Lok Sabha Election: सीट शेयरिंग के बाद कहां बढ़ गई कांग्रेस की मुसीबत?
इंडिया ब्लॉक की सहयोगी पार्टियों के साथ कांग्रेस ने कम से कम तीन महत्वपूर्ण राज्यों में सीटों के बंटवारे का ऐलान किया है। लेकिन, इससे जहां एक ओर कांग्रेस की लोकसभा चुनावों में उम्मीदें बढ़ी हैं, वहीं इसका साइड इफेक्ट भी देखने को मिल रहा है।
यह साइड इफेक्ट यूपी से लेकर गुजरात तक में नजर आ रहा है। पार्टी को तमिलनाडु में भी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले झटके लगने शुरू हो चुके हैं और महाराष्ट्र में तो काफी मजबूत स्थिति से पार्टी अचानक तेजी से लुढ़की हुई नजर आ रही है।

यूपी में कांग्रेस को इन सीटों पर हो सकती है मुश्किल
सीटों के बंटवारे के बाद कांग्रेस के अंदर सबसे ज्यादा असंतोष यूपी में उभरा है। प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को 80 में से 17 सीटें दी हैं। लेकिन, इनमें फर्रुखाबाद, भदोही, श्रावस्ती और लखीमपुर खीरी जैसी सीटें नहीं हैं, जो कांग्रेस ने पहले मांगा था।
पार्टी के दिग्गजों की उम्मीदों पर फिरा पानी
इसकी वजह से पार्टी के दिग्गज और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद, पूर्व सांसद राजेश मिश्रा, बसपा से आए नकुल दुबे और नसीमुद्दीन सिद्दीकी और पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खबरी जैसे नेताओं की सारी उम्मीदों पर पानी फिर चुका है।
ये सब खुद की उम्मीदवारी को पक्की मान बैठे थे। खुर्शीद तो पार्टी के उस पैनल में भी थे, जो सीटों के बंटवारे पर बातचीत कर रही थी।
कांग्रेस आला कमान के फैसले के बाद तो खुर्शीद सोशल मीडिया तक पर अपनी तात्कालिक भड़ास जाहिर कर चुके हैं। बाद में खुर्शीद का टोन तो डाउन हो गया, लेकिन अन्य दावेदार क्या गुल खिलाएंगे, इसके बारे में फिलहाल दावे के साथ कुछ भी कहना मुश्किल है।
गुजरात में अहमद पटेल के बच्चों में मायूसी
इसी तरह से गुजरात में भरूच और भावनगर की सीटें आम आदमी पार्टी को मिली हैं और बाकी 24 सीटों पर कांग्रेस अपने उम्मीदवार उतारेगी। लेकिन, कांग्रेस के इस फैसले ने पार्टी के दिवंगत नेता और सोनिया गांधी के राजनीतिक अहमद पटेल के बच्चों के सियासी सपनों को तार-तार कर दिया है।
मैं इस गठबंधन के खिलाफ-अहमद पटेल के बेटे
हालांकि, पटेल ने आखिरी बार भरूच में 1985 में जीत दर्ज की थी। लेकिन, उसके बाद से यह बीजेपी के पास जा रही है। इस बार अहमद पटेल की बेटी मुमताज और बेटा फैसल पटेल दोनों ही सहानुभूति वोट बटोरने की उम्मीद पाले हुए थे।
पार्टी के इस फैसले पर दोनों ने ही मायूसी जताई है। फैसल पटेल ने कहा है, 'नामांकन और चुनाव में अभी भी काफी वक्त है। अभी भी काफी चीजें हो सकती हैं। कार्यकर्ता और मैं इस गठबंधन के खिलाफ हूं, लेकिन पार्टी जो कहेगी, हम उसे स्वीकार करेंगे।'
तमिलनाडु में भी कांग्रेस को लगा झटका
उधर तमिलनाडु में तो कांग्रेस को और बड़ा झटका लगा है। पार्टी की तीन बार की सीटिंग विधायक विजयाधरानी ने पहले अपनी विधायकी से इस्तीफा दिया और फिर कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गईं।
वह कन्याकुमारी जिले की विलावनकोड विधानसभा का प्रतिनिधित्व करती आई हैं। बताया जाता है कि वह पार्टी में अपनी बार-बार की उपेक्षा से परेशान थीं और उन्हें लगा कि कांग्रेस इस बार भी उन्हें कन्याकुमारी लोकसभा सीट से टिकट नहीं देगी, इसलिए उन्होंने भाजपा का रुख कर लेने में ही भलाई समझी।
जहां तक महाराष्ट्र की बात है तो वहां लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की स्थिति इंडिया ब्लॉक के दोनों सहयोगियों एनसीपी शरदचंद पवार और शिवसेना (यूबीटी) के मुकाबले बेहतर बताई जा रही थी। लेकिन, एक के बाद एक करके कांग्रेस के चार दिग्गजों ने पार्टी छोड़ दी है और चौथे ने नोटिस दे रखा है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण तो क्रमश: शिवसेना और बीजेपी में शामिल होकर राज्यसभा चुनाव भी जीत चुके हैं और राज्य के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी एनसीपी में जा चुके हैं और उनके विधायक बेटे जीशान सिद्दीकी ने भी उसका संकेत दे रखा है।












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