Lok Sabha Election: कैसे Katchatheevu द्वीप पर फंस गया 'इंडिया', अन्नामलाई की वार का किसके पास है जवाब?
Katchatheevu Island News: लोकसभा चुनावों की शुरुआत से पहले ही कच्चातिवु द्वीप पर सूचना के अधिकार (RTI) से एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिससे तमिलनाडु और उससे बाहर भी इंडिया ब्लॉक बुरी तरह से घिर सकता है। भारत के द्वीप को श्रीलंका को सौंपने का फैसला कांग्रेस सरकार ने किया था। यह खुलासा तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई के आरटीआई से हुआ है।
आधिकारिक दस्तावेजों और संसद के रिकॉर्ड से खुलासा हुआ है कि कैसे 1974 में तत्कालीन इंदिरा गांधी की सरकार ने भारतीय संप्रभुता को नजरअंदाज करके अपना द्वीप श्रीलंका को दे दिया था। यह ऐसा मुद्दा है, जो तमिलनाडु की राजनीति के लिए बहुत संवेदनशील मसला है और इसे वापस लेने की मांग डीएमके और अन्नाद्रमुक जैसी पार्टियां शुरू से ही करती रही हैं।

पीएम मोदी ने संसद में किया था खुलासा
10 अगस्त, 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में जिस बात का दावा किया था, उसकी पुष्टि अन्नामलाई के आरटीआई से हो गई है। तब पीएम मोदी ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा था, '...और ये डीएमके वाले, उनकी सरकार, उनके मुख्यमंत्री मुझे चिट्ठी लिखते हैं, अभी भी लिखते हैं और कहते हैं, मोदीजी कच्चातिवु वापस ले आइए...किसने तोड़ा था...श्रीमति इंदिरा गांधी के नेतृत्व में हुआ था.....'
तमिलनाडु कच्चातिवु द्वीप वापस लेने की करता रहा है मांग
जब कांग्रेस सरकार ने भारत के द्वीप को श्रीलंका सौंपने का फैसला किया था तो तमिलनाडु में इसका भारी विरोध हुआ था। तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि इस फैसले के सख्त खिलाफ थे। 1991 में तमिलनाडु विधानसभा से प्रस्ताव पास कराकर इसे वापस लेने की भी मांग हुई।
2008 में अन्नाद्रमुक की जयललिता सरकार कच्चातिवु को वापस लेने के लिए इस करार को असंवैधानिक बताते हुए इसे अमान्य करने की मांग के साथ सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गई थी। 2011 में जयललिता सरकार ने इसको लेकर एक बार फिर से विधानसभा से प्रस्ताव पास कराया।
अन्नामलाई के सवालों के प्रहार को कैसे सहेगा इंडिया ब्लॉक?
अब सवाल है कि तमिलानाडु भाजपा के युवा और तेज-तर्रार नेता के अन्नामलाई जिन्होंने अपने दम पर राज्य में बीजेपी को चुनावी संघर्ष में ला खड़ा किया है, उनके सवालों पर इंडिया ब्लॉक के पास क्या जवाब होगा? क्योंकि, यह सीधा तमिलनाडु और तमिलों के हितों से जुड़ा हुआ भावनात्मक मुद्दा है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के उल्लंघन के नाम पर श्रीलंकाई नौसैनिक हमेशा से भारतीय मछुआरों को निशाना बनाते रहे हैं। यह तमिलनाडु का हमेशा से चुनावी मुद्दा रहा है। राज्य में कांग्रेस उसी इंडिया ब्लॉक का हिस्सा है, जिसमें शामिल डीएमके इस मुद्दे को लेकर बवाल काटती रही है। लिहाजा विपक्ष को अन्नामलाई की कोशिशों से एक बड़ा हथियार मिल गया है।
पीएम मोदी और गृहमंत्री को मिल गया मौका
आरटीआई से तथ्य सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखे पोस्ट में कहा है कि 'आंखें खोलने और चौंकाने वाली! नए तथ्यों से खुलासा हुआ है कि कांग्रेस ने कितनी बेरहमी से कच्चातिवु दे दिया...इसने हर भारतीय को नाराज किया है और लोगों के मन में यह बात आई है कि कांग्रेस पर हम कभी भरोसा नहीं कर सकते! 75 वर्षों से कांग्रेस का कार्य भारतीय एकता, अखंडता और हितों को कमजोर करना रहा है और यह चल ही रहा है....'
वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने लिखा है, 'कांग्रेस के लिए धीमी ताली! उसने जानबूझकर कच्चातिवु दे दिया और को पछतावा भी नहीं था...कभी कांग्रेस का एक सांसद देश बांटने की बात कहता है और कभी वे भारतीय संस्कृति और परंपरा का बदनाम करते हैं। इससे दिखता है कि वे भारत की एकता और अखंडता के विरोधी हैं। वे सिर्फ हमारे देश को बांटना या तोड़ना चाहते हैं।'
कच्चातिवु क्या है?
हिंद महासागर में तमिलनाडु के रामेश्वरम और श्रीलंका के बीच पाक जलडमरूमध्य में स्थित यह 285 एकड़ में फैला निर्जन टापू है। 17वीं शताब्दी में यह द्वीप मदुरई के राजा रामानंद के अधिकार क्षेत्र में था। अंग्रेजों के जमाने में इसको लेकर श्रीलंका की ओर से विवाद खड़ा किया गया। बाद में आकर 1974 में इंदिरा गांधी ने एक समझौता करके कच्चातिवु द्वीप को श्रीलंका को दे दिया।












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