अखिलेश से गठबंधन पर क्यों पत्ते नहीं खोल रहीं मायावती, सामने आई अंदर की वजह
यूपी में मायावती और अखिलेश के बीच होने वाले महागठबंधन को लेकर अब एक बड़ी खबर सामने आई है।
नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2019) के लिए यूपी में सपा (SP) और बसपा (BSP) के बीच बनने वाले महागठबंधन (Mahagathbandhan) में अब एक नया मोड़ आ गया है। बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) फिलहाल सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के साथ गठबंधन को लेकर अपने पत्ते नहीं खोल रही हैं। पहले खबर थी कि 15 जनवरी 2019 को मायावती के जन्मदिन पर दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा, लेकिन अब सूत्रों के हवाले से खबर है कि यह ऐलान अभी कुछ दिन और टलेगा। दोनों दलों की ओर से हाल ही में उस खबर का भी खंडन किया गया था, जिसमें सपा-बसपा और आरएलडी के बीच सीटों के बंटवारे की बात कही गई थी। आखिर क्यों मायावती सीटों के बंटवारे को लेकर अभी अपने पत्ते नहीं खोल रही हैं? इसके पीछे एक बड़ी वजह सामने आई है।

हवा का रुख भांपने में लगी हैं मायावती
सूत्रों की मानें तो बसपा सुप्रीमो मायावती फिलहाल सीट बंटवारे के फैसले को लेकर अभी कुछ दिन और रुकने के मूड में हैं। हालांकि सपा और बसपा खुलकर ऐलान कर चुके हैं कि 2019 का लोकसभा चुनाव (2019 Lok Sabha Elections) दोनों साथ मिलकर ही लड़ेंगे। दरअसल, इसके पीछे जो सबसे बड़ी वजह है, वो यह है कि मायावती अभी यूपी में सारे रास्ते खुले रखना चाहती हैं। जानकारों का कहना है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के दमदार प्रदर्शन के बाद मायावती अब यूपी में हवा का रुख भांपने में लगी हैं। दूसरी तरफ सपा भी मायावती के बिना कोई कदम उठाना नहीं चाहती। यही वजह है कि दोनों दलों ने उस खबर का खंडन कर दिया, जिसमें कांग्रेस रहित महागठबंधन की बात कही गई थी।

कांग्रेस को समर्थन भी और दूरी भी
इस बात को और गहराई से समझें तो हाल ही में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में गठबंधन की बात ना बन पाने के बाद कांग्रेस और बसपा अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे थे। चुनाव परिणाम के बाद जब कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला तो मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मध्य प्रदेश और राजस्थान में समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इसके बाद जब मध्य प्रदेश और राजस्थान में शपथ ग्रहण हुआ तो मायावती और अखिलेश यादव ने इस समारोह से दूरी बना ली। यानी मायावाती का इशारा साफ है कि वो इन तीन राज्यों के परिणाम के बाद गठबंधन के सारे समीकरण भांप कर ही सीटों के बंटवारे का कोई फैसला लेना चाहती हैं।

क्या था वो फॉर्मूला, जिसका सपा-बसपा ने किया खंडन
आपको बता दें कि हाल ही में खबर आई थी कि अखिलेश यादव और मायावती ने लोकसभा चुनाव के लिए यूपी में सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप दे दिया है। इस बंटवारे में चौधरी अजीत सिंह की पार्टी आरएलडी को भी शामिल किया गया है। यूपी की 80 लोकसभा सीटों पर तय किए गए फॉर्मूले के मुताबिक बहुजन समाज पार्टी 38 सीटों पर, समाजवादी पार्टी 37 सीटों पर और राष्ट्रीय लोकदल 3 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। यूपी की अमेठी सीट से राहुल गांधी और रायबरेली से सोनिया गांधी चुनाव लड़ते रहे हैं, इसलिए इन दोनों सीटों को कांग्रेस के लिए छोड़ दिया गया था। हालांकि बाद में सपा सांसद रामगोपाल यादव ने गठबंधन के इस फॉर्मूले को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई फैसला अभी नहीं लिया गया है। वहीं, बसपा सांसद सतीश शर्मा ने भी सीट शेयरिंग के इस फॉर्मूले को गलत बताया।












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