Lok Sabha Election: बंगाल में कैसे चौतरफा घिर चुकी हैं ममता बनर्जी, क्या बची है कोई उम्मीद?
Bengal Lok Sabha Election: संदेशखाली से पैदा हुए संकट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस चौतरफा घिर चुकी है। प्रदेश में इनका सामना बीजेपी जैसे मजबूत विपक्ष से है, जो केंद्र में एक दशक से सरकार चला रही है।
अबकी बार ममता का सियासी संकट कुछ ज्यादा ही बड़ा दिख रहा है और सवाल है कि लोकसभा चुनावों से पहले वह इससे कैसे निकलेंगी और आगे क्या हो सकता है।

टीएमसी की गले की हड्डी बना शेख शाहजहां
संदेशखाली में अनेकों महिलाओं के यौन उत्पीड़न और गरीबों की जमीनों पर अवैध कब्जे के मास्टरमाइंड शेख शाहजहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए गले की हड्डी बन चुका है।
अदालत की अवमानना का केस चलने का रास्ता साफ
शाहजहां शेख की कस्टडी सीबीआई को सौंपने के कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन की वजह से बंगाल सरकार पर अदालत की अवमानना का मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया है।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार शाम को ही शाहजहां को सीबीआई के हवाले करने का निर्देश दिया था, लेकिन बंगाल सीआईडी इसकी तामील में नाकाम रही।
सुप्रीम कोर्ट में भी बंगाल सरकार को लगा झटका
ममता सरकार इस उम्मीद में कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी को वकील बनाकर सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाने पहुंची कि स्थगन आदेश लेकर पूर्व टीएमसी नेता को सीबीआई के हाथों में जाने से बचा लेगी।
लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगाना तो दूर, इस मामले पर जल्द सुनवाई के लिए भी तैयार नहीं हुआ। लिहाजा प्रवर्तन निदेशालय वापस कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचा, जिसके बाद अदालत ने ममता सरकार को आदेश दिया कि बुधवार शाम 4.15 बजे तक उस आरोपी को निश्चित तौर पर सीबीआई के हवाले कर दे।
कलकत्ता हाई कोर्ट सख्त रुख के बाद हुई शाहजहां शेख की गिरफ्तारी
तथ्य यह है कि ममता बनर्जी की पार्टी ने संदेशखाली की अनेकों महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोपी शाहजहां शेख को तबतक पार्टी से भी नहीं निकाला, जबतक हाई कोर्ट के सख्त रुख के बाद लाचारी में उसकी गिरफ्तारी की गई।
उसकी गिरफ्तारी तब हुई जब कलकत्ता हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि शाहजहां शेख को सिर्फ बंगाल पुलिस ही नहीं, बल्कि ईडी या सीबीआई जैसी केंद्रीय ऐजेंसियां भी गिरफ्तार कर सकती है।
इसके बाद तो टीएमसी के बाहुबली नेता को करीब दो महीने से तलाश रही बंगाल पुलिस को भी तुरंत उसका पता चल गया और कुछ ही घंटों में उसकी गिरफ्तारी दिखा दी गई।
प्रधानमंत्री मोदी से भी मिलीं संदेशखाली की पीड़ित महिलाएं
संदेशखाली आज बंगाल में ही नहीं, पूरे देश में गलत वजहों से चर्चा में है। जिस उत्तर 24 परगना जिले में संदेशखाली है, उसी जिले के बारासात में बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक रैली को संबोधित करने पहुंचे थे, जिसमें ज्यादातर महिलाएं ही थीं।
टीएमसी सरकार संदेशखाली के गुनाहगारों को बचाने में लगी है- पीएम मोदी
इस दौरान संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं ने भी प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की और उनके सामने अपना दर्द और पीड़ा बयां किया।
महिलाओं की रैली में पीएम मोदी ने कहा कि 'संदेशखाली में जो हुआ उससे शर्म से सिर झुक गया। संदेशखाली में टीएमसी ने महिलाओं पर घोर पाप किया है। टीएमसी सरकार संदेशखाली के गुनाहगारों को बचाने में लगी है।'
दरअसल, बंगाल पुलिस से शेख शाहजहां को पकड़ने में जिस तरह से ढिलाई हुई उसपर सवाल उठ ही रहे हैं। फिर उसकी जब गिरफ्तारी दिखाई गई तो उस समय भी शेख शाहजहां अनेकों महिलाओं से रेप का आरोपी नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल के रौबदार नेता वाला अंदाज में दिख रहा था।
संदेशखाली की महिलाओं ने टीएमसी नेता के खिलाफ सड़क पर किया संघर्ष
जिस समय संदेशखाली का सच सुनकर पूरा देश उबल रहा था, वहां की महिलाएं सत्ताधारी टीएमसी के आपराधिक चरित्र वाले नेताओं के खिलाफ जान हथेली में लेकर विरोध में सड़कों पर उतर आई थीं।
उस समय उनका हाल जानने पहुंचने वाली अनेकों महिला संगठनों को भी बंगाल सरकार ने रोकने के लिए पूरा जोर लगा दिया। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो रही थी, लेकिन बंगाल पुलिस का गुस्सा आम लोगों पर उतर रहा था।
बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश
संदेशखाली की घटनाओं पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी पीड़िताओं से बातचीत के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। मंगलवार को राष्ट्रीय महिला आयोग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफारिश कर दी है।
इसके बारे में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा है, 'संदेशखाली एकमात्र घटना नहीं है। पहले भी राज्य में हिंसा की कई घटनाएं हो चुकी हैं और राज्य सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए राष्ट्रीय महिला आयोग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है।'
बंगाल पुलिस के पूर्व बर्ताव पर उठ रहे हैं सवाल
5 जनवरी को संदेशखाली में ईडी की टीम पर टीएमसी नेता के गुंडों ने जानलेवा हमला किया था। उसके बाद वहां की महिलाएं अपने और अपने परिवारों पर हुए उसके अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने लगीं। लेकिन, पूरे मामले में बंगाल पुलिस का रवैया संदेहास्पद रहा है।
शेख शाहजहां बोलेगा तो किसका राज खोलेगा?
फिर बंगाल सरकार ने जिस तरह से हाई कोर्ट के आदेश को ठुकराने की कोशिश की है, उससे संदेह और गहराना स्वाभाविक है कि आखिर शाहजहां शेख ऐसा क्या राज जानता है, जिससे उसके सीबीआई के हाथों में जाने देने से ममता सरकार डर रही है।
संदेशखाली बंगाल में चुनावों का सबसे बड़ा मुद्दा होगा
लोकसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा ममता सरकार के लिए बहुत बड़ा संकट बन चुका है। भाजपा और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से एक हफ्ते में दो बार संदेशखाली का मामला उठाया है, उससे तय है कि बंगाल में यह चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है।
ऐसे में चुनावों के बाद अगर केंद्र की सत्ता में बीजेपी की वापसी होती है और राज्य में उसका प्रदर्शन और बेहतर होता है तो बंगाल में कुछ नया राजनीतिक सीन देखने को मिल सकता है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता।












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