रामकृपाल बिहार में भाजपा का यादव चेहरा, क्या जीत के लिए मोदी लगाएंगे फाइनल पंच?
नई दिल्ली। केन्द्रीय मंत्री रामकृपाल यादव बिहार में भाजपा का यादव चेहरा हैं। वे कभी लालू के करीब थे। लेकिन अब लालू के लिए चुनौती हैं। भाजपा अपने इस एंटी लालू फेस को हर हाल में जीत दिलाना चाहती है। इसलिए खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रामकृपाल के चुनाव प्रचार के लिए पटना आ रहे हैं। इससे राजद के खेमे में अफरा-तफरी है। इस सीट लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती, रामकृपाल को चुनौती दे रही हैं। राजद के पास मोदी के टक्कर का कोई प्रचारक नहीं है। मीसा के लिए तेजस्वी, तेज प्रताप और राबड़ी देवी ही स्टार प्रचारक हैं। वैसे पालीगंज में मोदी की रैली को राजद तवज्जो नहीं दे रहा है लेकिन अंदर ही अंदर पार्टी में बेचैनी छा गयी है।

क्यों हैं रामकृपाल भाजपा में यादव चेहरा ?
राजद में रहने के दौरान रामकृपाल यादव तीन बार सांसद बने। 1996 और 2004 में लालू यादव किंग मेकर की भूमिका में थे। उनके मानमाफिक ही सरकार बनती थी। लालू ने कई लोगों को केन्द्र में मंत्री बनवाया लेकिन अपने सबसे करीबी राकृपाल को हमेशा दरकिनार किया। 2014 में वे रामकृपाल को पाटलिपुत्र से टिकट भी नहीं देना चाहते थे। अपमान से आहत रामकृपाल भाजपा में आ गये। 2014 में वे भाजपा के टिकट पर पहली बार जीते थे। नरेन्द्र मोदी चाहते तो उन्हें मंत्री नहीं भी बना सकते थे। लेकिन मोदी ने रामकृपाल को सम्मान दिया और अपनी सरकार में मंत्री बनाया। नरेन्द्र मोदी के इस फैसले को रामकृपाल ने अपने जीवन का सबसे बड़ा पल बताया। तब रामकृपाल ने कहा था कि एक उपेक्षित यादव नेता को मोदी जी ने जो सम्मान दिया है उसको उनके समर्थक कभी भूल नहीं पाएंगे। अब रामकृपाल, भाजपा के लिए बड़ी संभावनाओं वाले नेता बन गये हैं। जब नीतीश अलग थे तब भाजपा भविष्य में रामकृपाल को सीएम चेहरा बनाने की बात सोचती थी।

राजद में आंतरिक बिखराव
2014 में पाटलिपुत्र सीट पर रामकृपाल के जीतने से लालू की ताकत को गहरा धक्का लगा था। तब से लालू परिवार इस सीट को पाने के लिए छटपटा रहा है। राजद वाले जब रामकृपाल को घर का भेदी लंका ढाये कहने लगे तो रामकृपाल लालू यादव की पोल खोलने लगे। इस लिए राजद ने पाटलिपुत्र सीट को नाक का सवाल बना लिया है। राजद विधायक भाई वीरेन्द्र पहले इस सीट पर खुद चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन तेज प्रताप के विरोध के कारण वीरेन्द्र का पत्ता कट गया। कुछ समय के लिए वीरेन्द्र नाराज भी हुए। लेकिन अब वे मीसा भारती के लिए प्रचार कर रहे हैं। लालू यादव के जेल में रहने से राजद के पास कोई करिश्माई नेता नहीं है। ऐसे में तेजस्वी और राबड़ी ही उनके लिए स्टार प्रचारक की भूमिका में हैं। मनेर के विधायक वीरेन्द्र खु्लमखुल्ला तेज प्रताप की आलोचना करते हैं। वे यहां तक कहते हैं कि तेज प्रताप कौन हैं, वे नहीं जानते। तेजप्रताप और वीरेन्द्र की लड़ाई से मीसा भारती को नुकसान हो रहा है।

रामकृपाल जमीन से जुड़े नेता
रामकृपाल शुरू से जमीन से जुड़े नेता रहे हैं। वे एक साधारण कार्यकर्ता से मंत्री बने हैं। शुरू में वे पटना नगर निगम के पार्षद थे। फिर उपमहापौर बने। बहुत मेहनत के बाद वे राजद में आगे बढ़े थे। केन्द्र में मंत्री बनने के बाद भी वे हमेशा अपने क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं। बाढ़ हो या कोई और समस्या हरदम जनता के साथ खड़े नजर आते हैं। आम लोगों में लोकप्रिय होने के बाद भी भाजपा 2019 में कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। रामकृपाल की जीत के लिए एनडीए के तमाम नेता ताकत झोंके हुए हैं। दूसरी तरफ मीसा भारती की सबसे बड़ी खूबी यही है कि वे लालू यादव की बेटी हैं। मीसा भारती की ससुराल दानापुर इलाके में है। उनको अपने संगे संबंधियों से मदद मिल रही है। भाकपा माले ने मीसा भारती को समर्थन दिया है। इस लिए वे दलित वोटरों पर भी भरोसा कर रही हैं। लेकिन रामकृपाल को अपवी छवि के अलावा मोदी, नीतीश और रामविलास के नाम का भी फायदा मिल रहा है। भाजपा का कहना है कि राजद को नॉकआउट करने के लिए मोदी फाइनल पंच के लिए 14 मई को अखाड़े में उतर रहे हैं।












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