• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

लोकसभा चुनाव 2019: इंदौर में रुका हुआ फैसला बना भाजपा की फांस

By डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी
|

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के लिए अपने गढ़ इंदौर में ही दुविधा बढ़ती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा की स्पीकर और आठ बार की सांसद सुमित्रा महाजन को टिकट देने में देरी की, जिसके बाद सुमित्रा महाजन ने खुद ही चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व इंदौर में सुमित्रा महाजन के उत्तराधिकारी की खोज अभी तक नहीं कर पाया। कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया और उसने प्रचार भी शुरू कर दिया। इससे भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं में दुविधा की स्थिति है। उन्हें लगता है कि उम्मीदवार चयन में देरी भाजपा के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

19 मई को इंदौर में होगा मतदान

19 मई को इंदौर में होगा मतदान

एक महीने बाद 19 मई को इंदौर में लोकसभा के लिए मतदान होना है, लेकिन पूरे मध्यप्रदेश में केवल इंदौर की सीट ही है, जहां से भाजपा अपना प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है। भाजपा की परेशानी तब बढ़ गई, जब टिकट के लिए सुमित्रा महाजन ने अपनी दावेदारी वापस ले ली। वरिष्ठ नेता होने के नाते भाजपा ने सुमित्रा महाजन से अपनी पसंद के प्रत्याशी का नाम आगे बढ़ाने का आग्रह किया। यह तय किया गया कि इंदौर से जो भी प्रत्याशी होगा, वह सुमित्रा महाजन की सिफारिश पर ही होगा, लेकिन अब खुद सुमित्रा महाजन दुविधा में फंसती नजर आ रही है।

क्लिक कर पढ़ें- इंदौर लोकसभा सीट का चुनावी इतिहास

महाजन ने बढ़ाया था शंकर लालवानी का नाम

महाजन ने बढ़ाया था शंकर लालवानी का नाम

सुमित्रा महाजन ने पहले इंदौर विकास प्राधिकरण के चेयरमैन और पार्टी में अपने खास समर्थक शंकर लालवानी का नाम आगे बढ़ाया था। शंकर लालवानी भाजपा में सुमित्रा महाजन के खेमे के माने जाते हैं। वे सिंधी समाज के नेता हैं और इंदौर में बड़ी संख्या में सिंधी समाज के लोग भी रहते हैं। सुमित्रा महाजन की राय थी कि इंदौर से अगर किसी महाराष्ट्रीयन या सिंधी को टिकट दिया जाए, तो एक समुदाय के लोग भाजपा के पक्ष में आ सकते हैं। इन वोटों के लिए भाजपा को कोई मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी।

सुमित्रा महाजन द्वारा बढ़ाए गए नाम पर पार्टी के ही दूसरे नेताओं ने आपत्ति की, उनका कहना है कि जिस व्यक्ति को पार्टी ने विधानसभा टिकट के लायक नहीं समझा, उसे सीधे लोकसभा का टिकट देना अन्य कार्यकर्ताओं के साथ न्याय नहीं होगा। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने भी शंकर लालवानी के नाम पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की थी, लेकिन बाद में खुद सुमित्रा महाजन ने शंकर लालवानी के नाम को रुकवा दिया।

