फूलनदेवी के हत्यारे शेर सिंह को इंदौर से उतारने की तैयारी में सपाक्स
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में हुए पिछले विधानसभा चुनाव के पहले बनी सपाक्स (सामान्य पिछड़ा वर्ग अल्पसंख्यक कल्याण समाज) पार्टी लोकसभा चुनाव में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है। विधानसभा चुनाव में सपाक्स का एक भी उम्मीदवार नहीं जीता। लगभग सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई, लेकिन सपाक्स का नाम मतदाताओं तक पहुंच गया। सपाक्स के नेता इसी उपलब्धि पर खुश है। अब वे लोकसभा की सामान्य सीट इंदौर से अपना उम्मीदवार खड़ा करना चाहते है। सपाक्स चाहता है कि उसकी पार्टी को ऊंची जातियों का प्रतिनिधि माना जाए और वह गैरआरक्षित वर्ग की लड़ाई लड़ता रहे।

सपाक्स पूर्व सांसद फूलनदेवी के हत्यारे शेरसिंह को लड़ाना चाहती है
सपाक्स ने पहल की है कि इंदौर से दस्यु सुंदरी और पूर्व सांसद फूलनदेवी के हत्यारे शेरसिंह राणा को टिकट दिया जाए। राणा फूलनदेवी हत्याकांड में सजा भुगत रहा है। अक्टूबर 2016 से वह जमानत पर है और लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उसने हाईकोर्ट में अनुमति के लिए याचिका दी है। 1981 में हुए बेहमई हत्याकांड का बदला लेने के लिए शेरसिंह राणा ने फूलनदेवी की हत्या की थी। बेहमई में फूलन ने28 राजपूतों की हत्या की थी।
शेरसिंह राणा खुद को राजपूत की शान कहता है। उसका दावा है कि वह अफगानिस्तान से राजपूत ठाकुर पृथ्वीराज सिंह चौहान की अस्थियां भी लेकर आ चुका है। ये अस्थियां लाने के लिए वह तिहाड़ जेल से फरार हुआ था। सपाक्स के नेताओं का कहना है कि सभी बड़े राजनैतिक दल ठाकुरों और अन्य उच्च जातियों की खुलकर अनदेखी करते है। ऐसे में शेरसिंह राणा सपाक्स के लिए बिल्कुल सही उम्मीदवार हो सकते हैं। बशर्ते उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति मिले।

राणा को कोर्ट से इजाजत मिलना मुश्किल
सपाक्स को अपने उद्देश्य में कामयाबी मिलेगी, इसमें शक है, क्योंकि हत्या केमामले में सजा पा चुके व्यक्ति को चुनाव लड़ने की अनुमति न्यायालय नहीं देता। राणा तभी चुनाव लड़ सकता है, जब उसकी सजा को न्यायालय स्थगित कर दें। राणा को भरोसा है कि अगर हाईकोर्ट चाहे, तो उसे चुनाव लड़ने की परमिशन मिल सकती है। सपाक्स का इरादा है कि पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में अगर राणा चुनाव न लड़ पाए, तो उसके परिवार के किसी और सदस्य को उम्मीदवार बनाया जाए। राणा की पत्नी प्रतिमा राजे राणा पार्टी की पहली पसंद बताई जाती है। शेरसिंह राणा मध्यप्रदेश के छतरपुर का मूल निवासी है।
इंदौर की प्रतिष्ठापूर्ण लोकसभा सीट पर कांग्रेस के पंकज संघवी और भाजपा के शंकर लालवानी के अलावा कुछ निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं। इंदौर जिले की महू तहसील के निवासी शैलेन्द्र शर्मा ने इंदौर लोकसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल किया है। महू इस चुनाव में धार लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। शर्मा चाहते है कि वे चुनाव जीते और महू को वापस इंदौर लोकसभा में ही शामिल करवाएं।

स्पाक्स के सामने कांग्रेस-भाजपा के अलावा भी चुनौती
इंदौर से ही परमानंद तोलानी ने भी लोकसभा चुनाव में अपना नामांकन दाखिल किया है। तोलानी इसके पहले सात बार लोकसभा चुनाव में नामांकन पत्र भर चुके है। हर चुनाव में उनकी हार हुई है। उनका कहना है कि वे अपने परिवार की परंपरा निभाने के लिए चुनाव लड़ते है, उनके पिता ने भी अपने जीवन में 18 चुनाव लड़े थे। वे लोकसभा और विधानसभा हर चुनाव में उम्मीदवार होते थे। अब सुमित्रा महाजन मैदान में नहीं है, तो उन्हें लगता है कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उन्हें जीत मिल सकती है।
इंदौर से ही एक और निर्दलीय प्रत्याशी नासिर मोहम्मद ने पर्चा भरा है। उन्हें विश्वास है कि वे अल्पसंख्यकों के वोट पाकर चुनाव जीत सकते है। मध्यप्रदेश की इंदौर सीट से निर्दलियों के अलावा अनेक राष्ट्रीय और क्षेत्रिय पार्टियां अपने उम्मीदवार खड़े कर रही है। बसपा, सपा, सीपीआई, सीपीएम और टीएमसी भी अपने उम्मीदवार इंदौर से खड़े करें।कांग्रेस और भाजपा दोनों ने इंदौर सीट पर अपने-अपने दावे पेश किए है। दोनों ही पार्टियों को लगता है कि उनकी जीत सुनिश्चित है। कांग्रेस प्रत्याशी पंकज संघवी पहले सुमित्रा महाजन के सामने 1998 में चुनाव लड़ चुके हैं, तब पंकज संघवी को राजनीति का ज्यादा अनुभव नहीं था, इसके बाद उन्होंने विधानसभा और महापौर का चुनाव भी लड़ा हैं, जिसमें वे भले ही न जीत पाए हो, लेकिन उन्होंने भाजपा को कड़ी टक्कर दी। भाजपा इंदौर सीट अपनी ही मान कर मैदान में है।












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