पार्टी के चुनाव अभियान के तरीके को लिया जा सकता है।

एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, 'राजीव चंद्रशेखर अपना अभियान कैसे चलाते हैं, अगर आप उसे देखें तो परविर्तन स्पष्ट नजर आता है। वह सिर्फ विकास की बात कर रहे हैं और पूरे प्रचार अभियान में आरएसएस की छाप नहीं है। हमें उम्मीद है कि इससे उम्मीदवारों की स्वीकार्यता बेहतर होगी।'

केरल में कट्टर हिंदुवादी छवि से दूरी!
कांग्रेस नेता शशि थरूर लगातार चौथी बार यहां मैदान में हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले में 66.46% हिंदू, 19.1% ईसाई और 13.72% मुसलमान हैं। भाजपा के रणनीतिकारों को लगता है कि कट्टर हिंदुत्ववादी छवि से दूरी बनाए रखने से यहां पार्टी को फायदा मिल सकता है।

एक राजनीतिक विश्लेषक जी गोपाकुमार के मुताबिक,'प्रचार अभियान में आरएसएस की सीधी मौजूदगी के विरोध में वोटरों के प्रतिकूल एकीकरण को मौका मिलता है। बीजेपी किस हद तक आरएसएस को दूर रखने में सफल होगी यह अनिश्चित है। लेकिन, जहां तक केरल का सवाल है तो यह ज्यादा वास्तविक दृष्टिकोण है।

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