शाह ने सुमित्रा महाजन को सौंपी इंदौर का कैंडिडेट चुनने की जिम्मेदारी

शाह ने सुमित्रा महाजन को सौंपी इंदौर का कैंडिडेट चुनने की जिम्मेदारी

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कह चुके हैं कि सुमित्रा महाजन के प्रस्तावित नामों में से ही कोई इंदौर से भाजपा प्रत्याशी होगा। सुमित्रा महाजन चाहती तो थी अपने बेटे मंदार महाजन को उम्मीदवार बनाना, लेकिन मंदार महाजन सार्वजनिक जीवन में उतने सक्रिय नहीं है। वे पार्षद तक नहीं बने है। ऐसे में सीधे लोकसभा का टिकट देना, जोखिम भरा हो सकता था। शुभचिंतकों की सलाह पर सुमित्रा महाजन ने पार्टी मुख्यालय को जो नाम भेजे, उनमें 4 की जगह 3 ही नाम भेजे गए। मंदार महाजन का नाम उन्होंने खुद नहीं लिखा। हां वे यह जरूर दोहराती रही है कि इंदौर से महाराष्ट्रीयन समाज के ही किसी मराठी भाषी को टिकट मिलना चाहिए, क्योंकि इंदौर होल्कर्स की राजधानी रही है, जो मराठी भाषी थे। बड़ी संख्या में आज भी इंदौर में मराठी समुदाय के लोग है और उनके एक मुश्त वोटों के कारण ही सुमित्रा महाजन की जीत हर बार तय होती है।

आश्चर्यजनक रूप से सुमित्रा महाजन ने शंकर लालवानी के साथ ही पूर्व महापौर उमाशशि शर्मा और भाजपा महिला मोर्चे के नेता अंजू माखीजा का नाम आगे कर दिया। ये दोनों नाम सोच-समझकर आगे बढ़ाए गए। क्योंकि वर्तमान महापौर मालिनी गौड़ के पक्ष में सुमित्रा महाजन नहीं हैं और न ही भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय मालिनी गौड़ के पक्ष में हैं। अंजू माखीजा व्यवसायी परिवार की हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करीबी लोगों में से हैं। जब नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री भी नहीं बने थे, तब से अंजू माखीजा परिवार का संपर्क नरेन्द्र मोदी से हैं। अंजू माखीजा भी सिंधी समाज की है और शंकर लालवानी का विकल्प हो सकती हैं।

टिकट में नहीं, सुमित्रा महाजन ने चिट्ठी लिखने में देर की

महाजन की ओर से देर, कार्यकर्ता निराश

महाजन की ओर से देर, कार्यकर्ता निराश

भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं में इस बात को निराशा का भाव है कि सुमित्रा महाजन का विकल्प चुनने में पार्टी इतनी देर कर रही है। जिन नामों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, उन पर तो विचार ही नहीं हो रहा और मराठी या सिंधी समाज को लेकर खींचतान चल रही है। कांग्रेस ने गुजराती समाज के एक प्रमुख नेता को टिकट दे दिया है और उसने प्रचार भी शुरू कर दिया है। भाजपा के स्थानीय नेताओं के मानना है कि भाजपा को रमेश मेंदोला जैसे किसी विधायक को टिकट दे देना चाहिए, जो विधानसभा चुनाव में भी रिकॉर्ड मतों से जीतते रहे है और उनके विधानसभा क्षेत्र में भी सुमित्रा महाजन की अच्छी लीड रही।

कई लोग समझते है कि अगर कैलाश विजयवर्गीय इंदौर से चुनाव लड़ने का इरादा करते है, तो वे बंगाल में पार्टी का प्रचार करते हुए भी इंदौर से चुनाव जीत सकते हैं, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में कभी कोई चुनाव नहीं हारा और इंदौर-2, इंदौर-4 तथा महू से विधायक चुने जाते रहे हैं। महापौर रहते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में जो काम किए थे और संपर्क बनाया था, वह आज भी पार्टी के काम आ रहा है। अगर कैलाश विजयवर्गीय या रमेश मेंदोला में से कोई उम्मीदवार बनता है, तो इंदौर से भाजपा को हराना असंभव होगा। कांग्रेस भी इंतजार कर रही है कि इंदौर से भाजपा किसे प्रत्याशी बनती है, इसके बाद ही कांग्रेस प्रत्याशी जोड़तोड़ की राजनीति में आगे बढ़ेंगे।

भाजपा के लिए इंदौर इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी के रूप में इंदौर के चुनाव परिणाम आसपास के संसदीय क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकते हैं। जिस तरह ग्वालियर, भोपाल और जबलपुर में भाजपा सोच-समझकर एक-एक कदम आगे बढ़ा रही है, उससे कही अधिक इंदौर प्राथमिकता में है।

Pics: लोकसभा चुनाव में वोटिंग की 15 चुनिंदा तस्वीरें

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
lok sabha elections 2019 madhya pradesh indore seat bjp sumitra mahajan
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X