Lok Sabha Election: वायनाड में BJP की 'स्मृति' बनेंगे के सुरेंद्रन! राहुल गांधी के लिए क्यों नहीं आसान है दांव
Wayanad Lok Sabha Election News 2024: बीजेपी ने केरल के वायनाड सीट से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन को उतराकर इस हाई प्रोफाइल लोकसभा सीट का मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी यहां 2019 में बड़े अंतर से जीते थे। लेकिन, एलडीएफ और एनडीए के कद्दावर उम्मीदवारों की वजह से इस बार कांग्रेस पार्टी के वास्तविक सुप्रीमो के लिए चुनाव आसान नहीं होगा।
वायनाड लोकसभा सीट पर विपक्षी इंडिया ब्लॉक के दो कद्दावर नेता पहले से ही आमने-सामने हैं। एलडीएफ की ओर से सीपीआई महासचिव डी राजा की पत्नी एनी राजा और इस सीट से कांग्रेस के मौजूदा सांसद राहुल गांधी। लेकिन, पहले चुनाव लड़ने की अनिच्छा जता रहे सुरेंद्रन को बड़ी जिम्मेदारी देकर भाजपा ने यहां का मुकाबला दिलचस्प बना दिया है।

वायनाड में पिछली बार बड़े अंतर से जीते थे राहुल
2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल वायनाड से 4.31 लाख वोटों के बड़े अंतर से चुनाव जीते थे। उनके मुकाबले कोई भी दिग्गज चेहरा नहीं होने से तब उन्हें एकतरफा 64.64% वोट मिले थे। तब सीपीआई में उनके मुकाबले पीपी सुनीर को 25.13% वोट मिले थे। वहीं बीजेपी की सहयोगी भारत धर्म जन सेना (BDJS) के तुषार वेल्लापल्ली को मात्र 7.21% वोट मिल पाए थे।
वायनाड को राहुल के लिए केकवॉक नहीं रहने देना चाहती बीजेपी
टीओआई ने एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले बताया है कि सुरेंद्र की उम्मीदवारी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तय की है। इसकी मूल वजह ये बताई जा रही है कि भारतीय जनता पार्टी किसी भी सूरत में राहुल गांधी के लिए इस बार वायनाड का मुकाबला आसान नहीं रहने देना चाहती। जबकि, पार्टी इस चुनाव में अपना राष्ट्रव्यापी वोट शेयर 50% से ऊपर रखने के मिशन पर पहले से ही चल रही है।
बीजेपी का हौसला इसलिए बुलंद है कि यूपी की अमेठी सीट भी हमेशा से गांधी-नेहरू परिवार का गढ़ थी। लेकिन, पिछली बार केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने वहां पर राहुल गांधी को हरा दिया। के सुरेंद्रन को टिकट देने का मतलब साफ है कि भाजपा वायनाड में भी अच्छा प्रदर्शन करना चाहती है।
केरल में बीजेपी के लिए कारगर साबित हो चुके हैं सुरेंद्रन
केरल विधानसभा चुनावों में सुरेंद्रन मंजेश्वरम और पथानामथिट्टा दोनों ही सीटों पर लड़े थे और बीजेपी का वोट शेयर अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया था। केरल बीजेपी के अध्यक्ष की रणनीति अभी से साफ है। 26 अप्रैल को होने वाले चुनाव को लेकर बीजेपी प्रत्याशी ने कहा है,'वायनाड के लोग जरूर पूछेंगे कि इंडिया गठबंधन के दो वरिष्ठ नेता एक ही चुनाव क्षेत्र में एक-दूसरे के खिलाफ क्यों लड़ रहे हैं।'
2014 में भाजपा उम्मीदवार को वायनाड में ज्यादा वोट मिले थे
अगर भाजपा उम्मीदवार के बढ़े हुए मनोबल को परखने की कोशिश करना चाहें तो 2014 के लोकसभा चुनाव के परिणाम पर भी नजर डालना पड़ेगा। तब बीजेपी खुद इस सीट पर चुनाव लड़ी थी और उसे 2019 से ज्यादा यानी 8.82% वोट मिले थे। वहीं सीपीआई प्रत्याशी ने तब 38.92% वोट पाया था; और कांग्रेस उम्मीदवार एमआई श्रीनिवास महज 41.20% वोट लेकर चुनाव जीते थे।
राहुल गांधी के लिए क्यों नहीं आसान होगा दांव?
मतलब, 2019 में कांग्रेस उम्मीदवार के मुकाबले में बाकी दोनों प्रतिद्वंद्वी दलों के प्रत्याशी ज्यादा मजबूत नहीं थे। लेकिन, इस बार सीपीआई ने भी अपने बड़े चेहरे पर दांव लगाया है और भाजपा ने भी प्रदेश के अपने सबसे बड़े दिग्गज पर भरोसा किया है। लिहाजा, राहुल गांधी के चुनाव पिछली बार जितना ही आसान होगा, यह कहना बहुत ही मुश्किल है।
वायनाड में बीजेपी की 'स्मृति' बनेंगे के सुरेंद्रन!
ऊपर से कांग्रेस और सीपीआई दोनों ही राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी-विरोधी इंडिया ब्लॉ़क में शामिल हैं। राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चुनाव लड़ने वाली बीजेपी के लिए गैर-यूडीएफ-गैर एलडीएफ वोटरों तक यह संदेश पहुंचाना बहुत आसान साबित हो सकता कि इन दोनों की विचारधारा एक ही है-मोदी विरोध या बीजीपी विरोध।
जबकि, राहुल और एनी राजा दोनों के ही सामने इस विरोधाभास के बारे में मतदाताओं को समझाने की चुनौती रहेगी। ऐसे वोटरों को भाजपा अपनी ओर खींचने की कोशिश करेगी या फिर वे मतदान से दूर भी रहे तो उन दोनों दलों को ही नुकसान हो सकता है और फायदे में सिर्फ बीजेपी रह सकती है।












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