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Lok Sabha Election: कश्मीर में भी BJP का 'कमल' खिलेगा! अनंतनाग सीट पर पैनी नजर, ये नेता बन सकते हैं मददगार

कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 मार्च को श्रीनगर में पहली रैली कर सकते हैं। पिछले हफ्ते वह जम्मू होकर आए थे और करीब 32,000 करोड़ रुपए की सौगात दे आए थे। लोकसभा चुनावों के तारीखों की घोषणा होने वाली है, उससे पहले पीएम मोदी के कश्मीर घाटी के संभावित दौरे को काफी अहम माना जा रहा है।

बीते पांच वर्षों में कश्मीर में काफी बदलाव हुए हैं, जो कि जमीन पर भी नजर आता है। इस तथ्य से मुंह मोड़ना, सच्चाई को झुठलाने जैसा होगा। आज कश्मीर के लोगों और वहां जाने वाले सैलानियों में वह दहशत नहीं रह गई है, जो आर्टिकल-370 के रहते थी। कश्मीर में आज किस तरह का विकास हो रहा है, बहस का मुद्दा इस ओर घूम चुका है।

bjp for kashmir

पहाड़ी समुदाय को एसटी का दर्जा देना बहुत बड़ा दांव
इस बीच केंद्र की मोदी सरकार ने हाल ही में प्रदेश के पहाड़ी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देकर बहुत बड़ा कदम उठाया है। राजनीतिक तौर पर भाजपा सरकार के इस फैसले को बहुत बड़ा दांव माना जा रहा है।

कश्मीर घाटी में एक भी सीट अबतक नहीं जीती बीजेपी
भारतीय जनता पार्टी पिछले दो लोकसभा चुनावों से जम्मू क्षेत्र की दोनों सीटें- जम्मू और उधमपुर के अलावा लद्धाख लोकसभा सीट भी जीत रही है। लेकिन, कश्मीर घाटी की तीनों ही सीटें जीतना उसके लिए अबतक किसी सपने से कम नहीं था।

पहाड़ी बनेंगे अनंतनाग में बीजेपी की जीत की गारंटी?
लेकिन, माना जा रहा है कि पहाड़ी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देकर बीजेपी ने कश्मीर घाटी में पहली लोकसभा सीट जीतने की ही रणनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश की है। दक्षिण कश्मीर की अनंतनाग सीट के पुंछ और राजौरी में पहाड़ी समुदाय का काफी दबदबा है।

भाजपा को उम्मीद है कि पहाड़ी और हिंदू वोट मिलकर कश्मीर घाटी में भी लोकसभा चुनाव जीतने का उसका मंसूबा पूरा कर सकते हैं। कश्मीर घाटी में लोकसभा चुनाव जीतना पार्टी के लिए एक सीट जीतने से ज्यादा धारणा की लड़ाई जीतने जैसा होगा।

सिर्फ अनंतनाग में ही नहीं, बारामूला में भी पहाड़ियों का अच्छा-खासा दबदबा है और पार्टी को उम्मीद है कि उसके फैसले से वहां भी उसे फायदा मिल सकता है।

भाजपा सरकार के फैसले से बहुत खुश है पहाड़ी समुदाय
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक पहाड़ी समुदाय के नेताओं का कहना है कि वे इस फैसले की वजह से बीजेपी के प्रति ऋणी महसूस कर रहे हैं। उनके मुताबिक, 'एसटी का दर्जा देकर उसने उनकी बड़ी सहायता की है और वे इसकी भरपाई' करना चाहते हैं।

हाल के दिनों में जिस तरह से पहाड़ी समुदाय के कुछ बड़े चेहरे भाजपा में शामिल हुए हैं, उससे भी इस समुदाय में पार्टी की लोकप्रियता पर मुहर लगती है।

ये नेता बन सकते हैं बीजेपी के मददगार
पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री मुजफ्फर बेग जब पीएम मोदी की जम्मू वाले सभा में नजर आए थे, तो प्रदेश की राजनीति में सनसनी मच गई थी। वह हाल ही में महबूबा मुफ्ती की पार्टी में पीडीपी में वापस लौटे हैं। वह भी पहाड़ी समुदाय से आते हैं।

अब अटकलें लग रही है कि मुजफ्फर बेग बीजेपी की कश्मीर में पहला लोकसभा चुनाव जीतने के सपने से खुद को जोड़ना चाहते हैं। लेकिन, कहा जा रहा है कि वह फिलहाल भाजपा के चुनाव निशान पर इलेक्शन लड़ने की जगह बीजेपी समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरने की संभावना तलाश रहे हैं।

अभी यह सीट नेशनल कांफ्रेंस के पास है और पहले महबूबा और उनके पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद भी इसका प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

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